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ढोल नगाड़े बजाते लोग व मौजूद भीड़
अमर उजाला ब्यूरो, महोबा
Updated Mon, 10 Oct 2016 10:45 PM IST
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दुलुदल जुलूस का शुभारंभ कराते जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष पुष्पेंद्र यादव
- फोटो : अमर उजाला
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मोहर्रम की सातवीं पर हजरत इमाम हुसैन की सवारी का 160 वां दुलदुल जुलूस बैंडबाजों और ढोल नगाड़ों के बीच रात कोे निकाला गया। दुलदुल जुलूस में यूपी एमपी के कई जिलों के लोगों की भारी भीड़ जुटी। हिंदू मुस्लिम ने इमाम हुसैन की सवारी दुलदुल को जलेबी खिलाकर मन्नतें मांगी।। लोगाें ने
मन्नतें पूरी होने पर सोने चांदी के नीबू भी चढ़ाए। चरखारी कस्बे में हजरत इमाम हुसैन की सवारी (दुलदुल जुलूस) की शुरूआत 1857 से की गई थी। जुलूस निकालने की पंरपरा आज भी निरंतर चली आ रही है। मोहर्रम की सातवीं तारीख को रात करीब 11:30 बजे हमीरपुर की जिला पंचायत अध्यक्ष
वंदना यादव और जिला सहकारी बैंक महोबा के अध्यक्ष पुष्पेंद्र सिंह यादव ने दुलदुल को जलेबी खिलाई और माला पहनाकर जुलूस की शुरूआत कराई। दुलदुल जुलूस देखने के लिए जुलूस मार्ग पर भारी भीड़ जुटी। हजरत इमाम हुसैन की सवारी दुलदुल को जलेबी खिलाने और नींबू चढ़ाने के लिए रविवार की
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रात करीब नौ बजे से ही लोग बीपार्क पर पहुंच गए। इस मौके पर पूर्व विधायक राकेश गोस्वामी, भाजपा जिलाध्यक्ष जितेंद्र सिंह सेंगर, चेयरमैन प्रतिनिधि मुईया, सपा जिलाध्यक्ष बाबू मंसूरी, जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि रमेश यादव, निसार खां, मौनू, नवी अहमद सहित तमाम लोग मौजूद रहे। इसके
बाद बैंडबाजों और ढोल नगाड़ों के बीच बीपार्क से दुलदुल जुलूस शुरू किया गया। जो झंडा बाजार ड्योढी दरवाजे से होता हुआ गोलाघाट में पहुंचकर समाप्त हुआ। दुलदुल जुलूस दौरान जगह-जगह बजरौटी की गूंज सुनाई दी। छतरपुर, नौगांव, लवकुश नगर, अलीपुरा, जतौरा, चंदला, कुलपहाड़, बेलाताल से आए
बैंड ने मरसिया की धुन बजाई। दुलदुल जुलूस के दौरान डीएम वीरेश्वर सिंह, पुलिस अधीक्षक गौरव सिंह, सीओ गुरुदयाल कटियार, कोतवाली दलजीत सिंह ने पूरी रात व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
हिंदू मुस्लिम भाइयों ने एकता की मिशाल कायम की
चरखारी में मोहर्रम और नवरात्र पर्व पर हिंदू मुस्लिम भाइयों ने आपसी भाईचारे की मिशाल पेश की। नवरात्र पर नौ दिन से बराबर जिन माइकों से दुर्गा पंडलों पर भजन कीर्तन चलते रहे। रात11 बजे से उन्हीं माइकों पर मरसिये पढ़े गए। इतना ही नहीं नवदुर्गा समिति ने दुलदुल जुलूस ने सहयोग किया तो मुस्लिम भाइयों ने जवारा जुलूस ने सहयोग कर भाईचारा कायम किया।
एक रात में बिक गई 20 कुंतल जलेबी
दुलदुल को जलेबी खिलाकर मन्नतें मानने के लिए जुटी भीड़ द्वारा खरीददारी करने से एक रात में 20 कुंतल जलेबी की बिक्री हुई। वहीं, मन्नतें पूरी होने पर चांदी के नींबू चढ़ाने के लिए करीब दो किलो चांदी के नींबू बिके। कुछ लोगों ने सोने के नींबू भी चढ़ाए। जिससे ज्वैलर्स की जमकर बिक्री हुई।
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मन्नतें पूरी होने पर सोने चांदी के नीबू भी चढ़ाए। चरखारी कस्बे में हजरत इमाम हुसैन की सवारी (दुलदुल जुलूस) की शुरूआत 1857 से की गई थी। जुलूस निकालने की पंरपरा आज भी निरंतर चली आ रही है। मोहर्रम की सातवीं तारीख को रात करीब 11:30 बजे हमीरपुर की जिला पंचायत अध्यक्ष
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वंदना यादव और जिला सहकारी बैंक महोबा के अध्यक्ष पुष्पेंद्र सिंह यादव ने दुलदुल को जलेबी खिलाई और माला पहनाकर जुलूस की शुरूआत कराई। दुलदुल जुलूस देखने के लिए जुलूस मार्ग पर भारी भीड़ जुटी। हजरत इमाम हुसैन की सवारी दुलदुल को जलेबी खिलाने और नींबू चढ़ाने के लिए रविवार की
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रात करीब नौ बजे से ही लोग बीपार्क पर पहुंच गए। इस मौके पर पूर्व विधायक राकेश गोस्वामी, भाजपा जिलाध्यक्ष जितेंद्र सिंह सेंगर, चेयरमैन प्रतिनिधि मुईया, सपा जिलाध्यक्ष बाबू मंसूरी, जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि रमेश यादव, निसार खां, मौनू, नवी अहमद सहित तमाम लोग मौजूद रहे। इसके
बाद बैंडबाजों और ढोल नगाड़ों के बीच बीपार्क से दुलदुल जुलूस शुरू किया गया। जो झंडा बाजार ड्योढी दरवाजे से होता हुआ गोलाघाट में पहुंचकर समाप्त हुआ। दुलदुल जुलूस दौरान जगह-जगह बजरौटी की गूंज सुनाई दी। छतरपुर, नौगांव, लवकुश नगर, अलीपुरा, जतौरा, चंदला, कुलपहाड़, बेलाताल से आए
बैंड ने मरसिया की धुन बजाई। दुलदुल जुलूस के दौरान डीएम वीरेश्वर सिंह, पुलिस अधीक्षक गौरव सिंह, सीओ गुरुदयाल कटियार, कोतवाली दलजीत सिंह ने पूरी रात व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
हिंदू मुस्लिम भाइयों ने एकता की मिशाल कायम की
चरखारी में मोहर्रम और नवरात्र पर्व पर हिंदू मुस्लिम भाइयों ने आपसी भाईचारे की मिशाल पेश की। नवरात्र पर नौ दिन से बराबर जिन माइकों से दुर्गा पंडलों पर भजन कीर्तन चलते रहे। रात11 बजे से उन्हीं माइकों पर मरसिये पढ़े गए। इतना ही नहीं नवदुर्गा समिति ने दुलदुल जुलूस ने सहयोग किया तो मुस्लिम भाइयों ने जवारा जुलूस ने सहयोग कर भाईचारा कायम किया।
एक रात में बिक गई 20 कुंतल जलेबी
दुलदुल को जलेबी खिलाकर मन्नतें मानने के लिए जुटी भीड़ द्वारा खरीददारी करने से एक रात में 20 कुंतल जलेबी की बिक्री हुई। वहीं, मन्नतें पूरी होने पर चांदी के नींबू चढ़ाने के लिए करीब दो किलो चांदी के नींबू बिके। कुछ लोगों ने सोने के नींबू भी चढ़ाए। जिससे ज्वैलर्स की जमकर बिक्री हुई।