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Maharajganj News: मरने के बाद ढूंढते होंगे अपनी पहचान, आखिर कौन करेगा पिंडदान

Tue, 03 Oct 2023 11:28 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 03 Oct 2023 11:28 PM IST
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You will be searching for your identity after death, after all who will perform Pind Daan?
-जिले में 2021 से अब तक 111 अज्ञात शव मिल चुके, कोई नहीं है इनका तर्पण करने वाला
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संवाद न्यूज एजेंसी

महराजगंज। कहते हैं कि किसी मृतक का रीति-रिवाज के अनुसार कर्मकांड और पिंडदान न किया जाए तो उसकी आत्मा को शांति नहीं मिलती। इसी मान्यता के चलते पितृ पक्ष में हर व्यक्ति अपने घर में मृतक परिजनों का श्राद्ध और तर्पण करता है, लेकिन हमारे अपने ही शहर में हर साल ऐसे कई लोग मिल चुके हैं, जिन्हें मरने के बाद कोई पहचान नहीं मिली। जानकर हैरत होगी, लेकिन तीन सालों में 111 लोगों की मरने के बाद अब तक पहचान नहीं हुई है। ये आज भी अपनी पहचान के लिए मोहताज हैं।

पुलिस के रिकार्ड में हर साल ऐसे लोग अज्ञात में दर्ज किए जाते हैं। इन्हें लावारिस मानकर पुलिस इनका अंतिम संस्कार तो किसी तरह कर देती है, लेकिन इनका कर्मकांड, तर्पण और पिंडदान करने वाला कोई नहीं। शहर में ही वर्ष 2021 से अब तक 11 से अधिक अज्ञात शव मिल चुके हैं। पुलिस के रिकार्ड के अनुसार हर साल सड़क दुर्घटना, ट्रेन, बस या नदी-नालों के किनारे व कुंओं, तालाबों में ऐसे कई शव मिलते हैं, जिनकी लाख कोशिश के बाद भी शिनाख्त नहीं हो पाई है। इनमें महिलाओं की संख्या भी अच्छी खासी है। जिन अज्ञातों का अंतिम संस्कार पुलिस कर देती है, उनका श्राद्ध कर्म करने की पहल के लिए संस्थाएं भी आगे नहीं आ रहीं।
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पिंडदान और तर्पण व श्राद्ध होना जरूरी

पंडित दिवाकरण मणि त्रिपाठी का कहना है मर चुके किसी भी व्यक्ति का अंतिम संस्कार हो चुका है, तो उसका पिंडदान और तर्पण व श्राद्ध होना जरूरी है। कोई भी व्यक्ति किसी भी अज्ञात का पिंडदान कर दे, यह पूरी तरह से सही नहीं माना गया है, क्योंकि तर्पण के लिए मरने वाले का नाम, जन्म स्थान, शहर, कुल, परिवार, मृत्यु की तिथि या अंतिम संस्कार की तिथि आदि में से कम से कम किसी एक पहचान का होना जरूरी होता है। इसी पहचान से उसका आह्वान कर पिंडदान व तर्पण किया जाता है।


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अज्ञात शवों के कर्मकांड के लिए भी कोई व्यवस्था होनी चाहिए, साल में कई ऐसे शव मिलते हैं, जिनकी पहचान नहीं हो पाती है। अपने शहर में हर साल कई अज्ञात शव मिलते हैं, पुलिस उनका अंतिम संस्कार तो कर देती है, लेकिन पिंडदान के लिए भी पहल जरूरी है।

-विजय पांडेय, एमडी सिटी अस्पताल

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सामूहिक तर्पण और पिंडदान के लिए संस्थाओं को आगे आना चाहिए, किसी अज्ञात का तर्पण करना भी एक पुण्य का काम है। जिन लोगों की पहचान नहीं हो पाती है, वो अज्ञात में दर्ज हो जाते हैं। पुलिस प्रशासन को हर हाल में उनकी पहचान खोजनी चाहिए।
-आत्माराम गुप्ता, व्यवसायी
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