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Maharajganj News: वक्फ संपत्तियों में नहीं हो सकेगा खेल, रिकॉर्ड डिजिटल
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संवाद न्यूज़ एजेंसी
महराजगंज। जिले की वक्फ संपत्ति से होने वाले आय-व्यय का रिकॉर्ड अब मुतवल्ली नहीं बल्कि सीधे अल्पसंख्यक कल्याण विभाग रखेगा। साथ ही वक्फ की संपत्तियों में कोई हेरफेर भी नहीं किया जा सकेगा। इसके लिए वक्फ संपत्तियों का रिकॉर्ड डिजिटल किए जाने का कार्य प्रारंभ किया गया है।
सोमवार को शासन के वीडियो कान्फ्रेंसिंग के बाद डीएमओ तन्मय पांडेय के नेतृत्व में विभाग के छह कर्मियों को प्रशिक्षित किया गया जो जनपद की वक्फ संपत्तियों का सर्वे के उपरांत डाटा तैयार करने में शासन के निर्देशों का अनुपालन करेंगे।
वक्फ संसोधन 2025 के प्रभावी होने के बाद केंद्र सरकार ने अपने डिजिटल रिकॉर्ड के लिए विकसित वामसी पोर्टल को उम्मीद नाम देते हुए तब्दील कर दिया है। यह एक नया, केंद्रीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जो वक्फ संपत्तियों के कुशल और पारदर्शी प्रबंधन पर केंद्रित है।
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इसपर शिया व सुन्नी वक्फ बोर्ड की संपत्तियों की फीडिंग व जियो टैगिंग दोनों कार्य किए जाने हैं। इसका लाभ है कि मुतवल्ली की मिलीभगत से वक्फ संपत्ति खुर्द-बुर्ज (अन्य के नाम) नहीं दर्ज हो सकेंगी ।
अल्पसंख्यक कल्याण विभाग जनपद स्तर पर इन संपत्तियों के आय-व्यय का रिकॉर्ड रखते हुए शासन को रिपोर्ट करेगा। मुतवल्ली की नियुक्ति भी संशोधन के बाद अब अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की तरफ से ही होगा।
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महराजगंज। जिले की वक्फ संपत्ति से होने वाले आय-व्यय का रिकॉर्ड अब मुतवल्ली नहीं बल्कि सीधे अल्पसंख्यक कल्याण विभाग रखेगा। साथ ही वक्फ की संपत्तियों में कोई हेरफेर भी नहीं किया जा सकेगा। इसके लिए वक्फ संपत्तियों का रिकॉर्ड डिजिटल किए जाने का कार्य प्रारंभ किया गया है।
सोमवार को शासन के वीडियो कान्फ्रेंसिंग के बाद डीएमओ तन्मय पांडेय के नेतृत्व में विभाग के छह कर्मियों को प्रशिक्षित किया गया जो जनपद की वक्फ संपत्तियों का सर्वे के उपरांत डाटा तैयार करने में शासन के निर्देशों का अनुपालन करेंगे।
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वक्फ संसोधन 2025 के प्रभावी होने के बाद केंद्र सरकार ने अपने डिजिटल रिकॉर्ड के लिए विकसित वामसी पोर्टल को उम्मीद नाम देते हुए तब्दील कर दिया है। यह एक नया, केंद्रीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जो वक्फ संपत्तियों के कुशल और पारदर्शी प्रबंधन पर केंद्रित है।
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इसपर शिया व सुन्नी वक्फ बोर्ड की संपत्तियों की फीडिंग व जियो टैगिंग दोनों कार्य किए जाने हैं। इसका लाभ है कि मुतवल्ली की मिलीभगत से वक्फ संपत्ति खुर्द-बुर्ज (अन्य के नाम) नहीं दर्ज हो सकेंगी ।
अल्पसंख्यक कल्याण विभाग जनपद स्तर पर इन संपत्तियों के आय-व्यय का रिकॉर्ड रखते हुए शासन को रिपोर्ट करेगा। मुतवल्ली की नियुक्ति भी संशोधन के बाद अब अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की तरफ से ही होगा।