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छह माह पहले 26 करोड़ स्वीकृत, पर नहीं मिला बजट
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कबरई (महोबा)। कस्बा कबरई के सर्वाधिक ऊंचाई वाले वार्डों में पानी न पहुंचने की एक दशक से चली आ रही मांग को शासन ने हरीझंडी तो दे दी लेकिन आज तक बजट नहीं दिया, जिससे टंकी निर्माण का काम नहीं हो पा रहा है। ऐसे में गर्मी के मौसम में पेयजल को लेकर मारामारी मचेगी। पेयजल समस्या से परेशान लोगों ने लोकसभा चुनाव बहिष्कार की चेतावनी दी है।
कस्बा कबरई में 15 वार्डों के लिए वर्ष 1993 में कबरई पेयजल योजना शुरू की गई थी। 26 साल में आबादी बढ़ने से जलापूर्ति नहीं हो पा रही है, जिससे लोग परेशान है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में जलापूर्ति के लिए दो दशक से संघर्ष कर रहे व्यापारी नेता प्रीतम प्रसाद निगम ने बताया कि कस्बे के राजेंद्र नगर, लक्ष्मीबाई नगर, किदवई नगर, भगतसिंह नगर आदि सर्वाधिक ऊंचाई वाले क्षेत्र हैं। पहाड़ी इलाका होने के चलते यहां बोरिंग सफल नहीं है। पाइप लाइन ही जलापूर्ति का एकमात्र सहारा है, लेकिन निरंतर आबादी बढ़ने से जलापूर्ति गड़बड़ा गई। दो दशक से कस्बावासियों के साथ संघर्ष कर रहे प्रीतम प्रसाद की मेहनत रंग लाई। शासन ने कस्बावासियों की मांग पर 26 करोड़ की कबरई पेयजल पुनर्गठन योजना को मंजूरी दे दी।
पेयजल योजना स्वीकृत को छह माह से अधिक का समय गुजर जाने के बाद भी शासन ने बजट नहीं दिया, जिससे नई पेयजल योजना के तहत पंप हॉउस, कलशहा बाबा पहाड़ी पर टंकी, राइजिंग में लाइन, डिस्टिव्यूशन लाइन सहित फिल्टर प्लांट, ईंटेकवेल आदि का काम शुरू नही हो सका। टंकी निर्माण का काम शुरू नहीं हो सका। सोमवार को गहोई धर्मशाला में व्यापारी कमलेश जैन की अध्यक्षता में बैठक हुई, जिसमें सर्व सम्मति से ऊंचाई वाले वार्ड के नागरिकों ने निर्णय लिया कि पानी नहीं तो वोट नहीं। सब मिलकर चुनाव का बहिष्कार करेंगे। उधर जल निगम सिविल शाखा के सहायक अभियंता संदेश तोमर का कहना है कि फिर से स्वीकृत बजट के सापेक्ष डिमांड भेजी गई है। पैसा आते ही काम शुरू कराया जाएगा।
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छह माह पहले 26 करोड़ स्वीकृत, पर नहीं मिला बजट
- टंकी का निर्माण न होने से पेयजल को लेकर मचेगी मारामारी
कस्बा कबरई में 15 वार्डों के लिए वर्ष 1993 में कबरई पेयजल योजना शुरू की गई थी। 26 साल में आबादी बढ़ने से जलापूर्ति नहीं हो पा रही है, जिससे लोग परेशान है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में जलापूर्ति के लिए दो दशक से संघर्ष कर रहे व्यापारी नेता प्रीतम प्रसाद निगम ने बताया कि कस्बे के राजेंद्र नगर, लक्ष्मीबाई नगर, किदवई नगर, भगतसिंह नगर आदि सर्वाधिक ऊंचाई वाले क्षेत्र हैं। पहाड़ी इलाका होने के चलते यहां बोरिंग सफल नहीं है। पाइप लाइन ही जलापूर्ति का एकमात्र सहारा है, लेकिन निरंतर आबादी बढ़ने से जलापूर्ति गड़बड़ा गई। दो दशक से कस्बावासियों के साथ संघर्ष कर रहे प्रीतम प्रसाद की मेहनत रंग लाई। शासन ने कस्बावासियों की मांग पर 26 करोड़ की कबरई पेयजल पुनर्गठन योजना को मंजूरी दे दी।
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पेयजल योजना स्वीकृत को छह माह से अधिक का समय गुजर जाने के बाद भी शासन ने बजट नहीं दिया, जिससे नई पेयजल योजना के तहत पंप हॉउस, कलशहा बाबा पहाड़ी पर टंकी, राइजिंग में लाइन, डिस्टिव्यूशन लाइन सहित फिल्टर प्लांट, ईंटेकवेल आदि का काम शुरू नही हो सका। टंकी निर्माण का काम शुरू नहीं हो सका। सोमवार को गहोई धर्मशाला में व्यापारी कमलेश जैन की अध्यक्षता में बैठक हुई, जिसमें सर्व सम्मति से ऊंचाई वाले वार्ड के नागरिकों ने निर्णय लिया कि पानी नहीं तो वोट नहीं। सब मिलकर चुनाव का बहिष्कार करेंगे। उधर जल निगम सिविल शाखा के सहायक अभियंता संदेश तोमर का कहना है कि फिर से स्वीकृत बजट के सापेक्ष डिमांड भेजी गई है। पैसा आते ही काम शुरू कराया जाएगा।
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छह माह पहले 26 करोड़ स्वीकृत, पर नहीं मिला बजट
- टंकी का निर्माण न होने से पेयजल को लेकर मचेगी मारामारी