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बेटे की झलक पाने को तरसे मां-पिता
Sun, 17 Feb 2019 12:29 AM IST
राकेश पांडेय
महराजगंज (ब्यूरो)
महराजगंज (ब्यूरो)
Published by: राकेश पांडेय
Updated Sun, 17 Feb 2019 12:29 AM IST
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बेटे की झलक पाने को तरसे मां-पिता
- फोटो : अमर उजाला
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फरेंदा (महराजगंज)। आतंकी हमले में शहीद फरेंदा के लाल की एक झलक पाने को लोग तरस रहे थे। शनिवार को बूढ़े माता-पिता खड़े होकर बेटे के आने की राह देख रहे थे। बीच-बीच में शोर सुनकर वे दौड़ पड़ रहे थे। इसे देख मौजूद लोगों की भी आंखें भर जा रही थीं।
हरपुर गांव के बेलहिया निवासी पंकज त्रिपाठी करीब छह वर्ष पूर्व सीआरपीएफ में भर्ती हुए तो परिवार में खुशी का माहौल हो गया था। परिवार के लोग अपने जेहन में अनेक खुशियां समेटे हुए थे। बूढ़े पिता ओमप्रकाश त्रिपाठी व मां सुशीला देवी को नहीं मालूम था कि यह खुशी मात्र कुछ ही दिनों की ही होगी। घर से छह दिन पूर्व देश की सेवा के लिए निकले पंकज पुलवामा में आतंकी हमले में शहीद हो गए। शनिवार को जब आला अफसर पहुंचने लगे तो माता-पिता को बेटे का चेहरा देखने का विश्वास हो रहा था। लेकिन जब छह सैनिक कंधों पर ताबूत में शहीद का पार्थिव शरीर लेकर पहुंचे तो माता-पिता के साथ पत्नी रोहिनी व भाई शुभम भी दहाड़े मार कर रोने लगे। मां ताबूत से लिपट गई, बार-बार बेटे की एक झलक पाने के लिए अधिकारियों से गुहार कर रही थी। लेकिन अधिकारी भी मजबूर थे, कलेजे के टुकड़े का मात्र कुछ ही अंग थे जिसे माता-पिता सहन नहीं कर पाते। बेटे की झलक पाने की पुकार करते-करते मां बार-बार बेहोश हो रही थी। लोग पानी के छींटे डाल मारकर होश में लाने का प्रयास कर रहे थे। माता-पिता की जिद देख प्रशासन के लोग भी आनन-फानन में पार्थिव शरीर को लेकर अंतिम संस्कार के लिए चल दिए। आतंकी हमले में शहीद पंकज त्रिपाठी को खोने का गम पिता ओमप्रकाश के चेहरे पर साफ दिख रहा था। बोले- अब तो बुढ़ापे की लाठी ही टूट गई। बेटे के शहीद होने का गम तो है लेकिन, फख्र इस बात का है कि उसने देश की सेवा में अपने प्राण की आहुति दी है। जरूरत पड़ी तो दूसरे बेटे को भी सेना में भेजेंगे।
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हरपुर गांव के बेलहिया निवासी पंकज त्रिपाठी करीब छह वर्ष पूर्व सीआरपीएफ में भर्ती हुए तो परिवार में खुशी का माहौल हो गया था। परिवार के लोग अपने जेहन में अनेक खुशियां समेटे हुए थे। बूढ़े पिता ओमप्रकाश त्रिपाठी व मां सुशीला देवी को नहीं मालूम था कि यह खुशी मात्र कुछ ही दिनों की ही होगी। घर से छह दिन पूर्व देश की सेवा के लिए निकले पंकज पुलवामा में आतंकी हमले में शहीद हो गए। शनिवार को जब आला अफसर पहुंचने लगे तो माता-पिता को बेटे का चेहरा देखने का विश्वास हो रहा था। लेकिन जब छह सैनिक कंधों पर ताबूत में शहीद का पार्थिव शरीर लेकर पहुंचे तो माता-पिता के साथ पत्नी रोहिनी व भाई शुभम भी दहाड़े मार कर रोने लगे। मां ताबूत से लिपट गई, बार-बार बेटे की एक झलक पाने के लिए अधिकारियों से गुहार कर रही थी। लेकिन अधिकारी भी मजबूर थे, कलेजे के टुकड़े का मात्र कुछ ही अंग थे जिसे माता-पिता सहन नहीं कर पाते। बेटे की झलक पाने की पुकार करते-करते मां बार-बार बेहोश हो रही थी। लोग पानी के छींटे डाल मारकर होश में लाने का प्रयास कर रहे थे। माता-पिता की जिद देख प्रशासन के लोग भी आनन-फानन में पार्थिव शरीर को लेकर अंतिम संस्कार के लिए चल दिए। आतंकी हमले में शहीद पंकज त्रिपाठी को खोने का गम पिता ओमप्रकाश के चेहरे पर साफ दिख रहा था। बोले- अब तो बुढ़ापे की लाठी ही टूट गई। बेटे के शहीद होने का गम तो है लेकिन, फख्र इस बात का है कि उसने देश की सेवा में अपने प्राण की आहुति दी है। जरूरत पड़ी तो दूसरे बेटे को भी सेना में भेजेंगे।
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