फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Maharajganj News ›   There is shortage of fertilizer at the committees, smugglers are smuggling it across the border

Maharajganj News: समितियों पर खाद की किल्लत, तस्कर कर रहे सरहद पार

Sun, 12 Nov 2023 12:59 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 12 Nov 2023 12:59 AM IST
विज्ञापन
There is shortage of fertilizer at the committees, smugglers are smuggling it across the border
सीमावर्ती क्षेत्र की ज्यादातर समितियों पर खाद नहीं मिल पा रहीं है, निचलौल क्षेत्र के बैठवलिया, ठूठीबारी, टिकुलहिया, बेलवा समिति पर नहीं है डीएपी
विज्ञापन

संवाद न्यूज एजेंसी

महराजगंज। भारत नेपाल सीमा से सटी समितियों पर डीएपी नहीं मिल रहा है, जबकि तस्कर सरहद पार करने में जुटे हैं। भारतीय क्षेत्र में डीएपी 1360 रुपये मिल रही है। नेपाल पहुंचते ही इसकी कीमत 1800 से 2200 रुपये भारतीय हो जा रही हैं। प्रति बोरी 500 रुपये ज्यादा मुनाफा तस्कर कमा रहे हैं। खाद की कीमत नेपाल में बार्डर से जितनी दूर पहुंचाई जाएगी, कीमत उतनी ही अधिक होती जाएगी। सरहद के करीब पहुंचाने में पर 1800 रुपये ही मिलते हैं। अंदर जाते ही रेट बढ़ जाता है। भारतीय क्षेत्र में किसानों को डीएपी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है।
सोनौली कोतवाली क्षेत्र के भगवानपुर चौकी अंतर्गत ग्राम पंचायत भगवानपुर टोला रघुनाथपुर, जसवल, मदरी व परसामलिक थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत रेहरा, अहिरौली आदि इन दिनों तस्करी का सुरक्षित जगह माना जा रहा है। रघुनाथपुर, जसवल, मदरी व परसामलिक थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत रेहरा में तस्कर बेधड़क होकर डीएपी को बाइक पर लादकर नेपाल पहुंचा रहे हैं। सूत्र बतातें हैं कि जिगिना, जमुहानी, गंगवलिया, हरलालगढ़ गांव में उर्वरक की कुछ निजी दुकान रात में ही खुल जा रही है और तस्कर डीएपी खाद को बाइक पर लादकर लेकर चले जा रहे हैं।
विज्ञापन

शनिवार को सीमावर्ती समितियों की पड़ताल में अधिकांश समितियों पर ताले लटक रहे थे। जो खुली थीं वहां डाई खाद उपलब्ध नहीं थी। ऐसे में किसान समितियों पर खाद के लिए चक्कर काट रहे हैं। भारत नेपाल बॉर्डर से करीब चार किलोमीटर पहले स्थित नौतनवा ब्लॉक के साधन सहकारी समिति लिमिटेड मंगलापुर पर ताला लटका हुआ था। समिति के आसपास रहने वाले लोग बेचू, कन्हैया, रमेश ने कहा कि समिति बॉर्डर के करीब होने के कारण यहां से किसानों को आसानी से खाद नहीं मिल पाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

तस्कर जिम्मेदारों से सांठगांठ के माध्यम से खाद को नेपाल भेजते हैं। यह कोई नई बात नहीं है। क्योंकि खाद भेजने का धंधा पुराना है। तस्करी करने वालों में यहां के खुदरा विक्रेता भी शामिल होते हैं। जिम्मेदार लोग खाद का पूरा खेल खेलते हैं। कुछ ऐसा ही नजारा बॉर्डर से सटे साधन सहकारी समिति ठूठीबारी, गडौरा बाजार, बैठवलियां पर भी देखने को मिला।
अपर पुलिस अधीक्षक आतिश कुमार सिंह ने बताया कि सीमावर्ती क्षेत्र में सतर्कता बरती जा रही है। समय-समय पर बरामदगी की जाती है। अगर ऐसा है तो अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी।
-----------------------
बॉर्डर पर खाद की तस्करी रोकना है चुनौती
निचलौल क्षेत्र के रहने वाले किसान सुनील, संतोष, गुड्डू आदि ने कहा कि फसली सीजन आते ही बॉर्डर पर खाद की तस्करी बढ़ जाती है। नतीजतन, जिले के अन्य हिस्सों में खाद की किल्लत बढ़ जाती है। किसान एक-एक बोरी खाद के लिए परेशान होते हैं। प्रशासन की ओर से हर बार बाॅर्डर पर खाद की तस्करी रोकने के लिए टीम बनाई जाती है, लेकिन नियम का झोल ऐसा है कि तस्कर उसका लाभ उठाते हैं और उर्वरक बॉर्डर पार करके मुंहमांगी कीमत पर बेचकर मुनाफा कमाते हैं।

------------------
ऐसे काम करता है खाद तस्करी का पूरा नेटवर्क
जानकारी के मुताबिक जिला नेपाल बॉर्डर से सटा होने के कारण यहां तस्करों का बड़ा नेटवर्क काम करता है। ये सीजन के हिसाब से सामान की तस्करी करते हैं। अधिकांश सामान तस्करी के जरिए ही नेपाल पहुंचता है। जैसा कि मौजूदा समय में उर्वरक है। रबी के सीजन में नेपाल में डीएपी की मांग बढ़ जाती है। तस्कर कैरियर के माध्यम से खाद उठवाते हैं और गैर परंपरागत रास्तों का प्रयोग करके सीमा पार कर देते हैं। स्थिति यह होती है कि जिले में बुआई शुरू होने से पहले बड़ी मात्रा में खाद नेपाल पहुंच जाती है। इसके बाद किसानों को एक-एक बोरी के लिए समितियों और निजी दुकानों पर चक्कर काटने पड़ते हैं।
-------------------
यहां से होती है गड़बड़ी
किसानों का मानना है कि खाद की तस्करी इसलिए नहीं रुक पाती है, कि विभाग के नियम में ही झोल है। ई-पॉप मशीन से खाद खरीदने का नियम लागू किया गया है। किसान बताते हैं कि कोई भी व्यक्ति आधार कार्ड से अंगूठा लगाए तो उसे खाद दे दी जाती है। खाद किसे जरूरत है और कितने की जरूरत है, यह तय होता है खतौनी से, जिसकी मांग ही नहीं की जा रही है। सिर्फ आधार नंबर और किसान बताने वाले का नाम और गांव रजिस्टर में दर्ज कर लिया जाता है।

तस्कर इसी का लाभ उठाते हैं। मिश्रवलिया के इजहार ने बताया कि उन्होंने बीते बुधवार को एक दुकान से खाद ली और खतौनी नहीं मांगी गई। हालांकि, उनके पिता के नाम से खेत है। इन नियमों में झोल के कारण तस्कर एक दिन में सैकड़ों बोरी तक खाद खरीद कर लेते हैं। इसके बाद कैरियर के माध्यम से एक ठिकाने पर एकत्र करके रात के अंधेरे में बाॅर्डर पार पहुंचा देते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed