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Maharajganj News: जमीन ले ली, मुआवजे के लिए दौड़ा रहे
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फरेंदा बाईपास के पास निर्माणाधीन ओवरब्रिज।
महराजगंज। गोरखपुर-सोनौली राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण तेजी से चल रहा है। इस बीच मुआवजे को लेकर प्रभावित लोग इधर-उधर भटक रहे हैं। अधिक जमीन अधिग्रहण करने के बाद मुआवजा कम देने का आरोप लगाकर भूमि अध्यापित विभाग में पीड़ितों ने शिकायत की। जिम्मेदार यह तर्क दे रहे हैं कि अधिग्रहण के दौरान ही रोक देना चाहिए।
जानकारी के अनुसार, गोरखपुर-सोनौली राष्ट्रीय राजमार्ग के लिए अधिग्रहित भूमि के बदले अब तक लगभग 500 करोड़ रुपये यानी 97 प्रतिशत मुआवजा किसानों को वितरित किया जा चुका है लेकिन अब भी कई ऐसे किसान हैं जिनके जमीन या मकान मानक से अधिक अधिग्रहित किए जाने के बावजूद उन्हें भुगतान नहीं मिला है। फरेंदा बुजुर्ग गांव के कुछ प्रभावित किसानों ने बताया कि जब उनके मकानों का अधिग्रहण किया गया था, तब एनएचएआई के अधिकारियों ने यह आश्वासन दिया था कि जितनी अधिक भूमि या निर्माण संरचना ली जाएगी, उसका मुआवजा बाद में दिया जाएगा लेकिन अब निर्माण कार्य पूरा होने के बाद भी न तो अतिरिक्त भूमि का मुआवजा मिला और न ही संबंधित विभागों से कोई स्पष्ट जवाब मिला है।
किसानों व परिसंपत्तियों के स्वामियों का कहना है कि जब वे भूमि अध्याप्ति अधिकारी कार्यालय पहुंचते हैं तो विभाग की ओर से यह कहकर पल्ला झाड़ लिया जाता हैं कि इस मामले में एनएचएआई परियोजना निदेशक से सीधे संपर्क किया जाए। वहीं एनएचएआई की ओर से यह जवाब मिलता है कि फाइल अवार्ड बनाने की प्रक्रिया में है जिसके बाद भुगतान किया जाएगा लेकिन महीनों बीतने के बाद भी यह प्रक्रिया कागजों तक ही सीमित है।
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इसी तरह शुक्रवार को नौतनवा तहसील क्षेत्र के मुड़िला गांव के प्रभावित किसान जोखू, राम अधारे और रामदेव आदि किसानों ने भूमि अध्याप्ति अधिकारी कार्यालय में पहुंचकर यह शिकायत दर्ज कराई कि एनएचएआई ने उन लोगों का भूमि अधिग्रहण किया लेकिन अभी मुआवजा नहीं मिल सका है। इन किसानों का कहना है कि एनएचएआई और भूमि अधिग्रहण कार्यालय के कर्मचारी बार-बार कागजातों में कमी का हवाला देकर उन्हें लौटा देते हैं।
कुछ किसानों को बताया गया कि जिनके दस्तावेज पूर्ण हैं, उन्हें मुआवजा मिल रहा है, जबकि जिनके कागजातों में कमी है, उन्हें पहले दस्तावेज पूरे करने होंगे लेकिन कई किसानों का कहना है कि उनके दस्तावेज पूर्ण हैं, फिर भी मुआवजा राशि नहीं दी जा रही। मुड़िला गांव के नंदू और ओमप्रकाश ने बताया कि उनकी एक एयर जमीन अधिग्रहित की गई है लेकिन मुआवजा राशि अब तक नहीं मिली। उन्होंने कहा कि वह बार-बार एनएचएआई के अधिकारियों और भूमि अधिग्रहण कार्यालय के कर्मचारियों से मिल रहे हैं लेकिन हर बार उन्हें कागजातों में कमी का बहाना बनाकर लौटा दिया जाता है। इसी तरह, संतराज, अखिलेश, रामवृक्ष और रामदेव ने भी अपनी शिकायत दर्ज की।
इनका कहना है कि उनकी एक एयर जमीन का अधिग्रहण हुआ और इस जमीन पर निर्माण कार्य भी पूरा हो चुका है, लेकिन मुआवजा अभी तक नहीं मिला। वहीं, मुड़िला गांव के राधे, रामदवन, अरविंद, निम्मन और अधारे ने बताया कि उनकी एक डिसमिल जमीन अधिग्रहित की गई लेकिन मुआवजा राशि का भुगतान नहीं हुआ। ये किसान मुआवजा पाने के लिए लगातार एनएचएआई और भूमि अधिग्रहण कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही। इसी तरह गांव की हेमंती देवी, उर्मिला, सुनीता और जोखू ने भी यही दुखड़ा सुनाया। इनका कहना है कि उनकी दो एयर जमीन अधिग्रहित की गई, और निर्माण कार्य पूरा होने के बावजूद मुआवजा राशि नहीं मिली।
प्रभावित किसानों का आरोप है कि एनएचएआई और भूमि अधिग्रहण कार्यालय के बीच समन्वय की कमी के कारण मुआवजा वितरण में देरी हो रही है। प्रभावित किसान मांग कर रहे हैं कि उनकी जमीन का उचित मुआवजा तत्काल दिया जाए।
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जानकारी के अनुसार, गोरखपुर-सोनौली राष्ट्रीय राजमार्ग के लिए अधिग्रहित भूमि के बदले अब तक लगभग 500 करोड़ रुपये यानी 97 प्रतिशत मुआवजा किसानों को वितरित किया जा चुका है लेकिन अब भी कई ऐसे किसान हैं जिनके जमीन या मकान मानक से अधिक अधिग्रहित किए जाने के बावजूद उन्हें भुगतान नहीं मिला है। फरेंदा बुजुर्ग गांव के कुछ प्रभावित किसानों ने बताया कि जब उनके मकानों का अधिग्रहण किया गया था, तब एनएचएआई के अधिकारियों ने यह आश्वासन दिया था कि जितनी अधिक भूमि या निर्माण संरचना ली जाएगी, उसका मुआवजा बाद में दिया जाएगा लेकिन अब निर्माण कार्य पूरा होने के बाद भी न तो अतिरिक्त भूमि का मुआवजा मिला और न ही संबंधित विभागों से कोई स्पष्ट जवाब मिला है।
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किसानों व परिसंपत्तियों के स्वामियों का कहना है कि जब वे भूमि अध्याप्ति अधिकारी कार्यालय पहुंचते हैं तो विभाग की ओर से यह कहकर पल्ला झाड़ लिया जाता हैं कि इस मामले में एनएचएआई परियोजना निदेशक से सीधे संपर्क किया जाए। वहीं एनएचएआई की ओर से यह जवाब मिलता है कि फाइल अवार्ड बनाने की प्रक्रिया में है जिसके बाद भुगतान किया जाएगा लेकिन महीनों बीतने के बाद भी यह प्रक्रिया कागजों तक ही सीमित है।
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इसी तरह शुक्रवार को नौतनवा तहसील क्षेत्र के मुड़िला गांव के प्रभावित किसान जोखू, राम अधारे और रामदेव आदि किसानों ने भूमि अध्याप्ति अधिकारी कार्यालय में पहुंचकर यह शिकायत दर्ज कराई कि एनएचएआई ने उन लोगों का भूमि अधिग्रहण किया लेकिन अभी मुआवजा नहीं मिल सका है। इन किसानों का कहना है कि एनएचएआई और भूमि अधिग्रहण कार्यालय के कर्मचारी बार-बार कागजातों में कमी का हवाला देकर उन्हें लौटा देते हैं।
कुछ किसानों को बताया गया कि जिनके दस्तावेज पूर्ण हैं, उन्हें मुआवजा मिल रहा है, जबकि जिनके कागजातों में कमी है, उन्हें पहले दस्तावेज पूरे करने होंगे लेकिन कई किसानों का कहना है कि उनके दस्तावेज पूर्ण हैं, फिर भी मुआवजा राशि नहीं दी जा रही। मुड़िला गांव के नंदू और ओमप्रकाश ने बताया कि उनकी एक एयर जमीन अधिग्रहित की गई है लेकिन मुआवजा राशि अब तक नहीं मिली। उन्होंने कहा कि वह बार-बार एनएचएआई के अधिकारियों और भूमि अधिग्रहण कार्यालय के कर्मचारियों से मिल रहे हैं लेकिन हर बार उन्हें कागजातों में कमी का बहाना बनाकर लौटा दिया जाता है। इसी तरह, संतराज, अखिलेश, रामवृक्ष और रामदेव ने भी अपनी शिकायत दर्ज की।
इनका कहना है कि उनकी एक एयर जमीन का अधिग्रहण हुआ और इस जमीन पर निर्माण कार्य भी पूरा हो चुका है, लेकिन मुआवजा अभी तक नहीं मिला। वहीं, मुड़िला गांव के राधे, रामदवन, अरविंद, निम्मन और अधारे ने बताया कि उनकी एक डिसमिल जमीन अधिग्रहित की गई लेकिन मुआवजा राशि का भुगतान नहीं हुआ। ये किसान मुआवजा पाने के लिए लगातार एनएचएआई और भूमि अधिग्रहण कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही। इसी तरह गांव की हेमंती देवी, उर्मिला, सुनीता और जोखू ने भी यही दुखड़ा सुनाया। इनका कहना है कि उनकी दो एयर जमीन अधिग्रहित की गई, और निर्माण कार्य पूरा होने के बावजूद मुआवजा राशि नहीं मिली।
प्रभावित किसानों का आरोप है कि एनएचएआई और भूमि अधिग्रहण कार्यालय के बीच समन्वय की कमी के कारण मुआवजा वितरण में देरी हो रही है। प्रभावित किसान मांग कर रहे हैं कि उनकी जमीन का उचित मुआवजा तत्काल दिया जाए।