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Maharajganj News: वक्फ की मिल्कियत अपने नाम कराकर हो गई बिक्री

Sun, 06 Apr 2025 12:12 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज Updated Sun, 06 Apr 2025 12:12 AM IST
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Waqf property was sold by getting it registered in one's name
महराजगंज। सदर तहसील के मुड़िला में वक्फ की पांच एकड़ नहीं बल्कि 300 एकड़ भूमि थी, जिसका रिकाॅर्ड अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अभिलेखों में वक्फ की जमीन के तौर पर दर्ज है। लेकिन मुतवल्ली रहे लोगों ने इसे अपने और परिवार के नाम से दर्ज करा लिया। इसमें से काफी जमीन बिक चुकी है, जिसपर पक्के निर्माण हो चुके हैं। फर्जी आदेश के सहारे भूमि अपने नाम चढ़वाने का मामला अल्पसंख्यक आयोग गया, जहां से जिला प्रशासन को केस दर्ज कराने के निर्देश भी मिले, लेकिन वक्फ की जमीन से दूर रहने में ही प्रशासन ने सीमित अधिकार के कारण दूर रहना मुनासिब समझा।
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अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के रिकार्ड में उल्लेखित है कि मुड़िला में जुम्मन अंसारी ने 300 एकड़ भूमि वक्फ के नाम दान दी। उस समय वक्फ के स्थानीय संरक्षक हुसैनी थे। उनके बाद की जिम्मेदारी उनके पुत्र खलील को मिली। खलील तक वक्फ की संपत्ति पर किसी तरह का अतिक्रमण या कब्जा नहीं था, वक्फ का ही दखल था। 1988 के बाद वक्फ की भूमि जिस संरक्षक के पास आई उसने 1985 में फर्जी आदेश के सहारे पूरी जमीन अपने और परिवार के नाम करा ली। अब सिर्फ 4.9 एकड़ भूमि ही शेष रही। वक्फ की जमीन से बदलते स्वामित्व की जानकारी अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के साथ जिला प्रशासन को भी उसी समय हो गई, लेकिन वक्फ पर सीमित अधिकारियों के कारण प्रशासन या विभाग कुछ भी नहीं कर सका। शिकायत सुन्नी वक्फ बोर्ड तक गई तो प्रशासन की तरफ से जांच भी हुई। 2022 में आयोग ने फर्जीवाड़ा करने वालों के खिलाफ केस दर्ज कराने के निर्देश भी दिए, लेकिन प्रशासन ने अपने सीमित अधिकार होने के चलते मामले से दूर ही रहा। मामले में आज तक मुतवल्ली पर धोखाधड़ी से जमीन अपने नाम कराने का केस नहीं दर्ज हो सका।
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एसडीएम ने दी थी रिपोर्ट-
मुतवल्ली की धोखाधड़ी की शिकायत स्थानीय अधिवक्ता अमीन अंसारी ने जिला प्रशासन से लेकर आयोग तक की। आयोग के निर्देश पर शिकायत की जांच तत्कालीन एसडीएम तेजा राम ने की। अपनी रिपोर्ट में उन्होंने मुतवल्ली की कारस्तानी अपनी रिपोर्ट में उजागर की बावजूद रिपोर्ट ठंडे बस्ते में ही रह गई।
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25 से अधिक लोगों ने खरीदी वक्फ की जमीन
वक्फ की संपत्ति की मिल्कियत में परिवर्तन के बाद लगभग 25 से अधिक लोगों ने जमीन खरीद कर पक्का निर्माण भी करा लिया है। इसी में एक खरीदार अमरजीत यादव भी हैं। इन्होंने एक वर्ष पूर्व डीएम, एसपी व विभाग को पत्र देकर कहा कि खुद को मुतवल्ली बताकर उन्हें जमीन देने की बात कहकर पांच लाख रुपये से अधिक ले लिए, लेकिन जमीन का रेट अधिक मिलने पर मुतवल्ली ने जमीन उनके नाम नहीं की। इस मामले में भी कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है। अमरजीत कहते हैं कि लोगों ने वक्फ की जमीन खरीद तो ली है, लेकिन उन्हें यह डर हमेशा रहता है कि कभी न कभी वह बेदखल हो सकते हैं। वक्फ विधेयक की चर्चा के बाद उनमें खलबली है।

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विभागीय अभिलेख बताते हैं कि 300 एकड़ जमीन वक्फ को जुम्मन अंसारी ने दी। वर्षों तक यह मुतवल्ली रहे लोगों के संरक्षण में सुरक्षित रही, लेकिन 1985 में फर्जी आदेश के सहारे इसे मुतवल्ली व परिवार का नाम चढ़ाया गया। इसके बाद जमीन बेचे जाने की शिकायत भी मिली, लेकिन विभाग व प्रशासन इसमें कुछ नहीं कर सकता, इसलिए चुप रहना मजबूरी रही। विभाग के पास उस जमीन को वक्फ की साबित करने के लिए एक नहीं कई प्रमाण हैं। अब जिस तरह का आदेश सरकार से मिलेगा, उसी आधार पर अग्रिम कार्रवाई होगी।
- नीरज अग्रवाल, अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी
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