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ठंड और गरीबी ने ले ली महिला की जान
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पनवाड़ी (महोबा)। थाना महोबकंठ के खैराकला गांव में ठंड और गरीबी ने एक महिला की जान ले ली। कई बार आवेदन के बाद भी आवास व राशन का लाभ न मिलने से झोपड़ी बनाकर परिवार का भरण पोषण कर रही महिला तीन दिन पहले ठंड की चपेट में आ गई। उपचार के अभाव में उसकी मौत हो गई। घटना से अपाहिज पति व तीन बच्चों का रो रोकर बुरा हाल है।
खैरोकलां गांव निवासी कृपाराम राजपूत मेहनत मजदूरी का काम करता था। दो वर्ष पहले सड़क दुर्घटना में उसके दोनों पैर टूट गए और अपाहिज होने पर घर में ही रहने लगा। तीन बच्चों शिवम (13), दीपू (10) व गायत्री (08) के भरण पोषण के लिए कृपाराम की पत्नी कंचन (40) गांव में लोगों के घरों में जाकर काम करके परिवार का गुजारा कर रही थी। दो दिन पहले वह ठंड की चपेट में आ गई। हालत बिगड़ने पर इलाज के लिए रुपयों की व्यवस्था नहीं हुई। कुछ ग्रामीणों ने मदद को हाथ बढ़ाए और उसका इलाज कराया लेकिन मंगलवार को उसकी मौत हो गई।
पति ने आरोप लगाया कि उसकी पत्नी ने आवास व राशनकार्ड के लिए कई बार आवेदन किए लेकिन कोई लाभ नहीं मिला। जिससे मजबूरी में झोपड़ी बना पॉलिथीन तानकर गुजारा कर रहे थे। गांव के डॉ. महेश ने बताया के महिला की माली हालत खराब थी। कुछ लोग मदद करते थे और बच्चों को कपड़े आदि मुहैया कराते थे। गांव के बाबा तिवारी ने बताया के इस भीषण ठंड में महिला के रहने को छत नहीं थी।
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उधर खंड विकास अधिकारी राहुल पांडे का कहना है कि वह अभी कुछ दिन पहले आए थे। उनका ट्रांसफर हो गया है। उन्हें मामले की जानकारी नहीं है। ग्राम प्रधान लल्लूराम चतुर्वेदी ने बताया कि उनका जब से कार्यकाल चालू हुआ है, तब से सूची में नाम नही है। इनका आवास आने पर बनवा दिया जाएगा।
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खैरोकलां गांव निवासी कृपाराम राजपूत मेहनत मजदूरी का काम करता था। दो वर्ष पहले सड़क दुर्घटना में उसके दोनों पैर टूट गए और अपाहिज होने पर घर में ही रहने लगा। तीन बच्चों शिवम (13), दीपू (10) व गायत्री (08) के भरण पोषण के लिए कृपाराम की पत्नी कंचन (40) गांव में लोगों के घरों में जाकर काम करके परिवार का गुजारा कर रही थी। दो दिन पहले वह ठंड की चपेट में आ गई। हालत बिगड़ने पर इलाज के लिए रुपयों की व्यवस्था नहीं हुई। कुछ ग्रामीणों ने मदद को हाथ बढ़ाए और उसका इलाज कराया लेकिन मंगलवार को उसकी मौत हो गई।
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पति ने आरोप लगाया कि उसकी पत्नी ने आवास व राशनकार्ड के लिए कई बार आवेदन किए लेकिन कोई लाभ नहीं मिला। जिससे मजबूरी में झोपड़ी बना पॉलिथीन तानकर गुजारा कर रहे थे। गांव के डॉ. महेश ने बताया के महिला की माली हालत खराब थी। कुछ लोग मदद करते थे और बच्चों को कपड़े आदि मुहैया कराते थे। गांव के बाबा तिवारी ने बताया के इस भीषण ठंड में महिला के रहने को छत नहीं थी।
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उधर खंड विकास अधिकारी राहुल पांडे का कहना है कि वह अभी कुछ दिन पहले आए थे। उनका ट्रांसफर हो गया है। उन्हें मामले की जानकारी नहीं है। ग्राम प्रधान लल्लूराम चतुर्वेदी ने बताया कि उनका जब से कार्यकाल चालू हुआ है, तब से सूची में नाम नही है। इनका आवास आने पर बनवा दिया जाएगा।