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Maharajganj News: पछुआ उड़ा रही खेतों की नमी, फसल सूखने का खतरा
Sun, 16 Feb 2025 12:35 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Sun, 16 Feb 2025 12:35 AM IST
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बागापार में तिलहन की खेती का देखभाल करता किसान।
महराजगंज। चार दिन से 15 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही पछुआ हवा मिट्टी की नमी सोख रही है। जिन हवाओं को मार्च में होली के आसपास प्रारंभ होना चाहिए वह फरवरी के दूसरे पखवाड़े में ही अपना असर दिखाने लगी हैं।
इन हवाओं के कारण गेहूं के साथ तिलहन की पैदावार प्रभावित होने का खतरा कृषि विज्ञानी बता रहे हैं, जिससे किसानों के होश उड़ गए हैं। जनपद में इस बार 2.45 लाख हेक्टेयर गेहूं तो 26760 हेक्टेयर तिलहन की फसल बोई गई है। समय पूर्व सूखने का खतरा बढ़ गया है। उर्वरक किल्लत के कारण इस बार गेहूं की बुआई देर से हुई।
अबतक के मौसम के हिसाब से तो फसल ठीक थी, लेकिन फरवरी शुरू होते ही पहले तापमान का तेजी से बढ़ना और अब पछुआ हवाओं का कहर खेत में खड़ी गेहूं व सरसों, तरोई की फसल को सुखाने पर आमादा है। कृषि विज्ञानियों का मानना है कि इन हवाओं के कारण जिन्होंने नवंबर में बुआई की उन्हें तो विशेष नुकसान नहीं होगा, लेकिन देर से बोई गई फसल में अभी पर्याप्त दाने नहीं पड़े हैं। ऐसे में अगर फसल सूखने लगी तो पैदावार का चौपट होना तय है। लेजार महदेवा के प्रगतिशील किसान अरविंद चौधरी का कहना है का उन्होंने नवंबर में गेहूं बोई, लेकिन अभी भरपूर दाना फसल में नहीं है। 10 दिन पहले तीसरी सिंचाई गेहूं में कराई है, लेकिन चार दिन से चल रही पछुआ ने खेत की पूरी नमी समाप्त कर दी।
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इन हवाओं के कारण गेहूं के साथ तिलहन की पैदावार प्रभावित होने का खतरा कृषि विज्ञानी बता रहे हैं, जिससे किसानों के होश उड़ गए हैं। जनपद में इस बार 2.45 लाख हेक्टेयर गेहूं तो 26760 हेक्टेयर तिलहन की फसल बोई गई है। समय पूर्व सूखने का खतरा बढ़ गया है। उर्वरक किल्लत के कारण इस बार गेहूं की बुआई देर से हुई।
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अबतक के मौसम के हिसाब से तो फसल ठीक थी, लेकिन फरवरी शुरू होते ही पहले तापमान का तेजी से बढ़ना और अब पछुआ हवाओं का कहर खेत में खड़ी गेहूं व सरसों, तरोई की फसल को सुखाने पर आमादा है। कृषि विज्ञानियों का मानना है कि इन हवाओं के कारण जिन्होंने नवंबर में बुआई की उन्हें तो विशेष नुकसान नहीं होगा, लेकिन देर से बोई गई फसल में अभी पर्याप्त दाने नहीं पड़े हैं। ऐसे में अगर फसल सूखने लगी तो पैदावार का चौपट होना तय है। लेजार महदेवा के प्रगतिशील किसान अरविंद चौधरी का कहना है का उन्होंने नवंबर में गेहूं बोई, लेकिन अभी भरपूर दाना फसल में नहीं है। 10 दिन पहले तीसरी सिंचाई गेहूं में कराई है, लेकिन चार दिन से चल रही पछुआ ने खेत की पूरी नमी समाप्त कर दी।
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