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25 फीसदी आवेदकों का घर बनाने का सपना टूटा
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25 फीसदी आवेदकों का घर बनाने का सपना टूटा
- दूसरी किस्त न आने से खुले आसमान के नीचे पन्नी के सहारे गुजार रहे वक्त
अमर उजाला ब्यूरो
महोबा। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनाए जा रहे आवासों की तीन माह बाद भी दूसरी किस्त न आने और कई आवेदकों की आईडी डिलीट हो जाने से खातों में पैसा नहीं पहुंच जा रहा है। जिससे 25 फीसदी आवेदकों का घर बनाने का सपना टूट गया है। तमाम पात्रों का सूची से नाम ही नदारद हो गया जबकि कई पक्के मकान वालों के लेखपालों की साठगांठ के चलते धनराशि खाते में पहुंच गई।
जिले में 5,573 आवेदकों ने आवेदन किया था। जिसमें से 1,353 आवेदकों के आवेदन निरस्त कर दिए गए। 300 से ज्यादा आवेदकों की आईडी डिलीट हो गई। जिससे पहली किस्त आने के बाद अब दूसरी किस्त पाने के लिए आवेदक डूडा कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। तीन माह बाद भी दूसरी किस्त न आने से पन्नी तानकर खुले आसमान के नीचे दिन-रात गुजार रहे हैं।
पहली किस्त आने पर कच्चा मकान गिराकर निर्माण शुरू करा दिया। दूसरी किस्त की आस में कुछ सीमेंट, बालू, ईंट विक्रेताओं से उधार ले लिया। अब दुकानदार भी आवेदकों के घर पर पैसे के लिए तगादा कर रहे हैं।
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कोट
लेखपालों द्वारा सर्वे रिपोर्ट न आने के कारण कार्य योजना बनाकर शासन को नहीं भेजी गई। साथ ही कुछ लाभार्थियों की आईडी लखनऊ स्तर से डिलीट हो गई है। जिससे उनकी दूसरी किस्त नहीं आ पा रही है। इसके लिए लिखापढ़ी की गई है।
अबरार अहमद
एपीओ (डूडा विभाग, महोबा)
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- दूसरी किस्त न आने से खुले आसमान के नीचे पन्नी के सहारे गुजार रहे वक्त
अमर उजाला ब्यूरो
महोबा। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनाए जा रहे आवासों की तीन माह बाद भी दूसरी किस्त न आने और कई आवेदकों की आईडी डिलीट हो जाने से खातों में पैसा नहीं पहुंच जा रहा है। जिससे 25 फीसदी आवेदकों का घर बनाने का सपना टूट गया है। तमाम पात्रों का सूची से नाम ही नदारद हो गया जबकि कई पक्के मकान वालों के लेखपालों की साठगांठ के चलते धनराशि खाते में पहुंच गई।
जिले में 5,573 आवेदकों ने आवेदन किया था। जिसमें से 1,353 आवेदकों के आवेदन निरस्त कर दिए गए। 300 से ज्यादा आवेदकों की आईडी डिलीट हो गई। जिससे पहली किस्त आने के बाद अब दूसरी किस्त पाने के लिए आवेदक डूडा कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। तीन माह बाद भी दूसरी किस्त न आने से पन्नी तानकर खुले आसमान के नीचे दिन-रात गुजार रहे हैं।
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पहली किस्त आने पर कच्चा मकान गिराकर निर्माण शुरू करा दिया। दूसरी किस्त की आस में कुछ सीमेंट, बालू, ईंट विक्रेताओं से उधार ले लिया। अब दुकानदार भी आवेदकों के घर पर पैसे के लिए तगादा कर रहे हैं।
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लेखपालों द्वारा सर्वे रिपोर्ट न आने के कारण कार्य योजना बनाकर शासन को नहीं भेजी गई। साथ ही कुछ लाभार्थियों की आईडी लखनऊ स्तर से डिलीट हो गई है। जिससे उनकी दूसरी किस्त नहीं आ पा रही है। इसके लिए लिखापढ़ी की गई है।
अबरार अहमद
एपीओ (डूडा विभाग, महोबा)