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वृद्ध की मौत के पर परिजनाें ने अस्पताल में काटा हंगामा
Mahoba
Updated Mon, 14 Oct 2013 05:40 AM IST
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महोबा। जिला अस्पताल में सांस की बीमारी से पीड़ित वृद्ध की मौत के बाद परिजनाें ने चिकित्सक पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा काटा।
थाना खरेला के गांव पुन्निया निवासी रामनारायण (75) सांस की बीमारी से पीड़ित था। शनिवार की रात अचानक उसकी तबीयत बिगड़ गई। परिजन उसे रात में तीन बजे जिला अस्पताल लेकर आए। जहां वृद्ध ने दम तोड़ दिया। अस्पताल में वृद्ध की मौत से नाराज परिजनाें की चिकित्सक से जमकर नोकझाेंक हुई। नाराज परिजनाें ने इमरजेंसी वार्ड में जमकर हंगामा काटा और जिला अस्पताल प्रशासन के विरुद्ध नारेबाजी कर कार्रवाई की मांग की।
मृतक के बेटे काशीप्रसाद का आरोप है कि वह अपने पिता को नाजुक हालत में रात तीन बजे जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में लेकर आया था। चिकित्सक को बुलाने के बावजूद वह अपने कमरे से बाहर नहीं आए, जिससे समय पर उपचार न मिलने के कारण उसके पिता की मौत हो गई। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक दयाशंकर वर्मा का कहना है कि न तो रात में जिला अस्पताल किसी वृद्ध को भर्ती कराया गया और न ही किसी वृद्ध की उपचार दौरान मौत हुई है।
तीन माह में तीन बार हो चुका अस्पताल में हंगामा
महोबा। जिला अस्पताल में रात में मरीजाें की समुचित देखरेख न करने पर अक्सर तीमारदाराें द्वारा हंगामा किया जाता है। तीन माह पहले चांदो निवासी रामदेव अपनी पत्नी को डायरिया की शिकायत होने पर जिला अस्पताल में लाया। लेकिन ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक ने उसका इलाज करने के बजाए चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी और फार्मासिस्ट से करा दिया। जिस पर रामदेव ने परिजनाें के साथ जमकर खरी खोटी सुनाई थीं। 15 दिन पहले रिवई निवासी मुन्ना की मरीज की समुचित देखभाल न करने पर उसका भी चिकित्सकाें से वाद विवाद हुआ था। 8 अक्तूबर को जिला अस्पताल में संविदा कर्मी अविष्ट कुमार द्वारा एक चिकित्सक के घर में पानी न आने पर चिकित्सक ने प्लंबर को थप्पड़ जड़ दिया था। जिससे अस्पताल में जमकर हो-हल्ला हुआ था। बाद में सीएमएस के हस्तक्षेप से मामला निपटाया गया था।
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थाना खरेला के गांव पुन्निया निवासी रामनारायण (75) सांस की बीमारी से पीड़ित था। शनिवार की रात अचानक उसकी तबीयत बिगड़ गई। परिजन उसे रात में तीन बजे जिला अस्पताल लेकर आए। जहां वृद्ध ने दम तोड़ दिया। अस्पताल में वृद्ध की मौत से नाराज परिजनाें की चिकित्सक से जमकर नोकझाेंक हुई। नाराज परिजनाें ने इमरजेंसी वार्ड में जमकर हंगामा काटा और जिला अस्पताल प्रशासन के विरुद्ध नारेबाजी कर कार्रवाई की मांग की।
मृतक के बेटे काशीप्रसाद का आरोप है कि वह अपने पिता को नाजुक हालत में रात तीन बजे जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में लेकर आया था। चिकित्सक को बुलाने के बावजूद वह अपने कमरे से बाहर नहीं आए, जिससे समय पर उपचार न मिलने के कारण उसके पिता की मौत हो गई। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक दयाशंकर वर्मा का कहना है कि न तो रात में जिला अस्पताल किसी वृद्ध को भर्ती कराया गया और न ही किसी वृद्ध की उपचार दौरान मौत हुई है।
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तीन माह में तीन बार हो चुका अस्पताल में हंगामा
महोबा। जिला अस्पताल में रात में मरीजाें की समुचित देखरेख न करने पर अक्सर तीमारदाराें द्वारा हंगामा किया जाता है। तीन माह पहले चांदो निवासी रामदेव अपनी पत्नी को डायरिया की शिकायत होने पर जिला अस्पताल में लाया। लेकिन ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक ने उसका इलाज करने के बजाए चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी और फार्मासिस्ट से करा दिया। जिस पर रामदेव ने परिजनाें के साथ जमकर खरी खोटी सुनाई थीं। 15 दिन पहले रिवई निवासी मुन्ना की मरीज की समुचित देखभाल न करने पर उसका भी चिकित्सकाें से वाद विवाद हुआ था। 8 अक्तूबर को जिला अस्पताल में संविदा कर्मी अविष्ट कुमार द्वारा एक चिकित्सक के घर में पानी न आने पर चिकित्सक ने प्लंबर को थप्पड़ जड़ दिया था। जिससे अस्पताल में जमकर हो-हल्ला हुआ था। बाद में सीएमएस के हस्तक्षेप से मामला निपटाया गया था।
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