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Maharajganj News: पिता-पुत्र का शव घर पहुंचते ही चीत्कार उठे परिजन
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छोटे बेटे ने दी मुखाग्नि,गांव में पसरा मातम, अमेरिका में बड़ा बेटा था इंजीनियरिंग
नोएडा जेवर थाना क्षेत्र में रविवार देर रात सड़क हादसे में पिता-पुत्र सहित चार लोगों की हो गई थी मौत
महराजगंज। नोएडा जेवर थाना क्षेत्र में रविवार देर रात सड़क हादसे में सवरेजी गांव निवासी पिता-पुत्र सहित चार लोगों की मौत के बाद मंगलवार को रितेश पांडेय, अभिसार पांडेय और विकास कश्यप के शवों का अंतिम संस्कार कर दिया गया। सवरेजी गांव में पिता-पुत्र का शव पहुंचते ही परिजन चित्कार उठे। परिजन व ग्रामीण रितेश के छोटे बेटे आयुष और बेटी पुष्पांजलि को संभालने में जुटे रहे।
जानकारी के अनुसार, नोएडा के जेवर में सवरेजी गांव निवासी अधिवक्ता रितेश पांडेय (50) और उनके बेटे अभिसार पांडेय (27) सहित चार लोगों की मौत हो गई। मरने वाले दो अन्य में अभिसार के मित्र विकास कश्यप और कार चालक शामिल थे। चारों रविवार को 12 बजे दिन में एक ही वाहन से दिल्ली के लिए निकले थे। जेवर थाना क्षेत्र में हुए हादसे के बाद परिवारों में मातम छा गया।
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मंगलवार दोपहर करीब दो बजे पोस्टमार्टम के बाद रितेश और अभिसार के शव एंबुलेंस से सवरेजी गांव पहुंचे। शव पहुंचते ही परिजन बिलख पड़े। जानकारी होने पर ग्रामीणों की भीड़ घर पर जुट गई। बारिश के बावजूद लोग अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे, गांव में शोक का माहौल रहा। मंगलवार को बारिश के बीच पिता-पुत्र का अंतिम संस्कार किया गया। त्रिमुहानी घाट पर छोटे बेटे आयुष पांडेय ने पिता रितेश पांडेय को मुखाग्नि दी। पिता-पुत्र की मौत से सवरेजी गांव में शोक की लहर रही।
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2004 में दोनों बेटे को लेकर दिल्ली चले गए थे रितेश
रितेश पांडेय करीब वर्ष 2004 में अपने दोनों बेटों के साथ दिल्ली चले गए थे। इससे पहले वह शिवनगर वार्ड में वर्ष 1993 से 2004 तक स्वामी विवेकानंद कॉन्वेंट स्कूल चलाते थे। दिल्ली जाने के बाद स्कूल बंद हो गया। वर्ष 2005 में कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता के तौर पर प्रैक्टिस शुरू की।
परिजनों के अनुसार रितेश की पत्नी की वर्ष 2002 में हार्ट अटैक से मौत हो गई थी। इसके बाद उन्होंने दोनों बेटों की जिम्मेदारी संभाली। बड़े बेटे अभिसार ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की और करीब डेढ़ वर्ष पहले अमेरिका में नौकरी शुरू की थी। छोटा बेटा आयुष इंजीनियरिंग की तैयारी कर रहा है। हादसे के बाद आयुष सदमे में है। परिजनों के अनुसार वह लोगों को पहचान नहीं पा रहा है।
गांव से बना रहा जुड़ाव
रितेश के मामा के बेटे बृहस्पति मिश्रा निवासी लक्ष्मीगंज, बड़हरा बाबू मौनही, कुशीनगर ने बताया कि दिल्ली रहने के बावजूद रितेश का गांव से संपर्क बना रहा। पहले वह छह महीने में गांव आते थे, लेकिन पिछले एक वर्ष से दो-चार महीने में गांव आने लगे थे। ग्रामीणों से मिलना-जुलना उनका नियमित क्रम था।
ग्राम प्रधान अवधेश पांडेय, धम्म प्रकाश, धीरेंद्र मिश्रा, पंकज, सुनील पटेल, छोटू और सुरेश पांडेय ने बताया कि रितेश और अभिसार का स्वभाव मिलनसार था। दोनों गांव आने पर लोगों से मुलाकात करते थे।
रितेश के पिता जितेंद्र पांडेय करीब 90 वर्ष के हैं और बीमारी के कारण बिस्तर पर हैं। बेटे और पोते की मौत की सूचना से परिवार के सामने एक और मुश्किल खड़ी हो गई। रितेश के चचेरे भाई राजकुमार दिल्ली गए थे और पोस्टमार्टम के बाद शव लेकर गांव पहुंचे।
डेढ़ माह के बेटे को छोड़ हमेशा के लिए चला गया विकास, घर में पसरा मातम
- दो माह बाद दिल्ली लौटे विकास की हादसे में मौत
-घर पहुंचा शव तो मातम में बदल गईं खुशियां
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। नोएडा के जेवर थाना क्षेत्र में रविवार देर रात हुए सड़क हादसे में जयप्रकाश नगर निवासी इंजीनियर विकास कश्यप (34) की मौत के बाद मंगलवार को उनका शव घर पहुंचा। सुबह करीब 10 बजे शव पहुंचते ही परिवार में चीख-पुकार मच गया। पत्नी, मां और अन्य परिजनों के विलाप से माहौल गमगीन हो गया। मोहल्ले के लोगों की आंखें भी नम हो गईं। इसके बाद अमरूतिया वार्ड स्थित मुक्तिधाम में अंतिम संस्कार किया गया। मृतक के पिता सत्यप्रकाश कश्यप ने छोटे बेटे को मुखाग्नि दी।
मोहल्ले के सूरज मद्धेशिया, संदीप निगम, सिद्धेश्वर सिंह और बंटी प्रजापत ने बताया कि विकास बेहद मिलनसार और व्यवहार कुशल व्यक्ति थे। दिल्ली से जब भी घर आते, मोहल्ले के लोगों से मिलते-जुलते थे। छोटे बच्चों को पढ़ाई और करियर को लेकर जानकारी भी देते थे। करीब दो माह पहले वह दिल्ली से घर आए थे। इस दौरान बेटे के कथा कार्यक्रम और रक्षाबंधन के लिए घर पर रुके। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद उन्हें 31 अगस्त को दिल्ली में निजी कंपनी की बैठक में शामिल होना था। वह इंजीनियर के पद पर कार्यरत थे और पिछले दो माह से वर्क फ्रॉम होम कर रहे थे।
पीछे छोड़ गए पत्नी और दो मासूम को विकास
विकास के पीछे पत्नी मोहिनी, तीन वर्षीय बेटी वृंदा और डेढ़ माह का बेटा वासु रह गए हैं। 20 अगस्त को बेटे के कथा सहित अन्य कार्यक्रम धूमधाम से हुए थे। पत्नी मोहिनी ने बताया कि विकास बच्चों को बेहद दुलार करते थे। बेटे के कार्यक्रम की तैयारियों में भी उन्होंने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। परिवार को क्या पता था कि कुछ ही दिनों बाद खुशियां मातम में बदल जाएंगी,इतना कह कर फफक कर रो पड़ी।
परिवार की जिम्मेदारियों के लिए गया था दिल्ली
मृतक की मां राजकुमारी ने बताया कि विकास परिवार की जिम्मेदारियों को समझते हुए दिल्ली में नौकरी करते थे। जब भी घर आते, पूरा परिवार साथ बैठकर खुशियां मनाता था। बड़े भाई विशाल कश्यप नगर में निजी पैथोलॉजी संचालित करते हैं। दोनों भाई मिलकर घर का खर्च चलाते थे। विशाल ने बताया कि छोटा भाई होने के बावजूद विकास हमेशा परिवार की चिंता करता था। कार्यालय के काम से समय मिलते ही फोन कर घर का हाल पूछता था।