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Maharajganj News: पिता के नाम कार पर कुर्की की कार्रवाई खारिज, डीएम ने दी राहत

Tue, 25 Aug 2026 02:17 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 25 Aug 2026 02:17 AM IST
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The attachment of the car in the name of the father was dismissed, the DM gave relief
आरोपी पर फर्जी कंपनी खोलकर शेयर बाजार में लाभ देकर धन लेने का आरोप
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अवैध कमाई से वाहन खरीदने का संबंध साबित नहीं
महराजगंज। गैंगस्टर एक्ट के तहत कुर्की की जद में आये कार को जिलाधिकारी गौरव सिंह सोगरवाल की अदालत ने सशर्त अवमुक्त करने का आदेश दिया है। डीएम ने वाहन स्वामी की आपत्ति स्वीकार करते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष वाहन और कथित अवैध रूप से अर्जित धन के बीच प्रत्यक्ष संबंध साबित नहीं कर सका। ऐसे में केवल संदेह के आधार पर वाहन को जब्त करना उचित नहीं है।
पुलिस के अनुसार प्रमोद पटेल के पुत्र आरव पटेल ने अपने साथियों के साथ मिलकर फर्जी कंपनी बनाई थी। कंपनी के माध्यम से शेयर बाजार में अधिक लाभ दिलाने का झांसा देकर लोगों से लाखों रुपये लेने का आरोप है। आरव के खिलाफ पांच प्राथमिकी दर्ज होने के आधार पर पुलिस ने गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की। इसी क्रम में घुघली थानाध्यक्ष ने 20 मई को स्कॉर्पियो की कुर्की के लिए रिपोर्ट तैयार की थी, जिसे सीओ सदर और अपर पुलिस अधीक्षक की संस्तुति के बाद पुलिस अधीक्षक के माध्यम से 25 मई को डीएम न्यायालय भेजा गया।
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पुलिस ने दावा किया था कि फर्जी कंपनी के जरिए अर्जित अवैध धन से आरव के पिता के नाम स्कॉर्पियो खरीदी गई और वाहन की ईएमआई भी उसी धन से जमा की गई। एआरटीओ की रिपोर्ट में वाहन का अनुमानित मूल्य 5,99,997 रुपये बताया गया था। वहीं वाहन स्वामी प्रमोद पटेल ने न्यायालय में आपत्ति दाखिल करते हुए बताया कि उन्होंने बैंक ऋण लेकर स्कॉर्पियो खरीदी थी। ऋण चुकाने के लिए पैतृक कृषि भूमि बेचकर रकम जुटाई गई। उन्होंने यह भी बताया कि वाहन खरीद के समय आरव की उम्र करीब 14 वर्ष थी। प्रमोद ने अपने विरुद्ध कोई आपराधिक मुकदमा दर्ज नहीं होने की बात भी कही।
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दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और उपलब्ध अभिलेखों का परीक्षण करने के बाद डीएम ने माना कि अभियोजन वाहन और कथित अवैध कमाई के बीच आवश्यक प्रत्यक्ष संबंध स्थापित नहीं कर सका। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल पुलिस रिपोर्ट, अनुमान या संदेह के आधार पर किसी संपत्ति को जब्त नहीं किया जा सकता। डीएम ने वाहन को सशर्त अवमुक्त करने का आदेश दिया है। वाहन किसी अन्य मुकदमे में वांछित नहीं होने की स्थिति में पंजीकृत स्वामी को सौंपा जाएगा।
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