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Maharajganj News: प्रधानाध्यापिका की बर्खास्तगी के मामले में दो सदस्यीय जांच टीम गठित

Wed, 02 Oct 2024 04:09 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज Updated Wed, 02 Oct 2024 04:09 AM IST
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Two-member investigation team formed in the case of dismissal of the headmistress
महराजगंज। पिपरा रसूलपुर के सिद्धार्थ उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में कथित प्रधानाध्यापिका की बर्खास्तगी के मामले में नया मोड आ गया है। कार्रवाई के खिलाफ कथित प्रधानाध्यापिका ने न्यायालय की शरण ली। हाई कोर्ट ने बीएसए को उनका पक्ष सुनने का आदेश दिया। आदेश के क्रम में बीएसए ने जांच टीम गठित कर दी। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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जानकारी के अनुसार, इस प्रकरण में 24 अगस्त 2024 को खंड शिक्षा अधिकारी सदर की ओर से कोतवाली में तहरीर दी गई थी। केस दर्ज करने के बाद पुलिस ने जरूरी तथ्यों की जांच पड़ताल शुरू कर दी। विवेचक की ओर से मामले से जुड़े जरूरी प्रपत्रों की संबंधित पटल से एकत्र कर कार्रवाई को आगे बढ़ाया गया।
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कथित प्रधानाध्यापिका की ओर से प्रकरण को हाई कोर्ट में पहुंचाया गया तो कोर्ट से उनका पक्ष भी सुनने को कहा। इसके बाद बीएसए की ओर दो सदस्यी कमेटी गठित कर जांच की जिम्मेदारी सौंप दी गई। दूसरी ओर विवेचक की ओर लेखा कार्यालय से जरूरी प्रपत्र भी मांगा गया है।
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तहरीर में चयन प्रक्रिया को गलत ठहराया गया था। इसी आधार पर मामले में कार्रवाई आगे बढ़ी थी। इस प्रकरण को लेकर सभी जरूरी बिंदुओं पर जांच हो रही है। सिद्धार्थ पूर्व माध्यमिक विद्यालय पिपरा रसूलपुर विकास क्षेत्र-सदर में प्रधानाध्यापिका के पद पर कार्यरत निधि सिंह की नियुक्ति के संबंध में शिकायत मिली थी। इस संबंध में जांच हुई तो गड़बड़ी सामने आने पर कार्रवाई कर दी गई है। सूत्रों की माने तो इस पूरे प्रकरण में बीएसए कार्यालय के एक कर्मी की भूमिका संदिग्ध है। कानूनी पेंच फंसाने के लिए उसकी ओर से तरह-तरह के हथकंडे अपनाए गए।
यह मामला खुला नहीं होता तो एक नियुक्ति और हो गई होती। सूत्रों की माने तो एडेड स्कूलों में तैनाती में जमकर अंधेरगर्दी हुई है। इसमें पैसा व पावर का खेल जमकर खेला गया, जिसकी व्यवस्था जैसी रही, उसने उसी हिसाब से अपना काम कराया। इस बार भी सिद्धार्थ उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में नियुक्ति की गड़बड़ी की पोल खुली तो यह कानूनी दाव पेंच में उलझ रहा है।

जांच के बाद जांच फिर नियम कानून के पेच से मामले को उलझाने की कोशिश की जा रही है। वैसे भी इस प्रकरण को लेकर कुछ लोगों की बेचैनी बढ़ गई है। उन्हें डर है कि सभी पत्रावली खुली तो काले कारनामें सामने आ जाएंगे। इस तरह के मामले अन्य एडेड स्कूलों में भी हो सकते हैं।


उच्च न्यायालय के आदेश का पालन किया जा रहा है। दो सदस्यीय कमेटी को जांच के लिए जिम्मेदारी दी गई है। रिपोर्ट आने के बाद न्यायालय के आदेश के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

-श्रवण कुमार गुप्ता, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी
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