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जिले में घट रही कुष्ठ रोगियों की संख्या
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महोबा। जनपद में लेप्रोसी (कुष्ठ रोग) के मरीजों की संख्या घट रही है। तीन साल के आंकड़ों पर गौर किया जाए तो साल दर साल कुष्ठ रोगियों की संख्या में कमी आई है। कोविड संक्रमण के दौर में भी लेप्रोसी के जीवाणु को फैलने से रोकने में काफी हद तक कामयाबी मिली है।
जिला कुष्ठ अधिकारी डा. बीएम खैर का कहना है कि कुष्ठ मरीज की तलाश और जागरुकता के लिए स्पर्श कुष्ठ जागरुकता अभियान चलाया जा रहा है। कुष्ठ मरीजों का चिन्हीकरण, उपचार के साथ ही मेडिकल किट भी दी जा रही है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2019-20 में 49, वर्ष 2020-21 में 36 और वर्ष 2021-22 में अब तक 32 मरीज पंजीकृत किए गए हैं।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. सुधाकर पांडेय बताते हैं कि कुष्ठ के मरीज को छुआछूत व भेदभाव का सामना करना पड़ता है। यह सर्वथा गलत है, संक्रामक बीमारी होने के बावजूद यह छूने या हाथ मिलाने, उठने-बैठने या कुछ समय के लिए साथ रहने से नहीं फैलती है। इस बीमारी का नियमित रूप से चेकअप कराने और उपचार से पूरी तरह ठीक किया जा सकता है।
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दो प्रकार का होता है कुष्ठ रोग
प्रारंभिक अवस्था में होने वाला कुष्ठ रोग असंक्रामक होता है, जिसे पासी बेसीलेसरी (पीबी) कहते हैं। पीबी रोगी से यह रोग दूसरों में नहीं फैलता है। छह माह तक दवा का सेवन करने से रोगी स्वस्थ हो सकता है। इस दौरान बीच में ही दवा छोड़ने से वह रोगी (एमबी) संक्रामक बन जाता है। इस तरह के मरीजों को एक वर्ष तक दवा का सेवन करना होता है। एमबी मरीज के छींकने से दूसरों में फैल जाता है।
अभियान में एक कुष्ठ रोगी की पहचान
जनपद में चल रहे स्पर्श कुष्ठ जागरुकता अभियान के तहत कबरई ब्लाक पवा, बिलखी व मुरानी गांवों में गोष्ठियां कर लोगों को कुष्ठ रोग के प्रति जागरूक किया गया। फिजियोथेरेपिस्ट डा. सुरेंद्र सिंह ने बताया कि पवा गांव में दो कुष्ठ रोगियों को एमसीआर स्लीपर दी गई। शासन की ओर इसे इन मरीजों को कुष्ठावस्था पेंशन भी दी जा रही है। एनएमएस गिरिराज कश्यप ने कहा कि अभियान में एक कुष्ठ रोगी चिन्हित किया गया है। वह पड़ोसी जनपद हमीरपुर का रहना वाला है। उसे दवा व उचित सलाह देकर जनपद में सूचना भेज दी गई है।
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जिला कुष्ठ अधिकारी डा. बीएम खैर का कहना है कि कुष्ठ मरीज की तलाश और जागरुकता के लिए स्पर्श कुष्ठ जागरुकता अभियान चलाया जा रहा है। कुष्ठ मरीजों का चिन्हीकरण, उपचार के साथ ही मेडिकल किट भी दी जा रही है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2019-20 में 49, वर्ष 2020-21 में 36 और वर्ष 2021-22 में अब तक 32 मरीज पंजीकृत किए गए हैं।
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मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. सुधाकर पांडेय बताते हैं कि कुष्ठ के मरीज को छुआछूत व भेदभाव का सामना करना पड़ता है। यह सर्वथा गलत है, संक्रामक बीमारी होने के बावजूद यह छूने या हाथ मिलाने, उठने-बैठने या कुछ समय के लिए साथ रहने से नहीं फैलती है। इस बीमारी का नियमित रूप से चेकअप कराने और उपचार से पूरी तरह ठीक किया जा सकता है।
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दो प्रकार का होता है कुष्ठ रोग
प्रारंभिक अवस्था में होने वाला कुष्ठ रोग असंक्रामक होता है, जिसे पासी बेसीलेसरी (पीबी) कहते हैं। पीबी रोगी से यह रोग दूसरों में नहीं फैलता है। छह माह तक दवा का सेवन करने से रोगी स्वस्थ हो सकता है। इस दौरान बीच में ही दवा छोड़ने से वह रोगी (एमबी) संक्रामक बन जाता है। इस तरह के मरीजों को एक वर्ष तक दवा का सेवन करना होता है। एमबी मरीज के छींकने से दूसरों में फैल जाता है।
अभियान में एक कुष्ठ रोगी की पहचान
जनपद में चल रहे स्पर्श कुष्ठ जागरुकता अभियान के तहत कबरई ब्लाक पवा, बिलखी व मुरानी गांवों में गोष्ठियां कर लोगों को कुष्ठ रोग के प्रति जागरूक किया गया। फिजियोथेरेपिस्ट डा. सुरेंद्र सिंह ने बताया कि पवा गांव में दो कुष्ठ रोगियों को एमसीआर स्लीपर दी गई। शासन की ओर इसे इन मरीजों को कुष्ठावस्था पेंशन भी दी जा रही है। एनएमएस गिरिराज कश्यप ने कहा कि अभियान में एक कुष्ठ रोगी चिन्हित किया गया है। वह पड़ोसी जनपद हमीरपुर का रहना वाला है। उसे दवा व उचित सलाह देकर जनपद में सूचना भेज दी गई है।