{"_id":"44-119536","slug":"Mahoba-119536-44","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्रवासी परिंदों का धड़ल्ले से हो रहा शिकार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्रवासी परिंदों का धड़ल्ले से हो रहा शिकार
Mahoba
Updated Wed, 13 Feb 2013 05:31 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
झीलाें, सरोवराें में डेरा जमाए पक्षियाें की आई शामत
शिकारी डेढ़ से दो हजार की प्रतिदिन कर रहे कमाई
महोबा। सात समंदर पार से आए परदेसी परिंदाें का जिले में जमकर शिकार हो रहा है। वन विभाग के अधिकारी पक्षियाें के शिकार पर रोक लगाने में नाकाम साबित हो रहे हैं। शिकारी झीलाें में खुलेआम शिकार करके अच्छी कमाई कर रहे हैं।
बुंदेलखंड के विख्यात विजय सागर पक्षी विहार व बेला सागर में इन दिनाें प्रवासी पक्षियाें का जमावड़ा है। आसपास का इलाका मेहमान पक्षियाें के कलरव से गूंज रहा है। साइबेरिया, चीन, तिब्बत और मध्य यूरोप से आए इन रंग-बिरंगे पक्षियाें को देखने के लिए झीलाें में देशी और विदेशी पर्यटकों का हर रोज जमावड़ा लगता है। इन पक्षियों में प्रमुख रूप से बाबलिक, आर्कटिक, महाबक गबर, सुनहरी बटान, लाल सर, काला सर, टिहरी जाति के पक्षी शामिल हैं। लाल सर और काला सर पक्षी तो आठ हजार किलोमीटर की दूरी तय कर यहां आते हैं। गोल्डन फ्लॉवर नामक खूबसूरत छोटी चिड़िया भी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहती है।
प्रवासी पक्षियाें के झीलाें और सरोवराें में डेरा जमाने के बाद से शिकारियाें की चांदी कट रही है। शिकारी सबसे ज्यादा सुनहरी बटान और लाल सर चिड़िया का शिकार कर रहे हैं। वजह लाल सर की कीमत इन दिनाें 300 रुपए है, जबकि सुनहरी बटान 250 रुपए में बिक रही है। शिकारी दिन में प्रवासी पक्षियाें को बेचकर डेढ़ से दो हजार रुपए कमा रहे हैं। यही वजह है कि तड़के सुबह चार बजे से ही झीलाें में शिकारियाें की भीड़ जुटना शुरू हो जाती है। वन क्षेत्राधिकारी सुभाष सिन्हा का कहना है कि विजय सागर पक्षी विहार में वन विभाग के कर्मचारियाें को तैनात कर दिया गया है। यहां शिकार पर पूरी तरह से पाबंदी लगी हुई है। अन्य झीलाें में भी शिकार पर रोक लगाई गई है।
शिकारी डेढ़ से दो हजार की प्रतिदिन कर रहे कमाई
महोबा। सात समंदर पार से आए परदेसी परिंदाें का जिले में जमकर शिकार हो रहा है। वन विभाग के अधिकारी पक्षियाें के शिकार पर रोक लगाने में नाकाम साबित हो रहे हैं। शिकारी झीलाें में खुलेआम शिकार करके अच्छी कमाई कर रहे हैं।
बुंदेलखंड के विख्यात विजय सागर पक्षी विहार व बेला सागर में इन दिनाें प्रवासी पक्षियाें का जमावड़ा है। आसपास का इलाका मेहमान पक्षियाें के कलरव से गूंज रहा है। साइबेरिया, चीन, तिब्बत और मध्य यूरोप से आए इन रंग-बिरंगे पक्षियाें को देखने के लिए झीलाें में देशी और विदेशी पर्यटकों का हर रोज जमावड़ा लगता है। इन पक्षियों में प्रमुख रूप से बाबलिक, आर्कटिक, महाबक गबर, सुनहरी बटान, लाल सर, काला सर, टिहरी जाति के पक्षी शामिल हैं। लाल सर और काला सर पक्षी तो आठ हजार किलोमीटर की दूरी तय कर यहां आते हैं। गोल्डन फ्लॉवर नामक खूबसूरत छोटी चिड़िया भी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहती है।
विज्ञापन
प्रवासी पक्षियाें के झीलाें और सरोवराें में डेरा जमाने के बाद से शिकारियाें की चांदी कट रही है। शिकारी सबसे ज्यादा सुनहरी बटान और लाल सर चिड़िया का शिकार कर रहे हैं। वजह लाल सर की कीमत इन दिनाें 300 रुपए है, जबकि सुनहरी बटान 250 रुपए में बिक रही है। शिकारी दिन में प्रवासी पक्षियाें को बेचकर डेढ़ से दो हजार रुपए कमा रहे हैं। यही वजह है कि तड़के सुबह चार बजे से ही झीलाें में शिकारियाें की भीड़ जुटना शुरू हो जाती है। वन क्षेत्राधिकारी सुभाष सिन्हा का कहना है कि विजय सागर पक्षी विहार में वन विभाग के कर्मचारियाें को तैनात कर दिया गया है। यहां शिकार पर पूरी तरह से पाबंदी लगी हुई है। अन्य झीलाें में भी शिकार पर रोक लगाई गई है।
विज्ञापन