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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Maharajganj News ›   Two sons of Nautanwa made the ultimate sacrifice in the Kargil War, standing firm like a rock.

Maharajganj News: कारगिल युद्ध में नौतनवा को दो बेटों ने दी थी कुर्बानी, खड़े रहे चट्टान की तरह

Sun, 26 Jul 2026 02:25 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 26 Jul 2026 02:25 AM IST
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Two sons of Nautanwa made the ultimate sacrifice in the Kargil War, standing firm like a rock.
शहीद पूरन बहादुर थापा के स्वजन।
अपनों के खून से सिंची कारगिल की उस सरजमीं में आज भी बसती है नौतनवा की जान
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जांबाजों की कुर्बानी पीढ़ियों को प्रेरणा और क्षेत्र वासियों को दिलाती रहेगी सम्मान
नौतनवा। 1999 में पाकिस्तानी सेना से जंग छिड़ने के बाद कारगिल की चोटी गोलियों की तड़तड़ाहट से थर्रा रही थी। इस समय नौतनवा के दो लाल पूरन बहादुर थापा और प्रदीप कुमार थापा पूरी मुस्तैदी के साथ दुश्मनों के सामने खड़े होकर मोर्चा संभाले हुए थे। दुश्मन से लड़ते हुए दोनों जवानों ने कुर्बानी दी। यही नहीं बाद में उनके भाई और बेटों ने भी सेना में सेवाएं दीं। लोग आज भी उनकी कुर्बानी को याद करते हैं।
कारगिल युद्ध के दौरान दोनों ही जांबाजों पर देश की हिफाजत का ऐसा जुनून सवार था कि वह किसी भी कीमत पर भारत की एक इंच जमीन भी छोड़ने को तैयार नहीं थे। इस युद्ध में दोनों जाबांज अपना फर्ज अदा करते वीरगति को प्राप्त हो गए। दोनों वीर सपूतों की कुर्बानी ढाई दशक से युवाओं को प्रेरणा और क्षेत्रवासियों को गौरव का एहसास कराती आ रही है। दोनों वीर सपूतों के सम्मान में नगर में उनकी प्रतिमाएं भी स्थापित हैं। जहां लोग आस्था के साथ शीश झुका कर उन्हें नमन करते हैं।
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तिरंगे में लिपटा जांबाजों का शव देख नम हो गई हर आंख
ग्राम सभा बैरिहवा में पैदा हुए प्रदीप थापा सन 1977 और पूरन थापा सन 1997 में जैक राइफल में भर्ती हुए थे। दोनों को सेना में सेवा देते कुछ समय ही बीता था कि वर्ष 1999 में कारगिल की जंग छिड़ गई। इसी युद्ध में वतन की हिफाजत करते दोनों ही जाबांज वीरगति को प्राप्त हो गए। इनके बलिदान होने की खबर मिलते ही पूरा नौतनवा क्षेत्र शोक में डूब गया। जब दोनों अमर शहीदों का पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटा पैतृक आवास पर पहुंचा तो हर आंख नम थी और हरेक उनकी शहादत को सलाम कर रहा था। जब 26 जुलाई 1999 को कारगिल के जंग जीतने की खबर मिलते ही लोगों के कलेजे को ठंडक पहुंची।
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जांबाजों के भाई और बेटों ने भी निभाया फर्ज
कारगिल युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुए बलिदानी पूरन बहादुर थापा और प्रदीप थापा के भाई और बेटों ने भी विरासत में मिले उसी जज्बे और जुनून के साथ अपना फर्ज निभाया। प्रदीप थापा की शहादत के बाद उनकी पत्नी हीरा थापा ने अपने बेटे अमर व कैहर थापा को देश के लिए ढाल के रूप में खड़ा होने को तैयार किया। वहीं पूरन बहादुर थापा की मां सुमित्रा (अब दिवंगत) ने अपने सबसे छोटे पुत्र श्याम थापा को भी सेना में भेजा। इससे पूर्व बलिदानी प्रदीप थापा के भाई दीपक सिंह थापा, विजय थापा, अजय थापा एवं ओमप्रकाश थापा ने भी सेना में भर्ती होकर देश की सेवा कर चुके थे। वर्तमान में प्रदीप थापा के दोनों पुत्र व उनके सभी भाई सेना से सेवानिवृत्त हैं।

नौतनवा और दिल्ली में रहता है बलिदानियों का परिवार
कारगिल युद्ध में शहादत के बाद उस समय प्रदीप थापा की पत्नी हीरा थापा दोनों बच्चों अमर व कैहर को लेकर दिल्ली में मिले फ्लैट में जाकर रहने लगीं। जबकि पूरन थापा की माता सुमित्रा उस वक्त पूरन से छोटे अपने दोनों बच्चों अशोक व श्याम थापा को लेकर बैरिहवा से नौतनवा कस्बे के सिद्धार्थनगर वार्ड में आकर बस गईं। कोरोना काल के दौरान 8 मई 2021 को बलिदानी पूरन थापा की माता सुमित्रा का भी देहांत हो गया। उनके बड़े पुत्र अशोक इस समय परदेश में नौकरी कर परिवार की देखभाल करते हैं और छोटे पुत्र श्याम थापा सेना में अपनी सेवा दे रहे हैं। दोनों भाइयों का परिवार नौतनवा में ही रहता है और बच्चों की शिक्षा और दीक्षा भी यहीं से चल रही है।
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