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Maharajganj News: चंद सेकेंड हिली धरती तो दहशत में कटी पूरी रात, सड़क पर गुजरा वक्त
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चंद सेकेंड हिली धरती तो दहशत में कटी पूरी रात, सड़क पर गुजरा वक्त
कुछ घरों में शीशे चटक गए और दीवारों में दरारें आ गईं, कुर्सियां, बेड और घरों के दरवाजे हिलने लगे, लोग भाग कर घरों से बाहर निकले
जिला अस्पताल में मिचली व चक्कर आने से पीड़ित लोग इलाज कराने पहुंचे
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। शुक्रवार की देर रात भूकंप के तेज झटकों से शहर से लेकर गांव तक लोग सहम गए। 10 सेकेंड में दो बार आए भूकंप से लोग हिल गए और घरों व होटलों से बाहर निकल आए। चंद सेकेंड धरती हिली तो दहशत में पूरी रात लोगों को गुजारनी पड़ी। शहर से लेकर गांव तक सड़कों पर लोग निकल आए। जिला अस्पताल में मरीज ट्रामा सेंटर के बाहर आ गए। पेड़ के नीचे तीमारदारों ने रात गुजारी। शनिवार को दिन भर भूकंप की चर्चा होती रही। जिला अस्पताल में मिचली व चक्कर आने से पीड़ित लोग इलाज कराने पहुंचे।
रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 5.6 मापी गई। गनीमत रही कि किसी तरह के जानमाल के नुकसान नहीं हुआ। हालांकि, कुछ घरों में शीशे चटक गए और दीवारों में दरारें आ गईं। जिले में रात करीब 11:32 बजे भूकंप का पहला झटका महसूस किया गया। इसके तीन सेकंड बाद दूसरा तेज झटका आया। इसके बाद लोगों को भूकंप आने का अहसास हुआ। कुर्सियां, बेड और घरों के दरवाजे हिलने लगे। इसके बाद लोग घरों से बाहर आ गए।
भूकंप के झटके की दहशत लोगों में इस कदर देखने को मिली कि परिवार के साथ घंटों बाहर सड़क पर टहलते रहे। घर में जाने की हिम्मत नहीं हुई। देखते ही देखते शहर के सभी इलाकों में लोग सड़कों पर आ गए। रात करीब डेढ़ बजे तक लोग सड़कों पर देखे गए। भूकंप की दहशत सबसे ज्यादा बहुमंजिली इमारतों में रहने वालों में देखी गई। सक्सेना चौक पर पोस्ट ऑफिस मुहल्ले के लोग आ गए। सदर विधायक जयमंगल कन्नौजिया भी लोगों के साथ बाहर आकर बैठे रहे। सभी के चेहरे पर दहशत दिख रही थी। गांधी नगर, सरोजनी नगर, मऊपाकड, जय प्रकाश नगर, पडरी समेत अन्य मुहल्लों में लोग बाहर आए। बच्चों को लेकर लोग सड़क पर खुले स्थानों की दौड़े।
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अपनों की खैरियत जानने के बाद लोगों ने चैन की सांस ली
भूकंप के दो झटके पर पहले तो लोग खुद सुरक्षित स्थान पर पहुंचे, फिर परिचित और रिश्तेदारों का फोन करने की होड़ दिखी। संदेश के टोन फोन पर लगातार बजते रहे। अपनों की खैरियत जानने के बाद लोगों ने चैन की सांस ली। जिन घरों में बुजुर्ग चलने में असमर्थ रहे, वहां का दृश्य बेचैन करने वाला दिखा। परिजन मदद के लिए पड़ोसियों से भी गुहार लगाते रहे। पड़ोसियों ने ऐसे लोगों की खूब मदद की।
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भूंकप आने के पहले कुत्ते अचानक भौंकने लगे
भूकंप आने से चंद मिनट पहले ही जानवरों की आवाज से पूरा इलाका गूंज गया था। शिवपुरी के अमित दुबे ने बताया कि वह खाना खाने के बाद घर के बाहर टहलने निकले थे। अचानक कुत्ते भौंकने लगे। पहले तो समझ में नहीं आया कि उन्हें ऐसा क्या हो गया, लेकिन जब भूकंप आया तो पुरखों की बात याद आ गई कि कोई भी अनहोनी की जानकारी जानवरों को पहले हो जाती है।
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इंटरनेट मीडिया पर भी हलचल बढ़ गई
भूकंप आने के बाद इंटरनेट मीडिया पर भी हलचल बढ़ गई। कुछ लोग भूकंप के झटकों को काफी तेज बता रहे थे। कुछ का कहना था कि उन्हें पता ही नहीं चला कि भूकंप आया है। कई लोगों ने ट्वीट करके सवाल भी किया क्या आपने भूकंप के झटके महसूस किए हैं।
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भूकंप के झटके से मकान में दरार
खनुआ। भारत नेपाल सीमावर्ती गांव हरदीडाली चौराहे पर शुक्रवार रात भूकंप के झटके से दो घरों में की दीवारों में दरार आ गई। संतोष चौधरी ने बताया कि दो मंजिलें मकान में दरार आ गई है। अनिल विश्वकर्मा ने बताया कि मकान में दरार आई है। डर लगा रहा है कि कहीं तेज भूकंप आने पर घर न गिर जाय।
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दहशत में रहे लोग...कहीं भूंकप फिर न आ जाए
-- जिला अस्पताल के ट्रामा सेंटर में भर्ती मरीज सत्येंद्र पटेल निवासी गौनरिया बाबू ,शैलेश गुप्ता निवासी दरौली, लवकुश निवासी चौक, अंजू सिंदुरिया भूकंप आने के बाद बाहर बैठे दिखे। इन सभी ने कहा कि डर लग रहा है कि कहीं भूंकप फिर न आ जाए। पूरी रात जाग कर गुजार दी।
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रात में नींद नहीं आई। डर लग रहा था कि कहीं भूकंप फिर न आ जाए। झटका महसूस होते ही घर से बाहर आ गई। काफी देर तक चहारदीवारी के अंदर टहल कर वक्त गुजारना पड़ा
प्रतिभा सिंह, सक्सेना नगर
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फोटो
भूंकप के झटके आने के पहले किचन में पानी लेने गई तो स्टैंड में रखा गिलास अचानक गिर गया। चक्कर आने लगा। शनिवार को दिन भर चक्कर आने जैसा महसूस हो रहा था।
प्रमिला शुक्ला, सुभाष नगर
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डर लगा रहा है। रात में तो नींद ही नहीं आ रही थी। सोने की कोशिश करने पर ऐसा लग रहा था कि मानों फिर से भूंकप आ जाएगा। झटका कम रहने के कारण कोई नुकसान नहीं हुआ है।
डॉ. घनश्याम शर्मा, सेवानिवृत पूर्व विभागाध्यक्ष, राजनीति विज्ञान
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इस बार भूंकप का झटका चंद सेकेंड रहा। पंखा हिलते हुए देखा तो समझ में आ गया कि भूकंप आया है। बाहर निकला तो तमाम लोग बाहर खड़े होकर आपस में चर्चा कर रहे थे।
डॉ. हेमंत श्रीवास्तव, वरिष्ठ होम्योपैथ चिकित्सक
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पृथ्वी के अंदर 7 प्लेट्स हैं, जो लगातार घूमती रहती हैं। जहां ये प्लेट्स ज्यादा टकराती हैं, वह जोन फॉल्ट लाइन कहलाता है। बार-बार टकराने से प्लेट्स के कोने मुड़ते हैं। जब ज्यादा दबाव बनता है तो प्लेटें टूटने लगती हैं। नीचे की ऊर्जा बाहर आने का रास्ता खोजती हैं और डिस्टर्बेंस के बाद भूकंप आता है। भूकंप का केंद्र उस स्थान को कहते हैं जिसके ठीक नीचे प्लेटों में हलचल से भूगर्भीय ऊर्जा निकलती है। इस स्थान पर भूकंप का कंपन ज्यादा होता है। कंपन की आवृत्ति ज्यों-ज्यों दूर होती जाती हैं, इसका प्रभाव कम होता जाता है। यदि रिक्टर स्केल पर 7 या इससे अधिक की तीव्रता वाला भूकंप है तो आसपास के 40 किमी के दायरे में झटका तेज होता है।
-- दिवाकर सिंह, असिस्टेंट प्रोफेसर, भूगोल विभाग, जवाहरलाल नेहरू स्मारक पीजी कॉलेज
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6.4 तीव्रता का भूकंप आया, केंद्र जाजरकोट के रामीडांडा में था
महराजगंज। नेपाल में पार्वती जिले के सुदूर जज्जरकोट जिले में देर रात को आए भूकंप ने काफी क्षति पहुंचाया है। मकानों के गिरने से लोग उसमें दबे हुए हैं। नेपाली सेना दर्जनों हेलिकाप्टरों से बचाव कार्य में जुटी है। जाजरकोट के पुलिस उपाधीक्षक संतोष रोका के अनुसार, नलगढ़ नगर पालिका की उपप्रमुख सरिता सिंह की भी भूकंप में मौत हो गई। भूकंप के कारण यहां बिजली सेवा बाधित हो गई है। सड़क परिचालन की समस्या के कारण घायलों का बचाव मुश्किल हो रहा है। शुक्रवार रात 11:47 बजे 6.4 तीव्रता का भूकंप आया, जिसका केंद्र जाजरकोट के रामीडांडा था।
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नेपाल के भैरहवा में भूकंप के बाद दिल का दौरा पड़ने से एक की मौत
तराई क्षेत्र में भूकंप के असर से सहमे लोग, भारतीय क्षेत्र के रिश्तेदारों ने ली जानकारी
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। नेपाल में भूकंप का असर तराई क्षेत्र में कम रहा। भारतीय सीमा से सटे जिलों में धरती हिली लेकिन मकान नहीं गिरे। सीमावर्ती क्षेत्र में भारतीय लोगों की रिश्तेदारी है, भूंकप के बाद सभी हालचाल लेने में जुटे गए। भैरहवा में एक व्यक्ति की मौत दिल का दौरा पड़ने के कारण हो गई। दिन भर लोग भूकंप की आशंका से सहमे रहे।
शुक्रवार रात में भूकंप आने के बाद भैरहवा में हृदयाघात से एक व्यक्ति की मौत हो गई। भैरहवा भीम अस्पताल में भर्ती 68 वर्षीय राधेश्याम वर्मा को दिल का दौरा पड़ने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वहां से उनको भैरहवा स्थित यूनिवर्सल कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेज रेफर कर दिया गया, जहां उनकी मौत हो गई। परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है। यूनिवर्सल कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंस के डाॅ. अयूब खान के अनुसार, मेडिकल सेंटर पहुंचने से पहले ही उनकी मौत हो चुकी थी।
मरीज यहां आया तो जब जांच और इलाज शुरू करने गए लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। उधर, भैरहवा, बुटवल, रूपनदेही, नवलपरासी समेत अन्य जिलों में भूकंप झटके महसूस हुए। लक्ष्मीपुर के रामअधार ने बताया कि बहन की शादी नेपाल के नवलपरासी में हुई है, सुबह उसके घर पहुंचकर हालचाल लिया। इसी तरह से अन्य लोग रिश्तेदारों का हाल चाल लिया।
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घूमने के लिए पोखरा गए भारतीय सहमे, होटल के बाहर गुजारी रात
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। नेपाल में पर्यटन के लिए गए भारतीय सहमे हुए हैं। शनिवार को उनसे दूरभाष पर बातचीत हुई तो उनका दर्द छलका। पर्यटकाें ने बताया कि होटल के बाहर पूरी रात गुजारनी पड़ी। भारतीय क्षेत्र से तमाम पर्यटक नेपाल भ्रमण के लिए गए हैं। भारत से नेपाल जाने वाले सैलानी पोखरा, काठमांडू में हैं। अब वे लोग वहीं से घर लौट रहे हैं।
सोनौली कस्बे के दीपक ने बताया कि शुक्रवार दोपहर पोखरा पहुंचा। यहां होटल में कमरा लिया। भ्रमण करने के बाद रात में कमरे में पहुंचा तो अचानक पंखा हिलने लगा तो महसूस हुआ कि भूकंप आया है। सभी कमरों से लोग भागकर बाहर निकले। मोबाइल इंटरनेट भी काम नहीं कर रहा। सुबह में घर पर सूचना दी। वहां से अब घर लौट रहा हूं। इन्हीं के साथ पोखरा में ही बगल के कमरे में रुके जयपुर के रौनक अग्रवाल भी सहमे रहे। उन्होंने बताया कि चक्कर जैसा लगा रहा है। ऐसा महसूस हो रहा कि अब भी धरती हिल रही है।
उन्होंने बताया कि पूरी रात होटल के बाहर गुजारा। सुबह को चाय पीने के बाद कुछ राहत मिली। जल्दी की घर चला जाऊंगा। भूकंप के झटकों के कारण अब यहां रहने लायक नहीं है। उन्होंने बताया कि काठमांडो से आने के बाद पोखरा में रुका था। पर्यटन के लिए तमाम लोग इधर-उधर फंसे होंगे। पोखरा में झटका तेज था, लेकिन कोई नुकसान नहीं हुआ है। भूकंप केंद्र वाले क्षेत्र में ज्यादा नुकसान हुआ है। घायलों को पोखरा के अस्पताल में भर्ती कराया जा रहा है।
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जिला अस्पताल में मिचली व चक्कर आने से पीड़ित लोग इलाज कराने पहुंचे
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। शुक्रवार की देर रात भूकंप के तेज झटकों से शहर से लेकर गांव तक लोग सहम गए। 10 सेकेंड में दो बार आए भूकंप से लोग हिल गए और घरों व होटलों से बाहर निकल आए। चंद सेकेंड धरती हिली तो दहशत में पूरी रात लोगों को गुजारनी पड़ी। शहर से लेकर गांव तक सड़कों पर लोग निकल आए। जिला अस्पताल में मरीज ट्रामा सेंटर के बाहर आ गए। पेड़ के नीचे तीमारदारों ने रात गुजारी। शनिवार को दिन भर भूकंप की चर्चा होती रही। जिला अस्पताल में मिचली व चक्कर आने से पीड़ित लोग इलाज कराने पहुंचे।
रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 5.6 मापी गई। गनीमत रही कि किसी तरह के जानमाल के नुकसान नहीं हुआ। हालांकि, कुछ घरों में शीशे चटक गए और दीवारों में दरारें आ गईं। जिले में रात करीब 11:32 बजे भूकंप का पहला झटका महसूस किया गया। इसके तीन सेकंड बाद दूसरा तेज झटका आया। इसके बाद लोगों को भूकंप आने का अहसास हुआ। कुर्सियां, बेड और घरों के दरवाजे हिलने लगे। इसके बाद लोग घरों से बाहर आ गए।
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भूकंप के झटके की दहशत लोगों में इस कदर देखने को मिली कि परिवार के साथ घंटों बाहर सड़क पर टहलते रहे। घर में जाने की हिम्मत नहीं हुई। देखते ही देखते शहर के सभी इलाकों में लोग सड़कों पर आ गए। रात करीब डेढ़ बजे तक लोग सड़कों पर देखे गए। भूकंप की दहशत सबसे ज्यादा बहुमंजिली इमारतों में रहने वालों में देखी गई। सक्सेना चौक पर पोस्ट ऑफिस मुहल्ले के लोग आ गए। सदर विधायक जयमंगल कन्नौजिया भी लोगों के साथ बाहर आकर बैठे रहे। सभी के चेहरे पर दहशत दिख रही थी। गांधी नगर, सरोजनी नगर, मऊपाकड, जय प्रकाश नगर, पडरी समेत अन्य मुहल्लों में लोग बाहर आए। बच्चों को लेकर लोग सड़क पर खुले स्थानों की दौड़े।
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अपनों की खैरियत जानने के बाद लोगों ने चैन की सांस ली
भूकंप के दो झटके पर पहले तो लोग खुद सुरक्षित स्थान पर पहुंचे, फिर परिचित और रिश्तेदारों का फोन करने की होड़ दिखी। संदेश के टोन फोन पर लगातार बजते रहे। अपनों की खैरियत जानने के बाद लोगों ने चैन की सांस ली। जिन घरों में बुजुर्ग चलने में असमर्थ रहे, वहां का दृश्य बेचैन करने वाला दिखा। परिजन मदद के लिए पड़ोसियों से भी गुहार लगाते रहे। पड़ोसियों ने ऐसे लोगों की खूब मदद की।
भूंकप आने के पहले कुत्ते अचानक भौंकने लगे
भूकंप आने से चंद मिनट पहले ही जानवरों की आवाज से पूरा इलाका गूंज गया था। शिवपुरी के अमित दुबे ने बताया कि वह खाना खाने के बाद घर के बाहर टहलने निकले थे। अचानक कुत्ते भौंकने लगे। पहले तो समझ में नहीं आया कि उन्हें ऐसा क्या हो गया, लेकिन जब भूकंप आया तो पुरखों की बात याद आ गई कि कोई भी अनहोनी की जानकारी जानवरों को पहले हो जाती है।
इंटरनेट मीडिया पर भी हलचल बढ़ गई
भूकंप आने के बाद इंटरनेट मीडिया पर भी हलचल बढ़ गई। कुछ लोग भूकंप के झटकों को काफी तेज बता रहे थे। कुछ का कहना था कि उन्हें पता ही नहीं चला कि भूकंप आया है। कई लोगों ने ट्वीट करके सवाल भी किया क्या आपने भूकंप के झटके महसूस किए हैं।
भूकंप के झटके से मकान में दरार
खनुआ। भारत नेपाल सीमावर्ती गांव हरदीडाली चौराहे पर शुक्रवार रात भूकंप के झटके से दो घरों में की दीवारों में दरार आ गई। संतोष चौधरी ने बताया कि दो मंजिलें मकान में दरार आ गई है। अनिल विश्वकर्मा ने बताया कि मकान में दरार आई है। डर लगा रहा है कि कहीं तेज भूकंप आने पर घर न गिर जाय।
दहशत में रहे लोग...कहीं भूंकप फिर न आ जाए
फोटो
रात में नींद नहीं आई। डर लग रहा था कि कहीं भूकंप फिर न आ जाए। झटका महसूस होते ही घर से बाहर आ गई। काफी देर तक चहारदीवारी के अंदर टहल कर वक्त गुजारना पड़ा
प्रतिभा सिंह, सक्सेना नगर
फोटो
भूंकप के झटके आने के पहले किचन में पानी लेने गई तो स्टैंड में रखा गिलास अचानक गिर गया। चक्कर आने लगा। शनिवार को दिन भर चक्कर आने जैसा महसूस हो रहा था।
प्रमिला शुक्ला, सुभाष नगर
फोटो
डर लगा रहा है। रात में तो नींद ही नहीं आ रही थी। सोने की कोशिश करने पर ऐसा लग रहा था कि मानों फिर से भूंकप आ जाएगा। झटका कम रहने के कारण कोई नुकसान नहीं हुआ है।
डॉ. घनश्याम शर्मा, सेवानिवृत पूर्व विभागाध्यक्ष, राजनीति विज्ञान
फोटो
इस बार भूंकप का झटका चंद सेकेंड रहा। पंखा हिलते हुए देखा तो समझ में आ गया कि भूकंप आया है। बाहर निकला तो तमाम लोग बाहर खड़े होकर आपस में चर्चा कर रहे थे।
डॉ. हेमंत श्रीवास्तव, वरिष्ठ होम्योपैथ चिकित्सक
फोटो
पृथ्वी के अंदर 7 प्लेट्स हैं, जो लगातार घूमती रहती हैं। जहां ये प्लेट्स ज्यादा टकराती हैं, वह जोन फॉल्ट लाइन कहलाता है। बार-बार टकराने से प्लेट्स के कोने मुड़ते हैं। जब ज्यादा दबाव बनता है तो प्लेटें टूटने लगती हैं। नीचे की ऊर्जा बाहर आने का रास्ता खोजती हैं और डिस्टर्बेंस के बाद भूकंप आता है। भूकंप का केंद्र उस स्थान को कहते हैं जिसके ठीक नीचे प्लेटों में हलचल से भूगर्भीय ऊर्जा निकलती है। इस स्थान पर भूकंप का कंपन ज्यादा होता है। कंपन की आवृत्ति ज्यों-ज्यों दूर होती जाती हैं, इसका प्रभाव कम होता जाता है। यदि रिक्टर स्केल पर 7 या इससे अधिक की तीव्रता वाला भूकंप है तो आसपास के 40 किमी के दायरे में झटका तेज होता है।
6.4 तीव्रता का भूकंप आया, केंद्र जाजरकोट के रामीडांडा में था
महराजगंज। नेपाल में पार्वती जिले के सुदूर जज्जरकोट जिले में देर रात को आए भूकंप ने काफी क्षति पहुंचाया है। मकानों के गिरने से लोग उसमें दबे हुए हैं। नेपाली सेना दर्जनों हेलिकाप्टरों से बचाव कार्य में जुटी है। जाजरकोट के पुलिस उपाधीक्षक संतोष रोका के अनुसार, नलगढ़ नगर पालिका की उपप्रमुख सरिता सिंह की भी भूकंप में मौत हो गई। भूकंप के कारण यहां बिजली सेवा बाधित हो गई है। सड़क परिचालन की समस्या के कारण घायलों का बचाव मुश्किल हो रहा है। शुक्रवार रात 11:47 बजे 6.4 तीव्रता का भूकंप आया, जिसका केंद्र जाजरकोट के रामीडांडा था।
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नेपाल के भैरहवा में भूकंप के बाद दिल का दौरा पड़ने से एक की मौत
तराई क्षेत्र में भूकंप के असर से सहमे लोग, भारतीय क्षेत्र के रिश्तेदारों ने ली जानकारी
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। नेपाल में भूकंप का असर तराई क्षेत्र में कम रहा। भारतीय सीमा से सटे जिलों में धरती हिली लेकिन मकान नहीं गिरे। सीमावर्ती क्षेत्र में भारतीय लोगों की रिश्तेदारी है, भूंकप के बाद सभी हालचाल लेने में जुटे गए। भैरहवा में एक व्यक्ति की मौत दिल का दौरा पड़ने के कारण हो गई। दिन भर लोग भूकंप की आशंका से सहमे रहे।
शुक्रवार रात में भूकंप आने के बाद भैरहवा में हृदयाघात से एक व्यक्ति की मौत हो गई। भैरहवा भीम अस्पताल में भर्ती 68 वर्षीय राधेश्याम वर्मा को दिल का दौरा पड़ने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वहां से उनको भैरहवा स्थित यूनिवर्सल कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेज रेफर कर दिया गया, जहां उनकी मौत हो गई। परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है। यूनिवर्सल कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंस के डाॅ. अयूब खान के अनुसार, मेडिकल सेंटर पहुंचने से पहले ही उनकी मौत हो चुकी थी।
मरीज यहां आया तो जब जांच और इलाज शुरू करने गए लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। उधर, भैरहवा, बुटवल, रूपनदेही, नवलपरासी समेत अन्य जिलों में भूकंप झटके महसूस हुए। लक्ष्मीपुर के रामअधार ने बताया कि बहन की शादी नेपाल के नवलपरासी में हुई है, सुबह उसके घर पहुंचकर हालचाल लिया। इसी तरह से अन्य लोग रिश्तेदारों का हाल चाल लिया।
घूमने के लिए पोखरा गए भारतीय सहमे, होटल के बाहर गुजारी रात
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। नेपाल में पर्यटन के लिए गए भारतीय सहमे हुए हैं। शनिवार को उनसे दूरभाष पर बातचीत हुई तो उनका दर्द छलका। पर्यटकाें ने बताया कि होटल के बाहर पूरी रात गुजारनी पड़ी। भारतीय क्षेत्र से तमाम पर्यटक नेपाल भ्रमण के लिए गए हैं। भारत से नेपाल जाने वाले सैलानी पोखरा, काठमांडू में हैं। अब वे लोग वहीं से घर लौट रहे हैं।
सोनौली कस्बे के दीपक ने बताया कि शुक्रवार दोपहर पोखरा पहुंचा। यहां होटल में कमरा लिया। भ्रमण करने के बाद रात में कमरे में पहुंचा तो अचानक पंखा हिलने लगा तो महसूस हुआ कि भूकंप आया है। सभी कमरों से लोग भागकर बाहर निकले। मोबाइल इंटरनेट भी काम नहीं कर रहा। सुबह में घर पर सूचना दी। वहां से अब घर लौट रहा हूं। इन्हीं के साथ पोखरा में ही बगल के कमरे में रुके जयपुर के रौनक अग्रवाल भी सहमे रहे। उन्होंने बताया कि चक्कर जैसा लगा रहा है। ऐसा महसूस हो रहा कि अब भी धरती हिल रही है।
उन्होंने बताया कि पूरी रात होटल के बाहर गुजारा। सुबह को चाय पीने के बाद कुछ राहत मिली। जल्दी की घर चला जाऊंगा। भूकंप के झटकों के कारण अब यहां रहने लायक नहीं है। उन्होंने बताया कि काठमांडो से आने के बाद पोखरा में रुका था। पर्यटन के लिए तमाम लोग इधर-उधर फंसे होंगे। पोखरा में झटका तेज था, लेकिन कोई नुकसान नहीं हुआ है। भूकंप केंद्र वाले क्षेत्र में ज्यादा नुकसान हुआ है। घायलों को पोखरा के अस्पताल में भर्ती कराया जा रहा है।