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Maharajganj News: वन विभाग के घंटों मेहनत के बाद भी नहीं हो सका डॉल्फिन का रेस्क्यू
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परतावल क्षेत्र की निचली नारायणी शाखा नहर में अहिरौली गांव के पास शनिवार को ग्रामीणों ने पकड़ा था डॉल्फिन मछली
सोमवार को रेस्क्यू के लिए फिर से अभियान चलाएगी वन विभाग की टीम
परतावल। परतावल क्षेत्र की निचली नारायणी शाखा नहर में देखी गई डॉल्फिन मछली का दूसरे दिन भी वन विभाग की टीम पता नहीं लगा सका। रविवार को कुशीनगर, महराजगंज और गोरखपुर वन प्रभाग की संयुक्त टीम ने सुबह से देर शाम तक कई किलोमीटर क्षेत्र में सर्च और रेस्क्यू अभियान चलाया। हालांकि तेज जल प्रवाह और अधिक पानी के कारण डॉल्फिन को सुरक्षित रेस्क्यू नहीं किया जा सका। अब सोमवार को दोबारा अभियान चलाया जाएगा।
शनिवार को अहिरौली क्षेत्र में मछुआरों के जाल में फंसी डॉल्फिन को ग्रामीणों ने सुरक्षित नहर में छोड़ दिया था। घटना का वीडियो और फोटो सोशल मीडिया पर वायरल होने और समाचार प्रकाशित होने के बाद वन विभाग हरकत में आया। रविवार तड़के से ही संयुक्त टीम ने अभियान शुरू कर दिया। टीम ने चौपरिया, अहिरौली, धरमौली, सिसवा शुक्ल, सुम्हाखोर, मेहाबार, देवीपुर और धनगड़ा तक नहर के किनारे डॉल्फिन की तलाश की।
अभियान में गोरखपुर के प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) शुभम सिंह, एसडीओ विनीत सिंह, वन दरोगा शैलेन्द्र सहित गोरखपुर, कुशीनगर और महराजगंज वन विभाग के अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे। लखनऊ से पहुंची डॉल्फिन एंबुलेंस की विशेषज्ञ टीम और वन्यजीव विशेषज्ञ भी अभियान में शामिल रहे।
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एसडीओ विनीत सिंह ने बताया कि नहर में पानी का बहाव काफी तेज होने के कारण रेस्क्यू अभियान प्रभावित हुआ। डॉल्फिन की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप उसका सुरक्षित रेस्क्यू किया जाएगा। सोमवार को फिर से अभियान चलाकर डॉल्फिन का पता लगाने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे नहर के आसपास अनावश्यक भीड़ न लगाएं और रेस्क्यू अभियान में जुटी टीम का सहयोग करें, ताकि डॉल्फिन को सुरक्षित निकालने में किसी प्रकार की बाधा न आए।
छतरी वाली तस्वीर बनी चर्चा का विषय
सर्च अभियान के दौरान सामने आई एक तस्वीर भी चर्चा में रही। तस्वीर में गोरखपुर के डीएफओ शुभम सिंह के साथ वन दरोगा बलराम कुमार गौंड उनके लिए छतरी पकड़े हुए दिखाई दे रहे हैं। तस्वीर वायरल होने के बाद लोगों के बीच इसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। हालांकि, वन विभाग की ओर से इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। ऐसे में तस्वीर को लेकर उठ रहे सवालों पर विभाग के स्पष्टीकरण का इंतजार है।
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सोमवार को रेस्क्यू के लिए फिर से अभियान चलाएगी वन विभाग की टीम
परतावल। परतावल क्षेत्र की निचली नारायणी शाखा नहर में देखी गई डॉल्फिन मछली का दूसरे दिन भी वन विभाग की टीम पता नहीं लगा सका। रविवार को कुशीनगर, महराजगंज और गोरखपुर वन प्रभाग की संयुक्त टीम ने सुबह से देर शाम तक कई किलोमीटर क्षेत्र में सर्च और रेस्क्यू अभियान चलाया। हालांकि तेज जल प्रवाह और अधिक पानी के कारण डॉल्फिन को सुरक्षित रेस्क्यू नहीं किया जा सका। अब सोमवार को दोबारा अभियान चलाया जाएगा।
शनिवार को अहिरौली क्षेत्र में मछुआरों के जाल में फंसी डॉल्फिन को ग्रामीणों ने सुरक्षित नहर में छोड़ दिया था। घटना का वीडियो और फोटो सोशल मीडिया पर वायरल होने और समाचार प्रकाशित होने के बाद वन विभाग हरकत में आया। रविवार तड़के से ही संयुक्त टीम ने अभियान शुरू कर दिया। टीम ने चौपरिया, अहिरौली, धरमौली, सिसवा शुक्ल, सुम्हाखोर, मेहाबार, देवीपुर और धनगड़ा तक नहर के किनारे डॉल्फिन की तलाश की।
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अभियान में गोरखपुर के प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) शुभम सिंह, एसडीओ विनीत सिंह, वन दरोगा शैलेन्द्र सहित गोरखपुर, कुशीनगर और महराजगंज वन विभाग के अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे। लखनऊ से पहुंची डॉल्फिन एंबुलेंस की विशेषज्ञ टीम और वन्यजीव विशेषज्ञ भी अभियान में शामिल रहे।
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एसडीओ विनीत सिंह ने बताया कि नहर में पानी का बहाव काफी तेज होने के कारण रेस्क्यू अभियान प्रभावित हुआ। डॉल्फिन की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप उसका सुरक्षित रेस्क्यू किया जाएगा। सोमवार को फिर से अभियान चलाकर डॉल्फिन का पता लगाने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे नहर के आसपास अनावश्यक भीड़ न लगाएं और रेस्क्यू अभियान में जुटी टीम का सहयोग करें, ताकि डॉल्फिन को सुरक्षित निकालने में किसी प्रकार की बाधा न आए।
छतरी वाली तस्वीर बनी चर्चा का विषय
सर्च अभियान के दौरान सामने आई एक तस्वीर भी चर्चा में रही। तस्वीर में गोरखपुर के डीएफओ शुभम सिंह के साथ वन दरोगा बलराम कुमार गौंड उनके लिए छतरी पकड़े हुए दिखाई दे रहे हैं। तस्वीर वायरल होने के बाद लोगों के बीच इसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। हालांकि, वन विभाग की ओर से इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। ऐसे में तस्वीर को लेकर उठ रहे सवालों पर विभाग के स्पष्टीकरण का इंतजार है।