संविदा खत्म होने से ब्लड बैंक में लटका ताला

Mahoba Updated Tue, 08 May 2012 12:00 PM IST
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महोबा। जिला गठन होने के 17 साल बाद भी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को आज तक जिला अस्पताल का दर्जा नहीं मिला। उल्टा चार साल पहले यहां के बाशिंदाें के लिए खून की व्यवस्था के लिए खोला गया ब्लड बैंक भी कर्मचारियाें की कमी के चलते बंद हो गया। इससे अब लोगाें को खून देने और लेने के लिए दूसरे जिलाें के जिला अस्पतालाें में आना जाना पड़ रहा है।
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गौरतलब है कि जिले के बाशिंदाें को खून की व्यवस्था के लिए जिला अस्पताल में वर्ष 2008 में ब्लड बैंक खोला गया था। इसके चलते यहां पर लोगाें को ब्लड बैंक की सुविधा मिलने लगी थी। यहां पर पैथोलाजी चिकित्सक के अलावा अन्य संविदा कर्मचारियाें की विभाग द्वारा नियुक्ति की गई थी जिसके चलते यहां पर ब्लड बैंक का संचालन होने लगा। इतना ही नहीं आए दिन खून देने और लेने वाले भी आने लगे जिससे आपातकालीन स्थिति में खून मिलने से लोगाें की जान बच गई। ब्लड बैंक को संचालित करने के लिए सीएमएस डा. अर्जुन सिंह द्वारा कई कर्मचारियाें की संविदा पर नियुक्ति की गई जबकि ब्लड बैंक में मशीनें, फ्रिज व अन्य उपकरण पहले से ही उपलब्ध थे। इन कर्मचारियाें की नियुक्ति के बाद ब्लड बैंक पूरी तरह से व्यवस्थित हो गया। किसी भी समय जाने पर लोगाें का खून लिया जाने लगा। इस व्यवस्था से लोगाें ने राहत की सांस ली लेकिन पिछले कई महीनाें से संविदा पर कार्य कर रहे कर्मचारियाें को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया जिससे ब्लड बैंक में ताला लटक गया। जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्साधीक्षक श्री सिंह का कहना है कि ब्लड बैंक में लगे संविदा कर्मचारियाें का रिन्यूवल न होने के कारण ब्लड बैंक बंद हो गया। उन्हाेंने कहा कि कर्मचारियाें के रिन्यूवल के लिए लिखापढ़ी की गई है। रिन्यूवल होते ही पुन: ब्लड बैंक चालू कर दिया जाएगा।
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