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दिल के मरीजों के लिए कोरोना संक्रमण चुनौतीपूर्ण
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महोबा। दिल के मरीजों के लिए कोरोना काल चुनौतीपूर्ण है। संक्रमण में दिल से दिल्लगी करना उनकी सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है। हृदयरोगियों को कोरोना संक्रमण का सबसे ज्यादा खतरा है। इसलिए इस रोग से पीड़ित रोगी हर महीने अपने ब्लड प्रेशर की जांच कराकर डॉक्टर से सलाह लें। नियमित दवा व व्यायाम इस रोग से बचाने में काफी हद तक सहायक हो सकता है। हर साल 28 सितंबर को विश्व हृदय दिवस मनाया जाता है।
जिला अस्पताल के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. केडी गुप्ता का कहना है कि 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। इस उम्र के हृदय रोगियों की संख्या ज्यादा है। डायबिटिक मरीजों को सावधानी की जरूरत है। कई मरीजों में संक्रमण से लोग तनाव में हैं। ऐसे में दिल के 90 प्रतिशत मरीज इसी तनाव से ग्रसित हैं। इससे ब्लड प्रेशर और ब्लड कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ जाता है। नियमित व्यायाम या योगा करें, यह तनावमुक्त रखने में सहायक है। उन्होंने बताया कि दिल के मरीज को अपने खाने-पीने का विशेष ध्यान रखना चाहिए। खाद्य पदार्थ तलने के बाद उस तेल को दोबारा इस्तेमाल न करें, क्योंकि इसमें ट्रांस फैट की मात्रा घातक स्तर तक बढ़ जाती है। डॉ. गुप्ता ने बताया कि दिल के मरीज अपनी दवाएं लगातार खाते रहें। समय-समय पर बीपी नपवाते रहें। बीपी घटने या बढ़ने पर तनाव न लें। परेशानी होने पर उनको या जिस डॉक्टर से इलाज ले रहे हों उससे फोन पर सलाह लें।
संतुलित और पोषक भोजन लेना जरूरी
डॉ. केडी गुप्ता का कहना है कि आपका कैलरी इनटेक आपकी शारीरिक सक्रियता और मेटाबॉलिज्म के अनुसार होना चाहिए। भोजन में फलों, सलाद, हरी सब्जियों, साबुत अनाज को प्रमुखता से शामिल करें। तेल और घी का सेवन बहुत कम करें। प्रतिदिन 30 ग्राम लहसुन खाएं, क्योंकि यह शरीर में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करता है और रक्त संचरण को ठीक करता है। मांसाहार, तली हुई चीजें, फास्ट फूड, वसा युक्त दूध, दुग्ध उत्पाद और चीनी का अधिक मात्रा में सेवन हृदय रोगों की आशंका बढ़ा देते हैं, इसलिए इनके सेवन में सावधानी बरतें। एल्कोहल और धूम्रपान से दूर रहें। नमक के ज्यादा सेवन से बचें।
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जिला अस्पताल के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. केडी गुप्ता का कहना है कि 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। इस उम्र के हृदय रोगियों की संख्या ज्यादा है। डायबिटिक मरीजों को सावधानी की जरूरत है। कई मरीजों में संक्रमण से लोग तनाव में हैं। ऐसे में दिल के 90 प्रतिशत मरीज इसी तनाव से ग्रसित हैं। इससे ब्लड प्रेशर और ब्लड कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ जाता है। नियमित व्यायाम या योगा करें, यह तनावमुक्त रखने में सहायक है। उन्होंने बताया कि दिल के मरीज को अपने खाने-पीने का विशेष ध्यान रखना चाहिए। खाद्य पदार्थ तलने के बाद उस तेल को दोबारा इस्तेमाल न करें, क्योंकि इसमें ट्रांस फैट की मात्रा घातक स्तर तक बढ़ जाती है। डॉ. गुप्ता ने बताया कि दिल के मरीज अपनी दवाएं लगातार खाते रहें। समय-समय पर बीपी नपवाते रहें। बीपी घटने या बढ़ने पर तनाव न लें। परेशानी होने पर उनको या जिस डॉक्टर से इलाज ले रहे हों उससे फोन पर सलाह लें।
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संतुलित और पोषक भोजन लेना जरूरी
डॉ. केडी गुप्ता का कहना है कि आपका कैलरी इनटेक आपकी शारीरिक सक्रियता और मेटाबॉलिज्म के अनुसार होना चाहिए। भोजन में फलों, सलाद, हरी सब्जियों, साबुत अनाज को प्रमुखता से शामिल करें। तेल और घी का सेवन बहुत कम करें। प्रतिदिन 30 ग्राम लहसुन खाएं, क्योंकि यह शरीर में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करता है और रक्त संचरण को ठीक करता है। मांसाहार, तली हुई चीजें, फास्ट फूड, वसा युक्त दूध, दुग्ध उत्पाद और चीनी का अधिक मात्रा में सेवन हृदय रोगों की आशंका बढ़ा देते हैं, इसलिए इनके सेवन में सावधानी बरतें। एल्कोहल और धूम्रपान से दूर रहें। नमक के ज्यादा सेवन से बचें।
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