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टमाटर कांड: अधिकारियों से सांठगांठ बनाकर मोटी कमाई का जुगाड़ फेल

Wed, 12 Jul 2023 01:16 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 12 Jul 2023 01:16 AM IST
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Tomato scandal: Jugaad of big money failed by colluding with officials
लाभ नहीं मिला तो कस्टम की करतूत को पुलिस को बताकर खोली पोल, टमाटर छोड़ने के एवज में मोटी रकम वसूली की चर्चा
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संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। टमाटर कांड में पोल खुलने का यही कारण है कि एक ही व्यक्ति को लाभ पहुंचाया जा रहा था। जबकि कई दावेदार थे। जब बात नहीं बनी तो पुलिस को सूचना देकर टमाटर पकड़वा दिया गया। टमाटर तस्करी के खेल में अधिकारियों से सांठगांठ बनाकर मोटी कमाई की जा रही थी। केस सामने आने के बाद सभी की कलई खुल गई। चर्चा है कि नौतनवां कस्टम अधिकारियों ने तस्करों को लाभ पहुंचाने के लिए टमाटर छोड़ा था। अधिकारियों को दिखाने के लिए दोनों गाड़ियों के आधे से कम टमाटर नष्ट कर वीडियो बनाया गया और बाकी के टमाटर छोड़ दिया गया, जिसके एवज में मोटी रकम वसूल की गई थी।
ठूठीबारी सीमा से भारत में लाए गए तीन टन विदेशी टमाटर को पकड़ने और छोड़ने के मामले में कस्टम के छह अफसर-कर्मियों को लखनऊ मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया है। शुक्रवार रात कस्टम कार्यालय से दोनों पिकअप को गैस गोदाम के पीछे डंडा नदी के किनारे लाया गया, लेकिन तीन टन में से केवल आठ दस किलो टमाटर ही नष्ट किया गया। मीडिया को इसकी भनक लगते ही दोनों पिकअप फिर से कस्टम कार्यालय लाए गए। शनिवार को फिर टमाटर नष्ट करने के लिए भेजा गया पर बाद में उसी नंबर की दोनों पिकअप को गोरखपुर मंडी की ओर जाते वक्त नौतनवा थाने की संपतिहा चौकी पुलिस ने पकड़ लिया। रूट पर लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज खंगाली गई तो पता चला कि दोनों पिकअप दो घंटे पहले कस्टम कार्यालय से निकली थी।
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इन अधिकारियों पर गिरी गाज

नौतनवा कस्टम विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों पर उच्चाधिकारियों की गाज गिरी है। पूरे प्रकरण को कस्टम आयुक्त लखनऊ आरती सक्सेना ने नौतनवां कस्टम अधीक्षक विशाल मेहता, निरीक्षक आदित्य शर्मा, जितेन्द्र कुमार, एसएस हैदर, मुख्य आरक्षी सूर्यभान यादव, आरक्षी लक्ष्मण मौर्य को तत्काल प्रभाव से आयुक्तालय लखनऊ से संबद्ध कर दिया है। एक साथ कस्टम के इतने अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ हुई इस कार्रवाई से महकमे में हडकंप मच गया है।
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अपने ही बयान में फंसे अधिकारी
अपने बचाव में बेजुबानों को ढाल बनाने वाले कस्टम अधिकारी खुद फंसते नजर आए। एक बड़े अधिकारी के मुताबिक उनकी ओर से शनिवार सुबह नष्ट कराए गए तीन हजार किलो टमाटर की खेप को आसपास चर रहे बेजुबानों ने ही चट कर दिया, जबकि इनके द्वारा टमाटर नष्ट कराए जाने के महज 45 मिनट के अंदर मौके पर पहुंचकर पत्रकारों द्वारा जब समाचार संकलन के लिए तस्वीरें ली गईं, तो वहां न तो टमाटर था और ना ही कोई मवेशी। रविवार को जब खबर प्रकाशित हुई तो पूरे जनपद में कस्टम विभाग की किरकिरी हुई। इसके बाद इन्होंने टमाटर गायब होने के पीछे बेजुबानों जानवराें को ठहराया। पुलिस और एसएसबी द्वारा बरामद किए गए पिकअप और टमाटर के संबंध में भी एक नई कहानी गढ़ डाली। जिसमें अब ये खुद फंसते नजर आ रहे हैं।
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सख्त कानून के अभाव में बच निकलते हैं तस्कर
नेपाल से तस्करी के मामले को लेकर तस्करों की भूमिका संदिग्ध है। हर तरफ से लाभ के बाद भी कस्टम के सख्त कानून के अभाव में बच निकलते है। तस्करी के सामान बरामद होने के बाद पेनाल्टी और टैक्स जमा करने के बाद नेपाल द्वारा लाए गए सामान वैध हो जाते हैं। और कानूनी प्रकिया के तहत तस्कर फिर उसी तस्करी के काम में जुट जाते हैं। सीमावर्ती क्षेत्र में सोनौली से लेकर ठूठीबारी झुलनीपुर तक समान सीज होकर नौतनवां कस्टम पहुंचते हैं।
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