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Maharajganj News: नकली और नशीली दवाओं का सीमा तक फैला जाल

Tue, 19 Mar 2024 12:49 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज Updated Tue, 19 Mar 2024 12:49 AM IST
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The network of fake and narcotic drugs spread to the limit
पुलिस के साथ नशीली दवा के साथ पकड़ा गया आरोपी। फाइल फोटो
महराजगंज। नकली दवा ही नहीं नशीली दवाओं की बिक्री का जाल बॉर्डर तक फैला है। गुजरे वक्त में हुई कार्रवाई नशीली दवाओं के धंधे को प्रमाणित करती है। बरामदगी में कभी-कभार नकली दवाओं की बिक्री की भी पोल खुली है। कुछ दिन पहले हार्डवेयर की दुकान में नशीली दवाओं की खेप बरामद हुई थी। वहीं करीब एक साल पहले नकली दवा बरामद हुई है। लेबल बदल दिया गया था, जांच में मामले की जानकारी हुई थी।
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भारत-नेपाल सीमा से नशीली दवाओं की तस्करी का धंधा बढ़ रहा है। नशे की लत में फंसे युवाओं की बढ़ती मांग की वजह से दवाओं की खपत बढ़ी है। सीमावर्ती क्षेत्र में नशीली दवाओं की बरामदगी बयां कर रही है कि लाख जतन के बाद भी नशीली दवाओं की तस्करी थम नहीं रही है। अक्सर सीमावर्ती क्षेत्र में नेपाल ले जाने के पहले ही पकड़ ली जाती है। एक साल में दस से अधिक बार नशीली दवा के मामले में केस दर्ज हुआ है। दवा ले जाने वालों में ज्यादा स्वयं प्रयोग करने व बेचने वाले होते हैं।
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नेपाल में नशीली दवाओं की मांग ज्यादा है। सस्ती होने के कारण युवा इसका प्रयोग धड़ल्ले से करते हैं। फरवरी 2021 से अगस्त 2021 तक ही करीब 692 करोड़ की नशीली दवाएं पकड़ी जा चुकी हैं। ऐसे में जिले की सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। सूचना है कि बॉर्डर के दोनों तरफ के युवा तेजी से नशे के आदी हो रहे हैं। इसका फायदा इन ड्रग डीलरों को हो रहा है। अब सुरक्षाबलों ने इस पर शिकंजा कस दिया है। दवा नशीली दवाओं का धंधा पूरी तरह से अपना पांव फैला चुका है।
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नेटवर्क नेपाल में है और तस्करी भारत से हो रही है। इन दवाओं का धंधा नेपाल तक पहुंच चुका है। नेपाल में नशे की दवाइयों तथा इंजेक्शन की भारी खपत को देखते हुए एक बड़ा रैकेट इसकी तस्करी में जुटा है। नेपाल के पोखरा, नारायण घाट भैरहवा, बुटवल तक प्रतिबंधित दवाइयां पहुंच रही हैं।
बताया जा रहा है कि बड़े पैमाने पर नशीली दवाएं गोरखपुर से ही महाराजगंज भेजी जाती हैं। ये दवाएं नेपाल भेज दी जाती हैं। बाॅर्डर से लेकर बिहार तक नशीली दवाओं का नेटवर्क जुड़ा है।
समय-समय पर होती है बरामदगी
अगस्त 2021 को ठूठीबारी कोतवाली क्षेत्र के जमुई कला में पुलिस प्रशासन ने संयुक्त छापा मारकर करीब 686 करोड़ की नशीली दवाओं की खेप बरामद किया था। 14 अगस्त 2021 को सिसवा नहर रोड पर थाने के पीछे नशीली व नकली दवाओं की बड़ी खेप अधजली अवस्था में मिली थी। इसको लेकर भी खूब हाय तौबा मची थी, लेकिन हमेशा की तरफ फिर मामला शांत हो गया। इसके बाद ठूठीबारी कस्बे में जनवरी 2022 में पुलिस ने नशीली दवाओं के साथ चार धंधेबाजों को गिरफ्तार कर अपनी पीठ थपथाई थी। अभी ये मामले चल ही रहे थे कि 22 जुलाई 2022 को सिसवा बाजार के एक चर्चित मेडिकल स्टोर व उससे जुड़े एक ट्रांसपोर्ट के गोदाम से लाखों की नशीली दवाएं बरामद हुई थीं।
आयुर्वेद में भी नकली और मिलावटी दवाओं का बढ़ने लगा धंधा
महराजगंज। एलोपैथ ही नहीं आयुर्वेद में भी नकली और मिलावटी दवाओं का धंधा बढ़ने लगा है। प्रदेश में 10 ऐसी दवाएं चिह्नित हुई हैं, जो जांच में नकली मिलीं। इसके अलावा 22 ऐसी दवाएं भी हैं, जिनमें एलोपैथ के रसायनों का मिश्रण है। ये दवाएं हरियाणा, उत्तराखंड, पंजाब और मध्य प्रदेश में बनाई जा रही हैं। यूपी के आयुर्वेद निदेशालय ने ऐसी दवाओं के प्रदेश में भंडारण, परिवहन और बिक्री पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगा दिया है।

निदेशक डॉ. पीसी सक्सेना की तरफ से जारी आदेश में कहा गया है कि वर्ष 2022 से अब तक प्रदेश के विभिन्न जनपदों में लिए गए दवाओं के सैंपल, आम लोगों की शिकायत व अन्य माध्यमों से मिली जानकारी के बाद संदिग्ध बताए गए सैंपलों की प्रयोगशाला में विधिवत जांच कराई गई। जांच के आधार पर दवाओं में मिश्रित केमिकल की पहचान की गई। जिन 22 दवाओं में ऐलोपैथ के मिश्रण पाए गए हैं, उनमें से अधिकांश एलर्जी, बुखार, दर्द, शक्तिवर्द्धक और पेट से संबंधित हैं। इसके अलावा 10 दवाओं के नमूने जांच में फेल हो गए हैं। इनमें दाद-खाज खुजली, शक्तिवर्द्धक और पेट से संबंधित हैं। जो दवाएं नकली व अपमिश्रित पाई गई हैं, उन सभी को स्वास्थ्य के लिए खतरनाक बताया गया है। इसलिए इसके प्रदेश में बिक्री, परिवहन, भंडारण को प्रतिबंधित करते हुए निगरानी का निर्देश दिया गया है।
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