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पति की लंबी उम्र की कामना की
महराजगंज/ ब्यूरो
Updated Mon, 05 Sep 2016 12:46 AM IST
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निराजल व्रत
- फोटो : अमर उजाला
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रविवार को हरतालिका तीज पर निराजल व्रत रखकर महिलाओं ने पति के लम्बी उम्र की कामना की। सुबह से बिना जल ग्रहण किए व्रती महिलाओं ने सायं छह बजे शंकर-पार्वती की बालू का मूर्ति बनाकर उस पर सिन्दूर, दही, पान के पत्ते, अगरबत्ती, कपूर चढ़ाकर विधि-विधान से पूजन अर्चन कर पति के लम्बी उम्र की मंगत मांगी। शाम होते ही नगर के मंदिरों पर व्रती महिलाओं का तांता लगा रहा।
मान्यता है कि इस व्रत को करने वाली स्त्रियां पार्वती के समान सुखपूर्वक पतिरमण करके शिवलोक को जाती हैं। कथा के अनुसार एक बार पर्वती हिमालय पर्वत पर जाकर गंगा किनारे शिव को पतिरूप में पाने के लिए कठिन तपस्या प्रारंभ की थी। घोर तपस्या के समय नारद जी हिमालय के पास गए तथा कहा कि विष्णु भगवान आपकी कन्या के साथ विवाह करना चाहते हैं।
इस कार्य के लिए मुझे भेजा है। नारद की बनावटी बात को तुम्हारे पिता ने स्वीकार कर लिया। तत्पश्चात नारद जी विष्णु के पास गए और कहा कि आप का विवाह हिमालय ने पार्वती के साथ करने का निश्चय कर लिया हैं आप इसकी स्वीकृति दे। नारद जी के जाने के पश्चात पिता हिमालय ने तुम्हें भगवान विष्णु के साथ निश्चित किया गया। यह बात सुन पर्वती को दु:ख हुआ।
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पार्वती ने भाद्रपद शुक्ल पक्ष तृतीय को उपवास रखकर शिवलिंग स्थापित कर के पूजा की। कठिन तपस्या व व्रत के वजह से शिव के आशन को हिला दिया। शिव तुरंत पूजा स्थल पर पहुंचे। पार्वती के मांग तथा इच्छा के अनुसार अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया। तभी से हरलालिका तीज व्रत रखने का परंपरा शुरू हो गया। ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं ने भी हरलालिका व्रत रख कर विधि-विधान से पूजन अर्चन करने के बाद पति के लम्बी उम्र की मन्नते मांगी।
मान्यता है कि इस व्रत को करने वाली स्त्रियां पार्वती के समान सुखपूर्वक पतिरमण करके शिवलोक को जाती हैं। कथा के अनुसार एक बार पर्वती हिमालय पर्वत पर जाकर गंगा किनारे शिव को पतिरूप में पाने के लिए कठिन तपस्या प्रारंभ की थी। घोर तपस्या के समय नारद जी हिमालय के पास गए तथा कहा कि विष्णु भगवान आपकी कन्या के साथ विवाह करना चाहते हैं।
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इस कार्य के लिए मुझे भेजा है। नारद की बनावटी बात को तुम्हारे पिता ने स्वीकार कर लिया। तत्पश्चात नारद जी विष्णु के पास गए और कहा कि आप का विवाह हिमालय ने पार्वती के साथ करने का निश्चय कर लिया हैं आप इसकी स्वीकृति दे। नारद जी के जाने के पश्चात पिता हिमालय ने तुम्हें भगवान विष्णु के साथ निश्चित किया गया। यह बात सुन पर्वती को दु:ख हुआ।
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पार्वती ने भाद्रपद शुक्ल पक्ष तृतीय को उपवास रखकर शिवलिंग स्थापित कर के पूजा की। कठिन तपस्या व व्रत के वजह से शिव के आशन को हिला दिया। शिव तुरंत पूजा स्थल पर पहुंचे। पार्वती के मांग तथा इच्छा के अनुसार अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया। तभी से हरलालिका तीज व्रत रखने का परंपरा शुरू हो गया। ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं ने भी हरलालिका व्रत रख कर विधि-विधान से पूजन अर्चन करने के बाद पति के लम्बी उम्र की मन्नते मांगी।