{"_id":"44-184694","slug":"Mahoba-184694-44","type":"story","status":"publish","title_hn":"भूगर्भ जलस्तर गिरा, दो ब्लाक डार्क जोन घोषित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भूगर्भ जलस्तर गिरा, दो ब्लाक डार्क जोन घोषित
Mahoba
Updated Sat, 07 Jun 2014 05:32 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
महोबा। जिले में भूगर्भ जलस्तर तेजी से नीचे खिसक रहा है। वाटर रिचार्जिंग के बेहतर इंतजाम नहीं किये गये तो जिले का बड़ा हिस्सा रेगिस्तान बन सकता है। भूगर्भ जल सर्वेक्षण आयोग की टीम की सर्वे रिपोर्ट से इसका खुलासा हुआ है। इसके चलते डार्क जोन घोषित दो ब्लाकाें में हैंडपंपाें और बोर करने पर रोक लगा दी गई है। हैंडपंपाें के रखरखाव को मिलने वाली अधिकांश धनराशि कागजाें पर खर्च की जा रही है। प्रत्येक गांव में ज्यादातर हैंडपंप खराब पड़े हैं या ठूंठ बन गये हैं। जलस्तर के नीचे खिसकने से तमाम हैंडपंपाें ने जवाब दे दिया है। इसके चलते महकमे ने रीबोर कराना शुरू कर दिया है।
स्थिति यह है कि शासन स्तर से करोड़ाें रुपये खर्च होने के बावजूद ग्रामीणाें की प्यास नहीं बुझ रही है। जिले में 70.53 करोड़ रुपये की लागत से लगाए गये हैंडपंपाें में से तमाम ठूंठ बनकर रह गये हैं। इससे पेयजल मुहैया कराने की यूनिसेफ की महत्वाकांक्षी परियोजना को झटका लगा है। तेजी से घट रहे भूगर्भ जलस्तर के चलते जिले के चार ब्लाकाें में से पनवाड़ी और जैतपुर ब्लाक को डार्क जोन घोषित कर दिया गया है।
वर्ष 1986 में यूनिसेफ योजना के तहत गांव-गांव में हैंडपंप लगाए गये थे ताकि पानी मयस्सर हो सके। अब तक जिले में 13,308 हैंडपंप ग्रामीण अंचलाें में लगाए गये हैं। हैंडपंपाें की मरम्मत की जिम्मेदारी एक अप्रैल 2002 से ग्राम पंचायताें को साैंप दी गई थी, लेकिन ग्राम प्रधानाें द्वारा विशेष रुचि न लिये जाने से ज्यादातर हैंडपंप खराब पड़े हैं। वहीं तमाम हैंडपंप रीबोर की स्थिति में पहुंचने पर जल निगम ने ग्रामीण अंचलाें में 297 और यूपी एग्रो ने 37 हैंडपंप रीबोर कराए। वर्ष 2013-14 में जल निगम ने 262 और यूपी एग्रो ने 30 नये हैंडपंप लगाए। इसके अलावा नगरीय क्षेत्र में 96 हैंडपंपाें को रीबोर कराया गया है।
विज्ञापन
ब्लाकवार हैंडपंपाें की स्थिति
ब्लाक का नाम हैंडपंपाें की संख्या
कबरई 4,927
जैतपुर 2,749
पनवाड़ी 3,137
चरखारी 2,495
कुल 13,308
नगरीय क्षेत्र के हैंडपंपाें की स्थिति
नगर का नाम हैडपंपाें की संख्या
महोबा 1,271
चरखारी 364
कबरई 355
कुलपहाड़ 381
खरेला 331
कुल 2,702
शहर में कहां से कितना मिलता पानी- 24 नलकूपाें से दो एमएलडी पानी, मदन सागर से दो एमएलडी पानी
मदनऊ सदनऊ पाताल तोड़ कुआें से एक एमएलडी पानी, उर्मिल बांध से दस एमएलडी पानी
विज्ञापन
स्थिति यह है कि शासन स्तर से करोड़ाें रुपये खर्च होने के बावजूद ग्रामीणाें की प्यास नहीं बुझ रही है। जिले में 70.53 करोड़ रुपये की लागत से लगाए गये हैंडपंपाें में से तमाम ठूंठ बनकर रह गये हैं। इससे पेयजल मुहैया कराने की यूनिसेफ की महत्वाकांक्षी परियोजना को झटका लगा है। तेजी से घट रहे भूगर्भ जलस्तर के चलते जिले के चार ब्लाकाें में से पनवाड़ी और जैतपुर ब्लाक को डार्क जोन घोषित कर दिया गया है।
विज्ञापन
वर्ष 1986 में यूनिसेफ योजना के तहत गांव-गांव में हैंडपंप लगाए गये थे ताकि पानी मयस्सर हो सके। अब तक जिले में 13,308 हैंडपंप ग्रामीण अंचलाें में लगाए गये हैं। हैंडपंपाें की मरम्मत की जिम्मेदारी एक अप्रैल 2002 से ग्राम पंचायताें को साैंप दी गई थी, लेकिन ग्राम प्रधानाें द्वारा विशेष रुचि न लिये जाने से ज्यादातर हैंडपंप खराब पड़े हैं। वहीं तमाम हैंडपंप रीबोर की स्थिति में पहुंचने पर जल निगम ने ग्रामीण अंचलाें में 297 और यूपी एग्रो ने 37 हैंडपंप रीबोर कराए। वर्ष 2013-14 में जल निगम ने 262 और यूपी एग्रो ने 30 नये हैंडपंप लगाए। इसके अलावा नगरीय क्षेत्र में 96 हैंडपंपाें को रीबोर कराया गया है।
विज्ञापन
ब्लाकवार हैंडपंपाें की स्थिति
ब्लाक का नाम हैंडपंपाें की संख्या
कबरई 4,927
जैतपुर 2,749
पनवाड़ी 3,137
चरखारी 2,495
कुल 13,308
नगरीय क्षेत्र के हैंडपंपाें की स्थिति
नगर का नाम हैडपंपाें की संख्या
महोबा 1,271
चरखारी 364
कबरई 355
कुलपहाड़ 381
खरेला 331
कुल 2,702
शहर में कहां से कितना मिलता पानी- 24 नलकूपाें से दो एमएलडी पानी, मदन सागर से दो एमएलडी पानी
मदनऊ सदनऊ पाताल तोड़ कुआें से एक एमएलडी पानी, उर्मिल बांध से दस एमएलडी पानी