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जिस बीमारी से कांप रहे लोग.... वहां जान की परवाह किए फर्ज निभा रहे चिकित्सक
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महोबा। देश में फैली कोरोना महामारी का नाम जेहन में आने पर जहां लोग कांप जाते हैं। वहीं डॉक्टर ड्यूटी पर डटे हैं। न अपनी चिंता और न ही परिवार की फिक्र, बस मन में मरीजों व देश की सेवा का जज्बा लिए यह चिकित्सक अपने काम को अंजाम दे रहे हैं। डॉक्टरों को बाहर कोरोना से लड़ने के साथ-साथ अपने परिवार वालों को भी समझाना पड़ रहा है। रोज आती कोरोना की खबरों को सुन परिवार वाले घर से निकलने से उन्हें रोकते हैं तो डॉक्टर फर्ज निभाने की बात कहकर उन्हें समझाते हैं। अपनी जान की परवाह किए संकट के दौर में कोराना योद्घा डटकर मुकाबला कर रहे हैं। संकट की घड़ी में उनके हौसलों और मेहनत को हर कोई सलाम कर रहा है।
पूरा देश कोरोना के खौफ में हैं। हर कोई अपने अपने घरों में कैद हैं। ऐसे मुश्किल समय में भी दिन-रात जिला अस्पताल के डॉक्टर ड्यूटी कर रहे हैं। अस्पताल आने वाले मरीजों की जांच से लेकर उनका उपचार किया जा रहा है। जिले में अभी तक भले ही एक भी मरीज कोरोना पॉजीटिव नहीं निकला है लेकिन स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टर जुटे हैं। ऐसा ही एक नाम है जिला अस्पताल में तैनात डॉक्टर यतेंद्र पुरवार का। वह ड्यूटी के बाद भी अस्पताल में आने वाले मरीजों के उपचार में जुटे हैं। देश में कोरोना को लेकर जहां लोगों में सिहरन पैदा हो रही है। ऐसे मुश्किल समय में डॉक्टर यतेंद्र पुरवार दिन-रात सेवाएं दे रहे हैं। उनका कहना है कि देश सेवा का इससे अच्छा मौका और क्या हो सकता है। सबसे पहले देश सेवा है इसके बाद उनका घर और परिवार।
कस्बा पनवाड़ी निवासी डॉ. पंकज तिवारी व उनकी पत्नी डॉ. प्रियंका तिवारी प्राइवेट क्लीनिक चलाती हैं। पंकज का छोटे भाई आलोक तिवारी दिल्ली के भीमराव अंबेडकर कॉलेज में डॉक्टर है और जिंदगी को दांव पर लगाकर दिन रात सेवा कर रहे हैं। छोटे भाई की प्रेरणा से पंकज तिवारी व उनकी पत्नी गांव-गांव जाकर मरीजों को नि:शुल्क जांच व परामर्श दे रहे हैं। गांवों में जाकर लोगों को मास्क देकर हाथ धुलने के तरीके बता रहे हैं। लोगों को नि:शुल्क दवा व जरूरतमंद को भोजन भी दे रहे हैं। एक ओर जहां लोग घरों में कैद हैं वहीं डॉ. पंकज गांव-गांव जाकर 10 से 12 घंटे संकट के इस दौर में मरीजों की सेवा कर रहे हैं। उनकी पत्नी क्लीनिक में ही मरीजों को नि:शुल्क परामर्श और कोरोना की जांच कर रही हैं।
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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पनवाड़ी में स्थापित कोरोना सेंटर में कानपुर निवासी डॉ. राजेश वर्मा की ड्यूटी लगी है। वह पूरी ईमानदारी से आने वाले मरीजों की जांच कर रहे हैं। डॉ. राजेश का कहना है कि घर पर उनकी 12 वर्षीय बेटी राजनंदनी के पैर का फ्रैक्चर हो गया है। आपरेशन के बाद घर से उनकी बेटी फोन करती है और रोकर घर आने की बात कहती है। वह वीडियो कॉल के जरिए बात करके उसे समझाते हैं कि वह बहुत जल्द घर आएंगे और ढेर सारे खिलौने व टॉफी लाएंगे। मां चंदादेवी भी बाथरूम में गिर पड़ी उनकी कमर में फ्रैक्चर है लेकिन इस समय देश बड़ी संकट की स्थिति में है। इसलिए हमारे लिए परिवार से ज्यादा देश सर्वोपरि है इसलिए घर से दूर रहकर अपना कर्म और धर्म निभा रहे हैं ताकि जल्द से जल्द कोरोना के संकट से निकला जा सके।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कुलपहाड़ में तैनात स्टॉफ नर्स जूली दिन-रात मरीजों को सेवाएं दे रहीं हैं। कोरोना महामारी का भय छोड़कर अपना फर्ज निभाने के उनके हौंसले को हर कोई सलाम कर रहा हैं। जूली ने बताया कि उसके दो पुत्रियां काव्या (08) व किशना एक साल की हैं। बच्चों की बजह से ड्यूटी में दिक्कत न आए इसलिए दोनों बच्चियों को ननिहाल हरदोई भेज दिया है। छोटी बच्ची बहुत याद करती है और रोती रहती है लेकिन वीडियो कॉल करके दिलाशा देती है और कुछ पल ऐसा लगता है वह सभी के पास हैं। 24 घंटे ड्यूटी लगी है। उसका कहना है कि जिसके लिए वह आए हैं वह काम पहले हैं। देश सेवा से बढ़कर कोई पुण्य नहीं हो सकता।
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पूरा देश कोरोना के खौफ में हैं। हर कोई अपने अपने घरों में कैद हैं। ऐसे मुश्किल समय में भी दिन-रात जिला अस्पताल के डॉक्टर ड्यूटी कर रहे हैं। अस्पताल आने वाले मरीजों की जांच से लेकर उनका उपचार किया जा रहा है। जिले में अभी तक भले ही एक भी मरीज कोरोना पॉजीटिव नहीं निकला है लेकिन स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टर जुटे हैं। ऐसा ही एक नाम है जिला अस्पताल में तैनात डॉक्टर यतेंद्र पुरवार का। वह ड्यूटी के बाद भी अस्पताल में आने वाले मरीजों के उपचार में जुटे हैं। देश में कोरोना को लेकर जहां लोगों में सिहरन पैदा हो रही है। ऐसे मुश्किल समय में डॉक्टर यतेंद्र पुरवार दिन-रात सेवाएं दे रहे हैं। उनका कहना है कि देश सेवा का इससे अच्छा मौका और क्या हो सकता है। सबसे पहले देश सेवा है इसके बाद उनका घर और परिवार।
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कस्बा पनवाड़ी निवासी डॉ. पंकज तिवारी व उनकी पत्नी डॉ. प्रियंका तिवारी प्राइवेट क्लीनिक चलाती हैं। पंकज का छोटे भाई आलोक तिवारी दिल्ली के भीमराव अंबेडकर कॉलेज में डॉक्टर है और जिंदगी को दांव पर लगाकर दिन रात सेवा कर रहे हैं। छोटे भाई की प्रेरणा से पंकज तिवारी व उनकी पत्नी गांव-गांव जाकर मरीजों को नि:शुल्क जांच व परामर्श दे रहे हैं। गांवों में जाकर लोगों को मास्क देकर हाथ धुलने के तरीके बता रहे हैं। लोगों को नि:शुल्क दवा व जरूरतमंद को भोजन भी दे रहे हैं। एक ओर जहां लोग घरों में कैद हैं वहीं डॉ. पंकज गांव-गांव जाकर 10 से 12 घंटे संकट के इस दौर में मरीजों की सेवा कर रहे हैं। उनकी पत्नी क्लीनिक में ही मरीजों को नि:शुल्क परामर्श और कोरोना की जांच कर रही हैं।
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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पनवाड़ी में स्थापित कोरोना सेंटर में कानपुर निवासी डॉ. राजेश वर्मा की ड्यूटी लगी है। वह पूरी ईमानदारी से आने वाले मरीजों की जांच कर रहे हैं। डॉ. राजेश का कहना है कि घर पर उनकी 12 वर्षीय बेटी राजनंदनी के पैर का फ्रैक्चर हो गया है। आपरेशन के बाद घर से उनकी बेटी फोन करती है और रोकर घर आने की बात कहती है। वह वीडियो कॉल के जरिए बात करके उसे समझाते हैं कि वह बहुत जल्द घर आएंगे और ढेर सारे खिलौने व टॉफी लाएंगे। मां चंदादेवी भी बाथरूम में गिर पड़ी उनकी कमर में फ्रैक्चर है लेकिन इस समय देश बड़ी संकट की स्थिति में है। इसलिए हमारे लिए परिवार से ज्यादा देश सर्वोपरि है इसलिए घर से दूर रहकर अपना कर्म और धर्म निभा रहे हैं ताकि जल्द से जल्द कोरोना के संकट से निकला जा सके।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कुलपहाड़ में तैनात स्टॉफ नर्स जूली दिन-रात मरीजों को सेवाएं दे रहीं हैं। कोरोना महामारी का भय छोड़कर अपना फर्ज निभाने के उनके हौंसले को हर कोई सलाम कर रहा हैं। जूली ने बताया कि उसके दो पुत्रियां काव्या (08) व किशना एक साल की हैं। बच्चों की बजह से ड्यूटी में दिक्कत न आए इसलिए दोनों बच्चियों को ननिहाल हरदोई भेज दिया है। छोटी बच्ची बहुत याद करती है और रोती रहती है लेकिन वीडियो कॉल करके दिलाशा देती है और कुछ पल ऐसा लगता है वह सभी के पास हैं। 24 घंटे ड्यूटी लगी है। उसका कहना है कि जिसके लिए वह आए हैं वह काम पहले हैं। देश सेवा से बढ़कर कोई पुण्य नहीं हो सकता।