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Maharajganj News: अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सुरक्षा के मजबूत स्तंभ बनेंगे वाइब्रेंट विलेज
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इंडो-नेपाल सीमा पर जिले के 34 गांव हैं श्रेणी में शामिल
550 किमी खुली सीमा में महराजगंज के अतिरिक्त छह जनपद शामिल
महराजगंज। इंडो-नेपाल की प्रदेश से जुड़ी 550 किमी खुली सीमा के जरिये अब घुसपैठ, तस्करी व पलायन रोकने के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय इसके लिए अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बसी भारतीय क्षेत्र की 34 ग्राम पंचायतों को वाइब्रेंट विलेज के रूप में विकसित कर रहा है। यह व्यवस्था सिर्फ जनपद में ही नहीं बल्कि सीमा से जुड़े सूबे के छह अन्य जिलों में भी मूर्त रूप ले रही है।
जानकारी के अनुसार, भारत-नेपाल के बीच प्रदेश की लगभग 550 किमी लंबी सीमा आने वाले दिनों में पहले से अधिक सुरक्षित होगी। इसके लिए केंद्र ने वाइब्रेंट विलेज का खाका खींचते हुए सीमाई ग्राम पंचायतों को कनेक्टिविटी, पर्यटन, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी मूलभूत जरूरतों का उम्दा प्रबंध करा रही है। इसके पीछे मंत्रालय की मंशा है कि भारतीय क्षेत्र में आने वाले सीमावर्ती गांव हर क्षेत्र में मजबूत होंगे तो इन ग्राम पंचायतों का उपयोग तस्करी, पलायन या घुसपैठ में देश विरोधी तत्व नहीं कर पाएंगे क्योंकि सशक्त वाइब्रेंट विलेज में अगर ऐसी स्थिति बनती या दिखती है तो वाइब्रेंट गांव के बाशिंदे प्रशासन की आंख-कान की भूमिका निर्वाह करेंगे।
सुरक्षा के लिहाज से इनकी भूमिका अहम रोल में लाने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देशन में सुरक्षा एजेंसियां व पुलिस इन पंचायतों में नियमित कैंप लगाकर न सिर्फ विभागीय अभियान व योजनाओं से यहां के लोगों को जोड़ेंगे, बल्कि गांव के प्रत्येक नागरिक में राष्ट्र सुरक्षा की भावना को मजबूती देने में उनकी भूमिका को भी रेखांकित कर प्रोत्साहित करने का काम करेंगे।
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इन मानदंडों पर विकसित हो रहे वाइब्रेंट विलेज
जिला सहायक पर्यटन अधिकारी प्रभाकर मणि ने बताया कि वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम में महराजगंज के 34 गांव को इस कार्यक्रम के तहत विकसित किया जा रहा है। यहां सामाजिक, शैक्षिक, बुनियादी ढांचा, पर्यटन विकास, आजीविका संसाधन व उनके विविध टिकाऊ स्तर का संयोजन के साथ-साथ वाइब्रेंट विलेज में निर्मित उत्पाद बिक्री का प्लेटफार्म उपलब्ध कराकर लगभग 50 हजार की आबादी का जीवन स्तर ऊपर उठाने का प्रयास किया जा रहा है।
यह वाइब्रेंट विलेज बन रहे मजबूत सुरक्षा स्तंभ
एएसपी सिद्धार्थ ने बताया जनपद में इंडो-नेपाल सीमा पर निचलौल की सर्वाधिक 20 ग्राम पंचायत, नौतनवां की 13 व फरेंदा तहसील की एक ग्राम पंचायत वाइब्रेंट विलेज की सूची में शामिल हैं। यह सभी पंचायतें जिले से जुड़ी लगभग 80 किमी नेपाल राष्ट्र की सीमा पर बसी हैं। इसमें ईटहिया, चंडीथान, गिरहिया, राजमंदिर कला, बटईडीहा, एकसड़वा, नईकोट, लक्ष्मीपुर कैथवलिया, जंगल गुलरिहा, अहिरौली, श्यामकाट, फरेंदी, कैथवलिया उर्फ बरगदही, खनुआ, अराजी सरकार उर्फ बैरियहवा, झींगटी ,चटिया, बहुआर खुर्द, अमड़ा उर्फ झुलनीपुर, धमऊर, पड़ौली, लोहरौली, डुमरी, निपनिया, बोदना, पिपरिया, कपिया, बैठवलिया, ढेसो, बजहा उर्फ अहिरौली, चंदा, बेलवा, अर्जुनही, भेड़िहारी का नाम शामिल है। जनपद के अलावा अंतर्राष्ट्रीय सीमा के 550 किमी दायरे में आने वाले सि. नगर, श्रावस्ती, बलरामपुर, बहराइच, लखीमपुर खीरी व पीलीभीत जिलों में भी सीमाई ग्राम पंचायतें वाइब्रेंट विलेज के रूप में विकसित हो रही हैं।
वर्जन
वाइब्रेंट विलेज केंद्रीय गृह मंत्रालय का अंशकालिक कार्यक्रम है। इसमें शामिल पंचायतों का सर्वांगीण विकास विभिन्न विभागों की मदद से किया जा रहा है। नेपाल सीमा पूरी तरह खुली है इसलिए यहां और बेहतर कार्य हो रहे हैं। पुलिस, एसएसबी और अन्य सुरक्षा एजेंसियां यहां नियमित जागरूकता शिविर व राष्ट्रीय सुरक्षा पर जरूरी जानकारी देकर सुरक्षा को मजबूत कर रही हैं।
-शक्ति मोहन अवस्थी, पुलिस अधीक्षक, महराजगंज।
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550 किमी खुली सीमा में महराजगंज के अतिरिक्त छह जनपद शामिल
महराजगंज। इंडो-नेपाल की प्रदेश से जुड़ी 550 किमी खुली सीमा के जरिये अब घुसपैठ, तस्करी व पलायन रोकने के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय इसके लिए अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बसी भारतीय क्षेत्र की 34 ग्राम पंचायतों को वाइब्रेंट विलेज के रूप में विकसित कर रहा है। यह व्यवस्था सिर्फ जनपद में ही नहीं बल्कि सीमा से जुड़े सूबे के छह अन्य जिलों में भी मूर्त रूप ले रही है।
जानकारी के अनुसार, भारत-नेपाल के बीच प्रदेश की लगभग 550 किमी लंबी सीमा आने वाले दिनों में पहले से अधिक सुरक्षित होगी। इसके लिए केंद्र ने वाइब्रेंट विलेज का खाका खींचते हुए सीमाई ग्राम पंचायतों को कनेक्टिविटी, पर्यटन, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी मूलभूत जरूरतों का उम्दा प्रबंध करा रही है। इसके पीछे मंत्रालय की मंशा है कि भारतीय क्षेत्र में आने वाले सीमावर्ती गांव हर क्षेत्र में मजबूत होंगे तो इन ग्राम पंचायतों का उपयोग तस्करी, पलायन या घुसपैठ में देश विरोधी तत्व नहीं कर पाएंगे क्योंकि सशक्त वाइब्रेंट विलेज में अगर ऐसी स्थिति बनती या दिखती है तो वाइब्रेंट गांव के बाशिंदे प्रशासन की आंख-कान की भूमिका निर्वाह करेंगे।
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सुरक्षा के लिहाज से इनकी भूमिका अहम रोल में लाने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देशन में सुरक्षा एजेंसियां व पुलिस इन पंचायतों में नियमित कैंप लगाकर न सिर्फ विभागीय अभियान व योजनाओं से यहां के लोगों को जोड़ेंगे, बल्कि गांव के प्रत्येक नागरिक में राष्ट्र सुरक्षा की भावना को मजबूती देने में उनकी भूमिका को भी रेखांकित कर प्रोत्साहित करने का काम करेंगे।
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इन मानदंडों पर विकसित हो रहे वाइब्रेंट विलेज
जिला सहायक पर्यटन अधिकारी प्रभाकर मणि ने बताया कि वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम में महराजगंज के 34 गांव को इस कार्यक्रम के तहत विकसित किया जा रहा है। यहां सामाजिक, शैक्षिक, बुनियादी ढांचा, पर्यटन विकास, आजीविका संसाधन व उनके विविध टिकाऊ स्तर का संयोजन के साथ-साथ वाइब्रेंट विलेज में निर्मित उत्पाद बिक्री का प्लेटफार्म उपलब्ध कराकर लगभग 50 हजार की आबादी का जीवन स्तर ऊपर उठाने का प्रयास किया जा रहा है।
यह वाइब्रेंट विलेज बन रहे मजबूत सुरक्षा स्तंभ
एएसपी सिद्धार्थ ने बताया जनपद में इंडो-नेपाल सीमा पर निचलौल की सर्वाधिक 20 ग्राम पंचायत, नौतनवां की 13 व फरेंदा तहसील की एक ग्राम पंचायत वाइब्रेंट विलेज की सूची में शामिल हैं। यह सभी पंचायतें जिले से जुड़ी लगभग 80 किमी नेपाल राष्ट्र की सीमा पर बसी हैं। इसमें ईटहिया, चंडीथान, गिरहिया, राजमंदिर कला, बटईडीहा, एकसड़वा, नईकोट, लक्ष्मीपुर कैथवलिया, जंगल गुलरिहा, अहिरौली, श्यामकाट, फरेंदी, कैथवलिया उर्फ बरगदही, खनुआ, अराजी सरकार उर्फ बैरियहवा, झींगटी ,चटिया, बहुआर खुर्द, अमड़ा उर्फ झुलनीपुर, धमऊर, पड़ौली, लोहरौली, डुमरी, निपनिया, बोदना, पिपरिया, कपिया, बैठवलिया, ढेसो, बजहा उर्फ अहिरौली, चंदा, बेलवा, अर्जुनही, भेड़िहारी का नाम शामिल है। जनपद के अलावा अंतर्राष्ट्रीय सीमा के 550 किमी दायरे में आने वाले सि. नगर, श्रावस्ती, बलरामपुर, बहराइच, लखीमपुर खीरी व पीलीभीत जिलों में भी सीमाई ग्राम पंचायतें वाइब्रेंट विलेज के रूप में विकसित हो रही हैं।
वर्जन
वाइब्रेंट विलेज केंद्रीय गृह मंत्रालय का अंशकालिक कार्यक्रम है। इसमें शामिल पंचायतों का सर्वांगीण विकास विभिन्न विभागों की मदद से किया जा रहा है। नेपाल सीमा पूरी तरह खुली है इसलिए यहां और बेहतर कार्य हो रहे हैं। पुलिस, एसएसबी और अन्य सुरक्षा एजेंसियां यहां नियमित जागरूकता शिविर व राष्ट्रीय सुरक्षा पर जरूरी जानकारी देकर सुरक्षा को मजबूत कर रही हैं।
-शक्ति मोहन अवस्थी, पुलिस अधीक्षक, महराजगंज।