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Maharajganj News: बाढ़ प्रभावित गांवों में लौटे ग्रामीण को सामने दिखी बर्बादी, प्रशासन ने शुरू किया आकलन

Thu, 01 Oct 2026 02:22 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 01 Oct 2026 02:22 AM IST
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Villagers returning to flood-affected areas witnessed the devastation; the administration has begun an assessment.
गहरे पानी से होकर घर लौटते ग्रामीण।
बाढ़ का पानी कम होने के बावजूद राह में कई जगह लोगों को कमर भर पानी से गुजरना पड़ा
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घर में रखा अनाज, कपड़े और अन्य जरूरी सामान पानी में भीगकर हो चुका है खराब
निचलौल। बाढ़ का पानी कम हुआ तो टापू क्षेत्र सोहगीबरवा, शिकारपुर और भोतहा के ग्रामीण बुधवार को घर लौटे। बाढ़ का पानी कम होने के बाद भी रास्ते में कमर तक पानी था। घर पहुंचने पर उन्हें बाढ़ द्वारा की गई बर्बादी का मंजर नजर आया। घरों में रखा अनाज, कपड़े और अन्य जरूरी सामान पानी में भीगकर खराब हो चुका है। गांवों में जगह-जगह कीचड़ और गंदगी के कारण घरों की पहचान तक मुश्किल हो गई है।
जानकारी के अनुसार, बाढ़ से सबसे ज्यादा नुकसान दुकानदारों को हुआ है। लंबे समय तक पानी में डूबी रहने से किराना और अन्य दुकानों में रखा सामान खराब हो गया। सोहगीबरवा के दुकानदार गोल्डन निषाद ने बताया कि उनकी किराने की दुकान में करीब पांच लाख रुपये से अधिक का सामान बर्बाद हुआ है। फ्रिज, जनरेटर और खाने-पीने की वस्तुएं पूरी तरह खराब हो गईं। गांव की सरकारी देसी शराब की दुकान भी पानी में डूबी रही। बुधवार को टीम लगाकर वहां भी सफाई और व्यवस्था दुरुस्त करने का काम शुरू किया गया।
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सोहगीबरवा निवासी अजीमुद्दीन ने बताया कि बाढ़ के बाद गांव में कुछ बचा ही नहीं है। घर में रखा खाने-पीने का सामान, कपड़े और अन्य जरूरी वस्तुएं पानी में भीगकर खराब हो गए हैं। पशुओं के बह जाने से उनके बाड़े भी सूने पड़े हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ आश्रय स्थल तक नहीं पहुंच पाने वाले परिवारों को बाहर से महंगे दामों पर खाद्य सामग्री खरीदकर गुजारा करना पड़ रहा है।
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प्रधान प्रतिनिधि रामदरस ने बताया कि बिहार के नेबुआ नौरंगिया से सामान लाने में अधिक खर्च होने के कारण गांव में खाद्य सामग्री महंगी मिल रही है। उन्होंने बताया कि बाढ़ में करीब 10 भैंस, 150 से अधिक बकरियां और कई सूअर मरे या बह गए हैं। ग्रामीण वीरेंद्र ने बताया कि अपने जीवन में उन्होंने ऐसी बाढ़ नहीं देखी। बाढ़ बढ़ने से पहले वह परिवार के साथ नेबुआ नौरंगिया चले गए थे। पानी कम होने की सूचना के बाद परिवार को लेकर घर लौटे हैं।


छोटे बच्चों को गोद में लेकर पानी पार कराते रहे अधिकारी

बाढ़ के बाद ग्रामीण जिस दुर्गम रास्ते से अपने घर लौट रहे थे, उसी रास्ते से प्रशासनिक टीम भी गांव पहुंची। कमर तक पानी में उतरकर डीपीआरओ श्रेया मिश्रा, एसडीएम अवनीश कुमार त्रिपाठी, तहसीलदार अमित कुमार सिंह, बीडीओ संतोष कुमार यादव और एडीओ पंचायत गुड्डू प्रसाद ने प्रभावित गांवों का जायजा लिया। इस दौरान एसडीएम अवनीश त्रिपाठी ने ग्रामीणों के छोटे बच्चों को गोद में लेकर पानी पार कराया। अधिकारियों को भी इसी रास्ते से गुजरना पड़ा, जिससे उन्हें ग्रामीणों की परेशानी का प्रत्यक्ष अनुभव हुआ।



सफाई के साथ नुकसान का आकलन शुरू
एसडीएम अवनीश कुमार त्रिपाठी ने बताया कि गांवों से पानी काफी हद तक निकल गया है। अत्यधिक प्रभावित स्थानों पर सफाई कर्मियों की टीमें लगा दी गई हैं। नुकसान का आकलन करने के लिए 12 सचिवों और राजस्व निरीक्षकों की टीमें लगाई गई हैं। घर, दुकान और पशुओं से हुए नुकसान का सर्वे कर एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट तैयार की जाएगी। पशुओं के बहने और गायब होने के मामलों में पशुपालकों से जानकारी जुटाई जा रही है। उन्होंने बताया कि प्रभावित टोलों में जहां तीन-चार घर ही हैं, वहां भी भोजन और पानी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम गांवों में कैंप लगाकर दवाएं वितरित कर रही है। सफाई कर्मियों को युद्धस्तर पर काम करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि बाढ़ के बाद पैदा हुई गंदगी और जलभराव से लोगों को जल्द राहत मिल सके। दुकानों और अन्य संपत्तियों को हुए नुकसान की रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।

फोटो परिचय
:
दुर्गम रास्ते से घर लौटते ग्रामीण और उसी मार्ग से जायजा लेने जाते अधिकारी।

- कमर भर पानी में ग्रामीणों के बच्चों को गोद में लेकर पार कराते एसडीएम अवनीश त्रिपाठी।
- बाढ़ प्रभावित घरों का सामान बाहर निकालकर सुखाते ग्रामीण।

- बाढ़ में तबाह दुकान का सामान बाहर निकालकर सुखाता दुकानदार।

- स्वास्थ्य शिविर का निरीक्षण करते अधिकारी।

- बाढ़ से दुकान में हुए नुकसान की जानकारी देते सोहगीबरवा निवासी दुकानदार गोल्डन निषाद।

- बाढ़ से घर में हुए नुकसान की जानकारी देते सोहगीबरवा निवासी अजीमुद्दीन।
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