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बैंकों में बीत गया दिन, नहीं मिली रकम
महराजगंज/ अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 22 Nov 2016 12:02 AM IST
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बैंकों में लगी रही कतारें
- फोटो : अमर उजाला
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शादी की खरीदारी तो रोजमर्रा के खर्च चलाने की चिंता में लोगों का पूरा दिन बैंकों तथा एटीएम का चक्कर लगाते बीत जा रहा है। लेकिन निराशा ही हाथ लग रही है। ग्रामीण क्षेत्र के बैंकों में केवल कैश जमा किया जा रहा है। भुगतान के नाम पर कैश न होने की बात कह कर ग्राहकों को वापस भेज दिया जा रहा है। एक्सचेंज तो किसी भी बैंक या डाकघर में नही हो रहा है।
केन्द्र सरकार द्वारा आठ नवंबर को 500 और 1000 के नोट बंद की घोषणा के बाद लोगों की समस्याएं कम नही हो रही हैं। इसका मुख्य कारण कि ग्रामीण क्षेत्र के बैंक पूर्वांचल बैंक और ग्रामीण क्षेत्र के बैंक में कैश का अभाव होने से किसान मारा-मारा फिर रहा हैं। बैंक के कर्मचारी ग्राहकों के साथ दुर्व्यवहार भी करने से नहीं चूक रहे हैं। जिसका नतीजा कि लोगों में गुस्सा बड़ता ही जा रहा है। किसान अपने ही पैसे को लेने के लिए पूरा दिन बैंक का चक्कर लगाता ही रह जा रहा है। पूर्वांचल ग्रामीण बैंक भैया फरेंदा में सिर्फ कैश जमा करने का काम हो रहा है। तेरह दिन बीत गये अभी मात्र तीन दिन ही यहां से रकम की भुगतान हुआ है। वह भी दिन के दो बजे के बाद। वह भी मात्र दो-दो हजार ऐसे में शादी विवाह के मौसम में लोग बैंक कर्मी के सामने अपने ही रकम को पाने के लिए गिड़गिड़ा रहे है लेकिन उनका दिल नहीं पसीज रहा है। यहां तक की ग्राहक मायूूस होकर थोडे़ ही पैसे में संतोष कर रहे है। सरकार विड्राल के माध्यम से एक सप्ताह में 24 हजार भुगतान करने का दावा कर रही है लेकिन वह सिर्फ कागजों में सिमट कर रह जा रहा है। केंद्र सरकार डाकघर में भी भुगतान करने का बात कहा था लेकिन वहां सिर्फ चहेतो को रकम निकासी व जमा करने की व्यवस्था हो रही है। एसबीआई की शाखा रूनुआ व धानी बाजार में ग्राहकों की लंबी कतार तेरहवें दिन भी लगी रही लोग सुबह सात बजे से ही अपने बारी के इंतजार में खडे़ हो रहे है। पूरा दिन पैसा पाने के लिए बिना भोजन पानी के बैंक का चक्कर लगा रहे है।
बैंकों में लगी रही कतारें
अमर उजाला ब्यूरो
चिउटहां। पुराने नोटों के प्रचलन के बंदी का आदेश हुए लगभग बारह दिन हो गए लेकिन लोगों के बैंकों पर लगने वाली भीड़ समाप्त होने का नाम ही नहीं ले रही है। सोमवार भी स्थानीय उपनगर सिसवा बाजार में भारतीय स्टेट बैंक, भारतीय स्टेट बैंक कृषि शाखा, पंजाब नेशनल बैंक, यूनियन बैंक, सेंट्रल बैंक सहित एचडीएफसी बैंक पर लोगों की लम्बी कतारें लगी रहीं। सोमवार 13 वें दिन बैंक खुलते ही व्यापारी, किसान, गरीब सहित लोग जैसे ही एचडीएफसी बैंक पहुँचे तो पता चला कि तीन दिनों से कैश नहीं है तो लोगों में काफी निराशा हो गई और ऐसे में बाकी सभी बैंकों में एक से दो हजार रुपये ही केवल बदले जाने से देहात क्षेत्रों से आये लोगों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ा।
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केन्द्र सरकार द्वारा आठ नवंबर को 500 और 1000 के नोट बंद की घोषणा के बाद लोगों की समस्याएं कम नही हो रही हैं। इसका मुख्य कारण कि ग्रामीण क्षेत्र के बैंक पूर्वांचल बैंक और ग्रामीण क्षेत्र के बैंक में कैश का अभाव होने से किसान मारा-मारा फिर रहा हैं। बैंक के कर्मचारी ग्राहकों के साथ दुर्व्यवहार भी करने से नहीं चूक रहे हैं। जिसका नतीजा कि लोगों में गुस्सा बड़ता ही जा रहा है। किसान अपने ही पैसे को लेने के लिए पूरा दिन बैंक का चक्कर लगाता ही रह जा रहा है। पूर्वांचल ग्रामीण बैंक भैया फरेंदा में सिर्फ कैश जमा करने का काम हो रहा है। तेरह दिन बीत गये अभी मात्र तीन दिन ही यहां से रकम की भुगतान हुआ है। वह भी दिन के दो बजे के बाद। वह भी मात्र दो-दो हजार ऐसे में शादी विवाह के मौसम में लोग बैंक कर्मी के सामने अपने ही रकम को पाने के लिए गिड़गिड़ा रहे है लेकिन उनका दिल नहीं पसीज रहा है। यहां तक की ग्राहक मायूूस होकर थोडे़ ही पैसे में संतोष कर रहे है। सरकार विड्राल के माध्यम से एक सप्ताह में 24 हजार भुगतान करने का दावा कर रही है लेकिन वह सिर्फ कागजों में सिमट कर रह जा रहा है। केंद्र सरकार डाकघर में भी भुगतान करने का बात कहा था लेकिन वहां सिर्फ चहेतो को रकम निकासी व जमा करने की व्यवस्था हो रही है। एसबीआई की शाखा रूनुआ व धानी बाजार में ग्राहकों की लंबी कतार तेरहवें दिन भी लगी रही लोग सुबह सात बजे से ही अपने बारी के इंतजार में खडे़ हो रहे है। पूरा दिन पैसा पाने के लिए बिना भोजन पानी के बैंक का चक्कर लगा रहे है।
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बैंकों में लगी रही कतारें
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चिउटहां। पुराने नोटों के प्रचलन के बंदी का आदेश हुए लगभग बारह दिन हो गए लेकिन लोगों के बैंकों पर लगने वाली भीड़ समाप्त होने का नाम ही नहीं ले रही है। सोमवार भी स्थानीय उपनगर सिसवा बाजार में भारतीय स्टेट बैंक, भारतीय स्टेट बैंक कृषि शाखा, पंजाब नेशनल बैंक, यूनियन बैंक, सेंट्रल बैंक सहित एचडीएफसी बैंक पर लोगों की लम्बी कतारें लगी रहीं। सोमवार 13 वें दिन बैंक खुलते ही व्यापारी, किसान, गरीब सहित लोग जैसे ही एचडीएफसी बैंक पहुँचे तो पता चला कि तीन दिनों से कैश नहीं है तो लोगों में काफी निराशा हो गई और ऐसे में बाकी सभी बैंकों में एक से दो हजार रुपये ही केवल बदले जाने से देहात क्षेत्रों से आये लोगों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ा।
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