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श्मशान घाट पर पड़ी संक्रमित पीपीई किटें, निस्तारण इंतजाम नहीं
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महोबा। शहर के छतरपुर रोड स्थित श्मशान घाट पर इस्तेमाल की गई संक्रमित पीपीई किटें इधर-उधर पड़ी हैं। अंतिम संस्कार करने पहुंचने वाले लोग व एंबुलेंस कर्मी पीपीई किट श्मशान घाट में ही फेंक जाते हैं। इनके निस्तारण की कोई व्यवस्था न होने से संक्रमण बढ़ने का खतरा बढ़ गया है। खास बात यह है कि जिम्मेदार अधिकारियों का भी ध्यान इस ओर नहीं जा रहा है।
कोरोना से मौत होने पर परिजन पीपीई किट पहनकर श्मशान घाटों पर अंतिम संस्कार कर रहे हैं। कुछ लोग वाहनों से तो कुछ एंबुलेंस से घाट तक शव ले जा रहे हैं। अंतिम संस्कार के बाद परिजन व अन्य लोग संक्रमित पीपीई किटें शमशान घाट पर इधर-उधर फेंक देते हैं। सोमवार को छतरपुर रोड स्थित श्मशान घाट पर एक दर्जन से अधिक पीपीई किटें इधर-उधर पड़ी नजर आई। जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग ने इनके निस्तारण की कोई व्यवस्था नहीं की है।
उधर, इस संबंध में मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. मनोज कांत सिन्हा का कहना है कि कोविड प्रोटोकाल के अनुसार ही संक्रमित व्यक्ति का अंतिम संस्कार किया जाना चाहिए। अगर कहीं पीपीई किट छोड़ी गईं तो उनका निस्तारण किया जाना चाहिए। खुले में पीपीई किट छोड़ने से संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
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कोरोना से मौत होने पर परिजन पीपीई किट पहनकर श्मशान घाटों पर अंतिम संस्कार कर रहे हैं। कुछ लोग वाहनों से तो कुछ एंबुलेंस से घाट तक शव ले जा रहे हैं। अंतिम संस्कार के बाद परिजन व अन्य लोग संक्रमित पीपीई किटें शमशान घाट पर इधर-उधर फेंक देते हैं। सोमवार को छतरपुर रोड स्थित श्मशान घाट पर एक दर्जन से अधिक पीपीई किटें इधर-उधर पड़ी नजर आई। जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग ने इनके निस्तारण की कोई व्यवस्था नहीं की है।
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उधर, इस संबंध में मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. मनोज कांत सिन्हा का कहना है कि कोविड प्रोटोकाल के अनुसार ही संक्रमित व्यक्ति का अंतिम संस्कार किया जाना चाहिए। अगर कहीं पीपीई किट छोड़ी गईं तो उनका निस्तारण किया जाना चाहिए। खुले में पीपीई किट छोड़ने से संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
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