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घर-घर जाकर पुष्टाहार के पैकेज बांट रही आंगनबाड़ी
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महोबा। कोरोना वायरस के खतरे को देखते हुए केंद्र व राज्य सरकार ने भीड़भाड़ वाले कार्यक्रम रद्द कर दिए हैं। इसी क्रम में 22 मार्च तक चल रहे पोषण पखवाड़े को भी स्थगित कर दिया गया है, लेकिन गर्भवती, किशोरी व बच्चों के स्वास्थ्य को देखते हुए महिला बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग द्वारा आंगनबाड़ी कार्यकत्री घर-घर जाकर पुष्टाहार के पैकेट बांटने के साथ कोरोना कोरोना वायरस के प्रति जागरूक भी कर रही हैं।
आठ मार्च को आरोग्य मेले से पोषण पखवाड़े की शुरुआत हुई थी। इसे 22 मार्च तक संचालित किया जाना था, लेकिन कोरोना वायरस के प्रकोप की वजह से केंद्र सरकार द्वारा इसे स्थागित कर दिया गया है। एहतियात के तौर पर 22 मार्च तक आंगनबाड़ी केंद्र भी बंद कर दिए गए हैं। जिला कार्यक्रम अधिकारी सुरेंद्र कुमार त्रिपाठी ने बताया कि गर्भवती, किशोरी व बच्चों की सेहत को देखते हुए आंगनबाड़ी कार्यकर्ता गांवों में घर-घर जाकर पुष्टाहार वितरित कर रही हैं। लोगों को संतुलित और ऊपरी आहार की जानकारी दे रही हैं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक को हाथ धोने की नियमित आदत के फायदे बताए जा रहे हैं।
शहरी क्षेत्र के नारूपुरा की रहने वाली सावित्री ने बताया कि उसके दो बच्चे हैं। पांच वर्षीय बेटी तनु और तीन साल का बेटा अंशु आंगनबाड़ी केंद्र जाते हैं। अभी केंद्र बंद हैं लेकिन केंद्र बंद होने के बाद भी उनके बच्चों को पोषण मिल रहा है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अनुराधा घर आकर उनके बच्चों को पुष्टाहार दे गई हैं। कुपोषण दूर करने के लिए सरकार व विभाग का यह प्रयास उन्हें बहुत अच्छा लगा है।
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आठ मार्च को आरोग्य मेले से पोषण पखवाड़े की शुरुआत हुई थी। इसे 22 मार्च तक संचालित किया जाना था, लेकिन कोरोना वायरस के प्रकोप की वजह से केंद्र सरकार द्वारा इसे स्थागित कर दिया गया है। एहतियात के तौर पर 22 मार्च तक आंगनबाड़ी केंद्र भी बंद कर दिए गए हैं। जिला कार्यक्रम अधिकारी सुरेंद्र कुमार त्रिपाठी ने बताया कि गर्भवती, किशोरी व बच्चों की सेहत को देखते हुए आंगनबाड़ी कार्यकर्ता गांवों में घर-घर जाकर पुष्टाहार वितरित कर रही हैं। लोगों को संतुलित और ऊपरी आहार की जानकारी दे रही हैं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक को हाथ धोने की नियमित आदत के फायदे बताए जा रहे हैं।
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शहरी क्षेत्र के नारूपुरा की रहने वाली सावित्री ने बताया कि उसके दो बच्चे हैं। पांच वर्षीय बेटी तनु और तीन साल का बेटा अंशु आंगनबाड़ी केंद्र जाते हैं। अभी केंद्र बंद हैं लेकिन केंद्र बंद होने के बाद भी उनके बच्चों को पोषण मिल रहा है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अनुराधा घर आकर उनके बच्चों को पुष्टाहार दे गई हैं। कुपोषण दूर करने के लिए सरकार व विभाग का यह प्रयास उन्हें बहुत अच्छा लगा है।
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