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महोबाः पलेवा के लिए सात दिन ही छोड़ा जाएगा पानी
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यूपी-एमपी के सीमा पर स्थित उर्मिल बांध में भरा पानी
- फोटो : MAHOBA
श्रीनगर (महोबा)। मानसून गुजरने को है लेकिन उर्मिल बांध पूरी भंडारण क्षमता के साथ नहीं भर सका। इससे 20 गांवों के किसानों को रबी फसल की पलेवा और सिंचाई के लिए पानी मिलना मुश्किल है। विभाग महज एक सप्ताह ही नहर में पानी छोड़ने की बात कह रहा है।
जिले के चंद्रावल, कबरई, अर्जुन, रतौली और मझगवां बांध में भरपूर पानी है लेकिन उर्मिल बांध अपनी क्षमता से चार मीटर खाली है। इस बांध से 60 फीसदी पानी मध्यप्रदेश व 40 फीसदी पानी उत्तर प्रदेश को मिलता है। उर्मिल बांध से ही शहर की दो लाख की आबादी को पेयजल आपूर्ति की जाती है। बांध की भंडारण क्षमता 236.58 मीटर है, लेकिन अभी तक महज 232.60 मीटर ही पानी आ सका है। ऐसे में किसानों को सिंचाई के लिए भरपूर नहीं मिल सकेगा।
किसान देवीदीन, हरीसिंह, रामनारायण का कहना है कि खरीफ फसल अतिवृष्टि से बर्बाद हो गई। अब रबी फसल से उम्मीद है। बांध न भरा होने से सिंचाई के लिए भरपूर पानी न मिलने से पैदावार बेहतर होने की उम्मीद कम हो गई है। सिंचाई विभाग के अवर अभियंता रोहित कुमार का कहना है कि बांध का पानी पेयजल के लिए संरक्षित किया जाएगा। बांध में पानी कम होने से किसानों की मांग के अनुसार एक सप्ताह के लिए महज नहर खोली जाएगी।
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जिले के चंद्रावल, कबरई, अर्जुन, रतौली और मझगवां बांध में भरपूर पानी है लेकिन उर्मिल बांध अपनी क्षमता से चार मीटर खाली है। इस बांध से 60 फीसदी पानी मध्यप्रदेश व 40 फीसदी पानी उत्तर प्रदेश को मिलता है। उर्मिल बांध से ही शहर की दो लाख की आबादी को पेयजल आपूर्ति की जाती है। बांध की भंडारण क्षमता 236.58 मीटर है, लेकिन अभी तक महज 232.60 मीटर ही पानी आ सका है। ऐसे में किसानों को सिंचाई के लिए भरपूर नहीं मिल सकेगा।
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किसान देवीदीन, हरीसिंह, रामनारायण का कहना है कि खरीफ फसल अतिवृष्टि से बर्बाद हो गई। अब रबी फसल से उम्मीद है। बांध न भरा होने से सिंचाई के लिए भरपूर पानी न मिलने से पैदावार बेहतर होने की उम्मीद कम हो गई है। सिंचाई विभाग के अवर अभियंता रोहित कुमार का कहना है कि बांध का पानी पेयजल के लिए संरक्षित किया जाएगा। बांध में पानी कम होने से किसानों की मांग के अनुसार एक सप्ताह के लिए महज नहर खोली जाएगी।
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