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Maharajganj News: हजार रातों से बेहतर रात होती है लैलतुल कद्र की रात
Mon, 08 Apr 2024 12:19 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Mon, 08 Apr 2024 12:19 AM IST
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मिठौरा। लैलतुल-कद्र मुस्लिम समुदाय रमजान के पवित्र महीने की एक शुभ रात है। उस रात की विशेषता मान्यता के अनुसार कुरान की आयतों का पृथ्वी पर जिबरील नाम के फरिशते के ज़रिए पैगंबर मुहम्मद पर अवतरण (नाज़िल) होना शुरू हुआ था। कुरआन के अनुसार वो रमजान की कोई भी रात हो सकती है। हदीस में यह रात आम तौर से 27वें रमज़ान और आखरी 10 दिन में की भी मानी जाती है जिसमें मुसलमान जागते हैं और अपने गुनाहों के लिए अल्लाह से क्षमा (माफी) मांगते हैं।
सिंदुरिया मस्जिद के इमाम हाजी मौलाना मोहम्मद हुसैन ने बताया कि इस्लाम में इस रात को रुतबा हासिल हुआ है। क्योंकि इस में नुज़ूल क़ुरआन हुआ है, क़ुरआन-ए-मजीद किताबों में अजमत-ओ-शरफ वाली किताब है और पैगंबर पर ये किताब नाजिल हुई वो तमाम पैगंबरों पर अजमत-ओ-शरफ रखते हैं। रमज़ान की अंतिम दस रातों की वाली रातों (21,23,25,27,29) में से कोई एक रात है। मुसलमानों को चाहिए रमजान के महीने की अंतिम 26वीं रमजान से इसकी तलाश करनी चाहिए। यह हजार रातों से बेहतर रात होती है। मोमिनो को चाहिए कि रात को जाग कर सिर्फ अल्लाह को याद करें।
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सिंदुरिया मस्जिद के इमाम हाजी मौलाना मोहम्मद हुसैन ने बताया कि इस्लाम में इस रात को रुतबा हासिल हुआ है। क्योंकि इस में नुज़ूल क़ुरआन हुआ है, क़ुरआन-ए-मजीद किताबों में अजमत-ओ-शरफ वाली किताब है और पैगंबर पर ये किताब नाजिल हुई वो तमाम पैगंबरों पर अजमत-ओ-शरफ रखते हैं। रमज़ान की अंतिम दस रातों की वाली रातों (21,23,25,27,29) में से कोई एक रात है। मुसलमानों को चाहिए रमजान के महीने की अंतिम 26वीं रमजान से इसकी तलाश करनी चाहिए। यह हजार रातों से बेहतर रात होती है। मोमिनो को चाहिए कि रात को जाग कर सिर्फ अल्लाह को याद करें।
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