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Maharajganj News: भीड़ और सफर की थकान मेें ऊर्जा देता रहा महाकुंभ का उल्लास

Fri, 31 Jan 2025 01:13 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज Updated Fri, 31 Jan 2025 01:13 AM IST
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The joy of Maha Kumbh kept giving energy to the tiredness of crowd and travel.
महराजगंज। प्रयागराज से लौटने वालों का हाल जानने के लिए लोग इस कदर जुट रहे हैं जैसे वह लंबे समय बाद सात समुंदर पार से लौटे हों। गांव-मोहल्लों के लोग भी कुशलता पूछते नजर आ रहे हैं।
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महाकुंभ से लौटने वाले अधिकतर लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन ने तत्परता से कार्य न किया होता तो स्थिति और भयावह होती। श्रद्धालुओं का कहना है कि महाकुंभ में व्यवस्था पर्याप्त थी। भीड़ और सफर की मुश्किलों में महाकुंभ का उल्लास ऊर्जा देता रहा।
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शिक्षक कृष्णा कुमार महराजगंज के आजाद नगर के हैं। आठ बजे बृहस्पतिवार को पहुंचे। कहा कि महाकुंभ में पैदल इतना चलना पड़ा कि सांस फूल गई। संगम तट पर जहां स्नान करना था वहां तक लगभग 10 किमी कि दूरी पैदल ही तय करनी पड़ी। लौटते समय भी हम लोगों को मुख्य रास्ते की जगह ग्रामीण इलाकों से होकर बस डायवर्ट कर मुख्य रोड से भीड़ कम करने की कोशिश की गई, लेकिन इस मार्ग पर भी खूब ट्रैफिक मिली। 28 की रात जाते समय दोहरीघाट से ही जाम और जगह-जगह वाहन रोकने से पहुंचने में विलंब हुआ।
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प्रमोद कुमार भी इसी मोहल्ले के हैं और साथ ही लौटे हैं, लेकिन वह मौनी अमावस्या से एक दिन पहले ही गए थे। बताया कि भगदड़ के बाद कि स्थिति ऐसी थी कि सुरक्षित लोग भी बिछड़ गए। मुख्यालय ऑफिसर काॅलोनी के सामने चाय की दुकान चलाने वाले मोछू और शंकर अपनी पत्नी के साथ गए थे, लेकिन 29 की सुबह 8 बजे शंकर बिछड़ गए और दोनों महिलाओं के साथ मोछू अलग हो गए। शंकर रास्ते में मिले तो बताने लगे कि सुबह से ही तलाश कर रहा हूं, लेकिन तीनों नहीं मिल रहे। उन्हें फोन मिलाते-मिलाते मोबाइल डिस्चार्ज हो गया।
खेमपिपरा गांव की निर्मला ने बताया कि भगदड़ भोर होने के पहले हुई। सब लोग मुख्य तट पर नहाना चाह रहे थे, जबकि स्नान की सुविधा अन्य घाटों पर भी थी। हमारे गांव के लोगों ने भोर में स्नान करने की जगह सुबह आठ बजे का समय तय किया था, जिसके कारण वह भगदड़ से बच सके। सुबह 9 बजे के आसपास तक लगभग 900-1000 एंबुलेंस मेला क्षेत्र में घायलों को पहुंचाने में जुटी थीं, जबकि भगदड़ दो बजे ही हुई थी। इंतजाम बहुत था अन्यथा महिलाएं तो सर्वाधिक प्रभावित होतीं।
खेमपिपरा की चिंता देवी ने बताया कि भीड़ की अधिकता के कारण ही भगदड़ हुई। हम लोग भी उसी समय लगभग आधी रात के बाद ही नहाने निकले थे कि सुबह घर के लिए जल्दी निकल सकें, लेकिन भीड़ देखकर तट पर जाने की हिम्मत नहीं जुटा सकीं और लोगों के साथ दूसरी तरफ बढ़कर इंतजार मुनासिब समझा। इसी बीच भगदड़ का शोर हुआ, जिसके बाद तट से लोग गिरते-पड़ते भागते दिखे।

हम लोग दूर थे और आसपास फोर्स और स्वयंसेवक भी थे जिससे भागती भीड़ ने दूसरी तरफ का रुख किया। महाकुंभ में इंतजाम बेहतर न होते तो लोग रात में स्नान के लिए कत्तई निकलने का साहस नहीं जुटा पाते।
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