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Maharajganj News: देश की सुरक्षा में लगे जवानों के परिजनों को फक्र, दुश्मन को मुहंतोड़ जवाब दे रहे
Sat, 10 May 2025 01:07 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Sat, 10 May 2025 01:07 AM IST
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अग्निवीर आर्मी कोर में भटिण्डा पंजाब में तैनात जीवन अधिकारी के परिजन आपस में बातचीत करते हुए।
महराजगंज। भारत पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए देश की सुरक्षा में जवान डटे हैं। उनके परिजनों को फक्र है कि देश की सेवा में उनका बेटा है। परिजनों से हर रोज बातचीत होती है। जब से तनाव बढ़ा है, तब से आसपास के लोग हालचाल जानने आते हैं।
जवानों के परिजनों का कहना है कि दुश्मन को मुंहतोड़ जवाब भारतीय सेना दे रही है। जिले में अलग-अलग क्षेत्र में रहने वाले सेना के जवान भारतीय सीमा की सुरक्षा में लगे हैं। जवानों के घर के लोगों से बातचीत की गई तो सभी ने एक स्वर में कहा कि देश की सेवा करना गर्व की बात है। टीवी के जरिए रोजाना की हलचल के बारे में जानकारी हो जाती है। फोन से भी कभी-कभार बातचीत होती रहती है।
नौतनवा कस्बे के सिद्धार्थनगर वार्ड के रहने वाले गोरखा रेजिमेंट में लांस नायक श्याम थापा राजस्थान में तैनात हैं। इनके बड़े भाई पूरन बहादुर थापा कारगिल युद्ध में शहीद हो गए थे। मझले भाई अशोक थापा परिवार के साथ घर पर रहते हैं। श्याम थापा की पत्नी श्वेता थापा घर पर रहती हैं। उन्होंने बताया कि पति को समय मिलता है तो फोन करते हैं। बेटी संस्कृति थापा का हालचाल पूछने के साथ ही बात भी करते हैं।
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भाई अशोक थापा की पत्नी बसंती थापा बेटा अंश थापा तथा बेटी आयुषी थापा घर भी रहते हैं। अशोक थापा ने बताया कि उनके छोटे भाई श्याम थापा दो माह पहले ड्यूटी पर गए हैं। 15 दिन पहले मोबाइल पर बात हुई थी। भाभी बसंती थापा ने कहा कि पूरे परिवार को गर्व है। सेना दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब दे रही है।
उधर, नौतनवा कस्बे के महेंद्र नगर वार्ड निवासी जीवन अधिकारी अग्निवीर में आर्मी कोर में सिपाही पद पर भटिंडा पंजाब में तैनात हैं। तीन माह पूर्व घर से ड्यूटी पर गए हैं। उनकी मां नंदकला अधिकारी ने बताया कि दो दिन पहले मोबाइल से बात हुई थी। बेटा देश की सेवा में लगा है। इससे बड़ी बात क्या हो सकती है।
फोन पर बात होती है तो उसका उत्साहवर्धन करती हूं। घर पर उनके पिता लोकराज अधिकारी, मां नंदकला, भाई विष्णु अधिकारी, कृष्ण अधिकारी, लालू अधिकारी, भाभी पार्वती अधिकारी आपस में चर्चा कर रहे थे। रात में पूरा परिवार एक साथ टीवी देखकर सेना की कार्रवाई के बारे में जानकारी लेता है।
पाकिस्तान सीमा पर डटा बेटा, रातभर जगा पूरा परिवार
नौतनवा। वायु सेना में तैनात जवान रातभर पाकिस्तान सीमा पर डटे हैं। वहीं नौतनवा कस्बे में उनका पूरा परिजन रात में जगकर टीवी पर अपडेट लेता रहा। नौतनवा के रतनपुर गांव के वायु सेना में तैनात जवान पाकिस्तान के दुश्मनों के छक्के छुड़ा रहा है। उनके पिता डाॅ. एसके त्रिपाठी रतनपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात हैं। उन्होंने बताया कि राजस्थान के सीमावर्ती वायुसेना के सैनिक ड्रोन हमले को विफल कर दिए। इसकी सूचना जैसे ही समाचार चैनल पर प्रसारित हुई तो टीवी देखकर जानकारी ली गई। बेटे का मोबाइल फोन रातभर बंद मिला। शुक्रवार सुबह सात बजे जब बेटा ड्यूटी से आया तो फोन पर अपने ठीक होने और चिंता न करने की बात कही। तब जाकर परिवार को संतोष हुआ। पिता डाॅ. सत्येंद्र त्रिपाठी का कहना है कि यह मेरे व पूरे परिवार के लिए गर्व की बात है कि मेरा बेटा देश की उस समय सेवा कर रहा है जब देश को वीर जवानों की वास्तव में जरूरत है। संवाद
मैं बहादुर बेटों की मां हूं, देश के सबकुछ कुर्बान करने की हिम्मत रखती हूं
महराजगंज। मैं बहादुर बेटों की मां हूं, देश के सबकुछ कुर्बान करने की हिम्मत रखती हूं। बेटा देश की सेवा में है। जब से सुना है कि पाकिस्तान से भारत का तनाव बढ़ा है, तब से थोड़ी चिंता होती है, लेकिन अपने बहादूर बेटों पर फक्र है। वे दुश्मनों काे मुहंतोड़ जवाब देंगे।
यह कहना है बशीरुन निशा का। यह सिसवा नगर पालिका के असमनछपरा मोहल्ले की रहने वाली हैं। इनके दो बेटे सेना में कार्यरत हैं। इन दिनों आसपास के लोग इस परिवार का हालचाल जानने आते हैं। बदरून निशा ने बताया कि मां हूं, फिर भी अपने बेटों पर गर्व है की वे भारत मां के सेवा में लगे हैं। जब बेटों का फोन आता है तो वो अपने पिता से कहते हैं, अम्मा को टीवी पर समाचार सुनने मत दिया करें, वह बीपी की मरीज हैं। मैं बहादुर बेटों की मां हूं, मुझे क्या डर है।
सबसे बड़े बेटे अकरम अली भारतीय सेना के इंजीनियरिंग कोर दिल्ली में हैं। ये 2002 में सेना में भर्ती हुए थे। यह 15 दिन पहले छुट्टी बीता कर गए हैं। दूसरे बेटे अमजद अली गार्ड्स कोर सिक्किम में कार्यरत है। इनकी नियुक्ति 2003 में भारतीय सेना में हुई थी। दो माह पहले छुट्टी पर घर आये थे। दो छोटे बेटे अशरफ अली और अख्तर अली शिक्षा विभाग में कार्यरत हैं।
पिता अली हुसैन का कहना है की रोजाना बड़े बेटे से बातचीत होती है, दूसरा बेटा पहाड़ी क्षेत्र में है तो वहां नेटवर्क की समस्या होती है, पर दो तीन दिन में उनसे भी बात हो जाती है। मेरा सौभाग्य है कि मेरे दो बेटे मुल्क की हिफाजत के में लगे हैं। मुझे नाज है। अगर जरूरत पड़ी तो मैं अपने दोनों शिक्षक बेटों को भी देश सेवा के लिए समर्पित कर दूंगा।
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जवानों के परिजनों का कहना है कि दुश्मन को मुंहतोड़ जवाब भारतीय सेना दे रही है। जिले में अलग-अलग क्षेत्र में रहने वाले सेना के जवान भारतीय सीमा की सुरक्षा में लगे हैं। जवानों के घर के लोगों से बातचीत की गई तो सभी ने एक स्वर में कहा कि देश की सेवा करना गर्व की बात है। टीवी के जरिए रोजाना की हलचल के बारे में जानकारी हो जाती है। फोन से भी कभी-कभार बातचीत होती रहती है।
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नौतनवा कस्बे के सिद्धार्थनगर वार्ड के रहने वाले गोरखा रेजिमेंट में लांस नायक श्याम थापा राजस्थान में तैनात हैं। इनके बड़े भाई पूरन बहादुर थापा कारगिल युद्ध में शहीद हो गए थे। मझले भाई अशोक थापा परिवार के साथ घर पर रहते हैं। श्याम थापा की पत्नी श्वेता थापा घर पर रहती हैं। उन्होंने बताया कि पति को समय मिलता है तो फोन करते हैं। बेटी संस्कृति थापा का हालचाल पूछने के साथ ही बात भी करते हैं।
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भाई अशोक थापा की पत्नी बसंती थापा बेटा अंश थापा तथा बेटी आयुषी थापा घर भी रहते हैं। अशोक थापा ने बताया कि उनके छोटे भाई श्याम थापा दो माह पहले ड्यूटी पर गए हैं। 15 दिन पहले मोबाइल पर बात हुई थी। भाभी बसंती थापा ने कहा कि पूरे परिवार को गर्व है। सेना दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब दे रही है।
उधर, नौतनवा कस्बे के महेंद्र नगर वार्ड निवासी जीवन अधिकारी अग्निवीर में आर्मी कोर में सिपाही पद पर भटिंडा पंजाब में तैनात हैं। तीन माह पूर्व घर से ड्यूटी पर गए हैं। उनकी मां नंदकला अधिकारी ने बताया कि दो दिन पहले मोबाइल से बात हुई थी। बेटा देश की सेवा में लगा है। इससे बड़ी बात क्या हो सकती है।
फोन पर बात होती है तो उसका उत्साहवर्धन करती हूं। घर पर उनके पिता लोकराज अधिकारी, मां नंदकला, भाई विष्णु अधिकारी, कृष्ण अधिकारी, लालू अधिकारी, भाभी पार्वती अधिकारी आपस में चर्चा कर रहे थे। रात में पूरा परिवार एक साथ टीवी देखकर सेना की कार्रवाई के बारे में जानकारी लेता है।
पाकिस्तान सीमा पर डटा बेटा, रातभर जगा पूरा परिवार
नौतनवा। वायु सेना में तैनात जवान रातभर पाकिस्तान सीमा पर डटे हैं। वहीं नौतनवा कस्बे में उनका पूरा परिजन रात में जगकर टीवी पर अपडेट लेता रहा। नौतनवा के रतनपुर गांव के वायु सेना में तैनात जवान पाकिस्तान के दुश्मनों के छक्के छुड़ा रहा है। उनके पिता डाॅ. एसके त्रिपाठी रतनपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात हैं। उन्होंने बताया कि राजस्थान के सीमावर्ती वायुसेना के सैनिक ड्रोन हमले को विफल कर दिए। इसकी सूचना जैसे ही समाचार चैनल पर प्रसारित हुई तो टीवी देखकर जानकारी ली गई। बेटे का मोबाइल फोन रातभर बंद मिला। शुक्रवार सुबह सात बजे जब बेटा ड्यूटी से आया तो फोन पर अपने ठीक होने और चिंता न करने की बात कही। तब जाकर परिवार को संतोष हुआ। पिता डाॅ. सत्येंद्र त्रिपाठी का कहना है कि यह मेरे व पूरे परिवार के लिए गर्व की बात है कि मेरा बेटा देश की उस समय सेवा कर रहा है जब देश को वीर जवानों की वास्तव में जरूरत है। संवाद
मैं बहादुर बेटों की मां हूं, देश के सबकुछ कुर्बान करने की हिम्मत रखती हूं
महराजगंज। मैं बहादुर बेटों की मां हूं, देश के सबकुछ कुर्बान करने की हिम्मत रखती हूं। बेटा देश की सेवा में है। जब से सुना है कि पाकिस्तान से भारत का तनाव बढ़ा है, तब से थोड़ी चिंता होती है, लेकिन अपने बहादूर बेटों पर फक्र है। वे दुश्मनों काे मुहंतोड़ जवाब देंगे।
यह कहना है बशीरुन निशा का। यह सिसवा नगर पालिका के असमनछपरा मोहल्ले की रहने वाली हैं। इनके दो बेटे सेना में कार्यरत हैं। इन दिनों आसपास के लोग इस परिवार का हालचाल जानने आते हैं। बदरून निशा ने बताया कि मां हूं, फिर भी अपने बेटों पर गर्व है की वे भारत मां के सेवा में लगे हैं। जब बेटों का फोन आता है तो वो अपने पिता से कहते हैं, अम्मा को टीवी पर समाचार सुनने मत दिया करें, वह बीपी की मरीज हैं। मैं बहादुर बेटों की मां हूं, मुझे क्या डर है।
सबसे बड़े बेटे अकरम अली भारतीय सेना के इंजीनियरिंग कोर दिल्ली में हैं। ये 2002 में सेना में भर्ती हुए थे। यह 15 दिन पहले छुट्टी बीता कर गए हैं। दूसरे बेटे अमजद अली गार्ड्स कोर सिक्किम में कार्यरत है। इनकी नियुक्ति 2003 में भारतीय सेना में हुई थी। दो माह पहले छुट्टी पर घर आये थे। दो छोटे बेटे अशरफ अली और अख्तर अली शिक्षा विभाग में कार्यरत हैं।
पिता अली हुसैन का कहना है की रोजाना बड़े बेटे से बातचीत होती है, दूसरा बेटा पहाड़ी क्षेत्र में है तो वहां नेटवर्क की समस्या होती है, पर दो तीन दिन में उनसे भी बात हो जाती है। मेरा सौभाग्य है कि मेरे दो बेटे मुल्क की हिफाजत के में लगे हैं। मुझे नाज है। अगर जरूरत पड़ी तो मैं अपने दोनों शिक्षक बेटों को भी देश सेवा के लिए समर्पित कर दूंगा।