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रामचरित मानस विश्व का अद्वितीय ग्रंथ-पं. जगप्रसाद
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परिवार को संस्कारवान बनाने के लिए पढ़ें रामचरित मानस
महोबा। विकासखंड कबरई के ग्राम सिजवाहा में चल रहे तीन दिवसीय मानस सम्मेलन के अंतिम दिन प्रवचनकर्ता पं. जगप्रसाद तिवारी ने कहा कि यदि अपने घर का वातावरण संस्कारवान बनाना है तो हमें अपने परिवार में रामचरित मानस का पाठ करना चाहिए।
मानस सम्मेलन में आचार्य ने कहा कि रामचरित मानस में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के आदर्श को पढ़कर हमें उनके चरित्र को अपने जीवन में उतारना चाहिए। उन्होंने कहा कि रामचरित मानस विश्व का अद्वितीय ग्रंथ है। भाई-भाई का प्रेम यदि देखना है तो राम और भरत का चरित्र पढ़ना होगा। इतने बड़े राज्य को छोड़कर पिता और माता की आज्ञा से चौदह वर्ष का वनवास श्रीराम ने सहर्ष स्वीकार किया। जगत जननी मां सीता ने भी 14 वर्ष वन में रहकर पति सेवा करके आज की नारियों को बहुत बड़ी शिक्षा दी है। इस दौरान मानस वक्ता राजेंद्र त्रिपाठी व अनीता भारती ने भी रामचरित मानस के विभिन्न प्रसंगों की व्याख्या की। इस मौके पर साहित्यकार संतोष कुमार पटैरिया, श्यामलाल पाल, मातादीन राजपूत आदि मौजूद रहे। ब्यूरो
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महोबा। विकासखंड कबरई के ग्राम सिजवाहा में चल रहे तीन दिवसीय मानस सम्मेलन के अंतिम दिन प्रवचनकर्ता पं. जगप्रसाद तिवारी ने कहा कि यदि अपने घर का वातावरण संस्कारवान बनाना है तो हमें अपने परिवार में रामचरित मानस का पाठ करना चाहिए।
मानस सम्मेलन में आचार्य ने कहा कि रामचरित मानस में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के आदर्श को पढ़कर हमें उनके चरित्र को अपने जीवन में उतारना चाहिए। उन्होंने कहा कि रामचरित मानस विश्व का अद्वितीय ग्रंथ है। भाई-भाई का प्रेम यदि देखना है तो राम और भरत का चरित्र पढ़ना होगा। इतने बड़े राज्य को छोड़कर पिता और माता की आज्ञा से चौदह वर्ष का वनवास श्रीराम ने सहर्ष स्वीकार किया। जगत जननी मां सीता ने भी 14 वर्ष वन में रहकर पति सेवा करके आज की नारियों को बहुत बड़ी शिक्षा दी है। इस दौरान मानस वक्ता राजेंद्र त्रिपाठी व अनीता भारती ने भी रामचरित मानस के विभिन्न प्रसंगों की व्याख्या की। इस मौके पर साहित्यकार संतोष कुमार पटैरिया, श्यामलाल पाल, मातादीन राजपूत आदि मौजूद रहे। ब्यूरो
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