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Maharajganj News: साइबर फ्रॉड का बढ़ रहा खतरा, ठगी के शिकार हो रहे लोग
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लोग गंवा रहे जमा पूंजी, मोबाइल, इंटरनेट, ऑनलाइन बैंकिंग से काम हुआ आसान, चुनौतियां भी बढ़ीं
संतकबीरनगर। जनपद में साइबर अपराध के मामले बढ़ते जा रहे हैं। मोबाइल, इंटरनेट, ऑनलाइन बैंकिंग और सरकारी योजनाओं के डिजिटलीकरण ने लोगों की जिंदगी को आसान बनाया है, लेकिन इसके साथ साइबर ठगी जैसी चुनौतियों का भी खतरा बढ़ा है। जिले में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिन्होंने पुलिस और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। साइबर अपराध का खतरा बढ़ने से लोग अपनी जमा पूंजी भी गंवा रहे हैं।
अप्रैल-2026 में पुलिस ने पांच साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया। ये आरोपी लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का झांसा देकर उनके बैंक खाते और व्यक्तिगत जानकारी हासिल करते थे। पुलिस के अनुसार आरोपी फर्जी कॉल और संदेशों से लोगों को अपने जाल में फंसाते थे। पुलिस जांच में पता चला कि अपराधी ग्रामीण और कम जागरूक लोगों को निशाना बनाते थे। कई मामलों में पीड़ितों के खातों से हजारों रुपये निकाल लिए।
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बढ़ रहा साइबर अपराध का नेटवर्क
साइबर अपराधों की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए जिले में स्थायी साइबर थाना बनाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। लगभग 3.22 करोड़ रुपये की लागत से साइबर क्राइम थाना निर्माणाधीन है, जबकि फिलहाल इसका संचालन पुलिस लाइंस परिसर से किया जा रहा है। पुलिस समय-समय पर साइबर क्राइम थाने का निरीक्षण कर शिकायतों के त्वरित निस्तारण और तकनीकी संसाधनों को मजबूत करने पर जोर दे रही है।
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बदलता अपराध का तरीका
जानकारों का कहना है कि अब साइबर अपराध केवल बैंक कॉल तक सीमित नहीं हैं। वे फर्जी लिंक, केवाईसी अपडेट, लॉटरी, नौकरी, सरकारी सब्सिडी और डिजिटल अरेस्ट जैसे नए तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। जिससे साफ है कि साइबर अपराध संगठित नेटवर्क का रूप ले चुका है।
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आम लोगों के लिए खतरे की घंटी
साइबर अपराध के बढ़ते मामलों ने यह साबित कर दिया है कि साइबर अपराध केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रह गया है। गांवों और कस्बों तक इसकी पहुंच हो चुकी है। पुलिस लोगों से अपील कर रही है कि किसी भी अनजान कॉल, लिंक या ओटीपी साझा करने से बचें और साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 या साइबर पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।
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केस एक
28 जनवरी 2026 को महुली थाना क्षेत्र के निवासी निखिल ने इंटरनेट पर क्रेडिट कार्ड से पैसे ट्रांसफर करने का लिंक खोजा। ठगों ने कस्टमर केयर बनकर ओटीपी हासिल कर ली और 48,000 रुपये उड़ा दिए। महुली साइबर सेल ने तकनीकी समन्वय स्थापित कर पीड़ित के पूरे पैसे वापस दिलाए। जालसाजों के झांसे को निखिल समझ नहीं सके और ठगी का शिकार हो गए।-- -- -- -- -- --
केस दो
16 अप्रैल 2026 को धनघटा थाना और एसओजी की टीम ने राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल से मिली सूचना के आधार पर पांच शातिर ठगों को गिरफ्तार किया। यह गिरोह गरीब लोगों के नाम पर फर्जी बैंक खाते खुलवाकर ठगी का पैसा मंगाता था। पुलिस ने इनके पास से 37 बैंक खाते (जिसमें 5 करोड़ का संदिग्ध लेनदेन हुआ), 33 एटीएम कार्ड, 29 पासबुक और 24 सिम कार्ड बरामद किए।
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केस तीन
17 मई 2026 धर्मसिंहवा थाना क्षेत्र की रहने वाली एक महिला को ठग ने खुद को लखनऊ साइबर क्राइम का पुलिस अधिकारी बताकर डराया। जालसाज ने अश्लील वीडियो देखने के फर्जी आरोप में कार्रवाई की धमकी देकर महिला से 99,200 रुपये ऐंठ लिए। इस संबंध में साइबर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई।
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केस चार
25 मई 2026 खलीलाबाद में पुलिस और एसओजी टीम ने शिक्षक से लूट करने वाले वाले तीन शातिर अपराधियों को गिरफ्तार किया। गिरोह का सरगना संजीव कुमार छीने गए मोबाइल फोन और सिम कार्ड का इस्तेमाल आगे साइबर ठगी को अंजाम देने के लिए करता था।
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डिजिटल युग में साइबर सुरक्षा अब केवल तकनीकी विषय नहीं बल्कि सामाजिक आवश्यकता बन चुकी है। जिले में सामने आए मामलों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जागरूकता, सतर्कता और त्वरित पुलिस कार्रवाई ही साइबर अपराध के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार है। सतर्कता लोगों को ठगों से बचा सकती है।
-जय प्रकाश चौबे, प्रभारी, साइबर क्राइम थाना
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संतकबीरनगर। जनपद में साइबर अपराध के मामले बढ़ते जा रहे हैं। मोबाइल, इंटरनेट, ऑनलाइन बैंकिंग और सरकारी योजनाओं के डिजिटलीकरण ने लोगों की जिंदगी को आसान बनाया है, लेकिन इसके साथ साइबर ठगी जैसी चुनौतियों का भी खतरा बढ़ा है। जिले में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिन्होंने पुलिस और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। साइबर अपराध का खतरा बढ़ने से लोग अपनी जमा पूंजी भी गंवा रहे हैं।
अप्रैल-2026 में पुलिस ने पांच साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया। ये आरोपी लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का झांसा देकर उनके बैंक खाते और व्यक्तिगत जानकारी हासिल करते थे। पुलिस के अनुसार आरोपी फर्जी कॉल और संदेशों से लोगों को अपने जाल में फंसाते थे। पुलिस जांच में पता चला कि अपराधी ग्रामीण और कम जागरूक लोगों को निशाना बनाते थे। कई मामलों में पीड़ितों के खातों से हजारों रुपये निकाल लिए।
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बढ़ रहा साइबर अपराध का नेटवर्क
साइबर अपराधों की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए जिले में स्थायी साइबर थाना बनाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। लगभग 3.22 करोड़ रुपये की लागत से साइबर क्राइम थाना निर्माणाधीन है, जबकि फिलहाल इसका संचालन पुलिस लाइंस परिसर से किया जा रहा है। पुलिस समय-समय पर साइबर क्राइम थाने का निरीक्षण कर शिकायतों के त्वरित निस्तारण और तकनीकी संसाधनों को मजबूत करने पर जोर दे रही है।
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बदलता अपराध का तरीका
जानकारों का कहना है कि अब साइबर अपराध केवल बैंक कॉल तक सीमित नहीं हैं। वे फर्जी लिंक, केवाईसी अपडेट, लॉटरी, नौकरी, सरकारी सब्सिडी और डिजिटल अरेस्ट जैसे नए तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। जिससे साफ है कि साइबर अपराध संगठित नेटवर्क का रूप ले चुका है।
आम लोगों के लिए खतरे की घंटी
साइबर अपराध के बढ़ते मामलों ने यह साबित कर दिया है कि साइबर अपराध केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रह गया है। गांवों और कस्बों तक इसकी पहुंच हो चुकी है। पुलिस लोगों से अपील कर रही है कि किसी भी अनजान कॉल, लिंक या ओटीपी साझा करने से बचें और साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 या साइबर पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।
केस एक
28 जनवरी 2026 को महुली थाना क्षेत्र के निवासी निखिल ने इंटरनेट पर क्रेडिट कार्ड से पैसे ट्रांसफर करने का लिंक खोजा। ठगों ने कस्टमर केयर बनकर ओटीपी हासिल कर ली और 48,000 रुपये उड़ा दिए। महुली साइबर सेल ने तकनीकी समन्वय स्थापित कर पीड़ित के पूरे पैसे वापस दिलाए। जालसाजों के झांसे को निखिल समझ नहीं सके और ठगी का शिकार हो गए।
केस दो
16 अप्रैल 2026 को धनघटा थाना और एसओजी की टीम ने राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल से मिली सूचना के आधार पर पांच शातिर ठगों को गिरफ्तार किया। यह गिरोह गरीब लोगों के नाम पर फर्जी बैंक खाते खुलवाकर ठगी का पैसा मंगाता था। पुलिस ने इनके पास से 37 बैंक खाते (जिसमें 5 करोड़ का संदिग्ध लेनदेन हुआ), 33 एटीएम कार्ड, 29 पासबुक और 24 सिम कार्ड बरामद किए।
केस तीन
17 मई 2026 धर्मसिंहवा थाना क्षेत्र की रहने वाली एक महिला को ठग ने खुद को लखनऊ साइबर क्राइम का पुलिस अधिकारी बताकर डराया। जालसाज ने अश्लील वीडियो देखने के फर्जी आरोप में कार्रवाई की धमकी देकर महिला से 99,200 रुपये ऐंठ लिए। इस संबंध में साइबर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई।
केस चार
25 मई 2026 खलीलाबाद में पुलिस और एसओजी टीम ने शिक्षक से लूट करने वाले वाले तीन शातिर अपराधियों को गिरफ्तार किया। गिरोह का सरगना संजीव कुमार छीने गए मोबाइल फोन और सिम कार्ड का इस्तेमाल आगे साइबर ठगी को अंजाम देने के लिए करता था।
डिजिटल युग में साइबर सुरक्षा अब केवल तकनीकी विषय नहीं बल्कि सामाजिक आवश्यकता बन चुकी है। जिले में सामने आए मामलों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जागरूकता, सतर्कता और त्वरित पुलिस कार्रवाई ही साइबर अपराध के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार है। सतर्कता लोगों को ठगों से बचा सकती है।
-जय प्रकाश चौबे, प्रभारी, साइबर क्राइम थाना