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Mahoba News: बीयू के पाठ्यक्रम में भी शामिल होंगी बुंदेली कहानी, निबंध, उपन्यास
Sun, 23 Feb 2025 11:25 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महोबा
संवाद न्यूज एजेंसी, महोबा
Updated Sun, 23 Feb 2025 11:25 PM IST
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महोबा। अब बुंदेलखंड विश्वविद्यालय की ओर से भी हिंदी के स्नातक व स्नातकोत्तर कक्षाओं के पाठ्यक्रम में बुंदेली भाषा से जुड़े पाठ्यक्रम को शामिल किया जाएगा। इसको लेकर कवायद शुरू कर दी गई है। बीयू के पाठ्यक्रम में बुंदेली कहानी, निबंध व उपन्यास को शामिल किया जाएगा। इन पाठ्यक्रमों को स्वीकृति के लिए बुंदेलखंड विश्वविद्यालय की ओर से बोर्ड ऑफ स्टडीज में रखा जाएगा।
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में पढ़ाई जा रही बुंदेली भाषा के पाठ्यक्रम का विस्तार किया जाएगा। विवि के हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. मुन्ना तिवारी की ओर से इसको लेकर तैयारी शुरू हो कर दी गई है। उन्होंने बताया कि स्नातक में बुंदेली महिमा और स्नातकोत्तर में समग्र बुंदेली भाषा पाठ्यक्रम पढ़ाया जाता है। दोनों ही पाठ्यक्रम में बुंदेली लोक गीत, बुंदेली लोक कथा, बुंदेली गाथा, बुंदेली नृत्य, बुंदेली नाट्य पढ़ाया जाता है। स्नातकोत्तर में लोक सुभाषिनी (लोकोक्तियां व मुहावरे) को अतिरिक्त रूप से जोड़ा गया है। उन्होंने बताया कि बुंदेली भाषा पाठ्यक्रम का विस्तार किया जा रहा है। इसमें बुंदेली उपन्यास, बुंदेली कहानी, बुंदेली निबंध, लघु गद्य विधाएं आदि शामिल की जा रही हैं। उधर, शहर के वीरभूमि राजकीय महाविद्यालय के सहायक प्राध्यापक प्रो. प्रदीप का कहना है कि बुंदेली भाषा के पाठ्यक्रम का विस्तार किया जाना सराहनीय कदम है।
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बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में पढ़ाई जा रही बुंदेली भाषा के पाठ्यक्रम का विस्तार किया जाएगा। विवि के हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. मुन्ना तिवारी की ओर से इसको लेकर तैयारी शुरू हो कर दी गई है। उन्होंने बताया कि स्नातक में बुंदेली महिमा और स्नातकोत्तर में समग्र बुंदेली भाषा पाठ्यक्रम पढ़ाया जाता है। दोनों ही पाठ्यक्रम में बुंदेली लोक गीत, बुंदेली लोक कथा, बुंदेली गाथा, बुंदेली नृत्य, बुंदेली नाट्य पढ़ाया जाता है। स्नातकोत्तर में लोक सुभाषिनी (लोकोक्तियां व मुहावरे) को अतिरिक्त रूप से जोड़ा गया है। उन्होंने बताया कि बुंदेली भाषा पाठ्यक्रम का विस्तार किया जा रहा है। इसमें बुंदेली उपन्यास, बुंदेली कहानी, बुंदेली निबंध, लघु गद्य विधाएं आदि शामिल की जा रही हैं। उधर, शहर के वीरभूमि राजकीय महाविद्यालय के सहायक प्राध्यापक प्रो. प्रदीप का कहना है कि बुंदेली भाषा के पाठ्यक्रम का विस्तार किया जाना सराहनीय कदम है।
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