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जर्जर भवन के नीचे बैठने से डरते हैं बच्चे
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पनवाड़ी (महोबा)। परिषदीय स्कूलों से जर्जर भवन बच्चों के लिए मुसीबत बने हुए हैं। हालत यह है कि अभिभावक बच्चों को स्कूल भेजने से डरते हैं।
कंपोजिट विद्यालय ग्राम चारुआ का भवन सबसे जर्जर भवन है। प्रधानाचार्य चारूआ दिलीप कुमार पांडे का कहना है जान जोखिम में डालकर छात्र-छात्राओं के साथ पठन-पाठन करा रहे हैं। कंपोजिट स्कूल श्योडी का भी भवन जर्जर हो चुका है स्कूल के भवन में ताला लगा रहता है। पुराने हो चुके भवन में दरारे हैं, दरवाजे, खिड़की सब खराब हैं। श्योडी के प्रभारी प्रधानाचार्य देवकीनंदन ने बताया के पुराने भवन में किसी भी बच्चे को नही बैठाया जाता है। मजबूरी में खुले आसमान के नीचे या एकल कक्ष में बैठना पढ़ता है। खंड शिक्षा अधिकारी शैलेश त्रिपाठी ने बताया कि दोनों स्कूलों के भवन जर्जर हैं। भवनों की जांच कराई जा रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद नए भवन का निर्माण कराया जाएगा।
बच्चे कहते हैं कि डर लगता है
कक्षा चार की छात्रा खुशी का कहना है कि बहुत डर लगता है छत के ऊपर जब देखते है पढ़ाई पर मन न लगकर एक भय सा बना रहता है। शिवानी, मोहित और दुष्यंत का का कहना है कि मम्मी कहती हैं कि जर्जर भवन की तरफ मत जाना, पढ़ाई करते सीधे घर आना।
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कंपोजिट विद्यालय ग्राम चारुआ का भवन सबसे जर्जर भवन है। प्रधानाचार्य चारूआ दिलीप कुमार पांडे का कहना है जान जोखिम में डालकर छात्र-छात्राओं के साथ पठन-पाठन करा रहे हैं। कंपोजिट स्कूल श्योडी का भी भवन जर्जर हो चुका है स्कूल के भवन में ताला लगा रहता है। पुराने हो चुके भवन में दरारे हैं, दरवाजे, खिड़की सब खराब हैं। श्योडी के प्रभारी प्रधानाचार्य देवकीनंदन ने बताया के पुराने भवन में किसी भी बच्चे को नही बैठाया जाता है। मजबूरी में खुले आसमान के नीचे या एकल कक्ष में बैठना पढ़ता है। खंड शिक्षा अधिकारी शैलेश त्रिपाठी ने बताया कि दोनों स्कूलों के भवन जर्जर हैं। भवनों की जांच कराई जा रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद नए भवन का निर्माण कराया जाएगा।
बच्चे कहते हैं कि डर लगता है
कक्षा चार की छात्रा खुशी का कहना है कि बहुत डर लगता है छत के ऊपर जब देखते है पढ़ाई पर मन न लगकर एक भय सा बना रहता है। शिवानी, मोहित और दुष्यंत का का कहना है कि मम्मी कहती हैं कि जर्जर भवन की तरफ मत जाना, पढ़ाई करते सीधे घर आना।

प्राथमिक विद्यालय चारूआ में दीवारों पर पड़ी दरारें।- फोटो : MAHOBA
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