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Maharajganj News: किसानों का धरना समाप्त करने गए तहसीलदार हंगामे के बाद बैरंग लौटे, डीएम आज करेंगे मुलाकात

Thu, 06 Aug 2026 01:41 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 06 Aug 2026 01:41 AM IST
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Tehsildar who went to end the farmers' protest returned empty-handed after the uproar, DM will meet today
देर शाम भाकियू की अगुवाई में डीएम को ज्ञापन
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11 जून से तेंदुअहिया में भाकियू के बैनर तले चल रहा धरना
महराजगंज। तेंदुहिया में अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे किसानों का धरना बुधवार को उग्र हो गया। दलबल के साथ तेंदुहिया जा रही प्रशासन की टीम को रामनगर में ही किसानों ने घेरकर उग्र प्रदर्शन कर नारेबाजी की। इसके बाद टीम बैरंग लौट गई। डीएम ने भाकियू के पांच सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल को वार्ता के लिए आज बुलाया है।
जानकारी के अनुसार, सदर तहसील की ग्राम पंचायत तेंदुअहिया में किसान यूनियन का धरना 56वें दिन मंगलवार भी शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा था। जिलाध्यक्ष भाकियू राम अशीष ने बताया कि रोज की तरह हम लोग धरने पर थे। इसी बीच शाम सात बजे जानकारी मिली कि पनियरा थाने से फोर्स लेकर सदर तहसीलदार धरना जबरिया समाप्त कराने निकले हैं।
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यह सुनते ही धरने पर बैठे किसान पदाधिकारी व धरनारत लोग उग्र हुए और धरने पर सिर्फ महिलाओं को छोड़कर खुद तहसीलदार को रास्ते में ही रोकने के लिए चल पड़े। धरना स्थल से करीब एक किमी पहले रामनगर में तहसीलदार व पुलिस फोर्स को लगभग 50-60 की संख्या में किसान प्रशासन की टीम को घेरकर नारेबाजी करने लगे। तहसीलदार की टीम ने पहले बातचीत का प्रयास किया लेकिन किसानों का गुस्सा देख वह वापस लौट गए।
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भाकियू अध्यक्ष के अनुसार तहसीलदार के लौटने के बाद किसान रात 08:15 पर कलेक्ट्रेट पहुंचे और तहसीलदार की भूमिका की जांच की मांग करते हुए डीएम कार्यालय में एक पत्र सौंपा। जिलाध्यक्ष के मुताबिक डीएम ने संगठन से फोन वार्ता कर बुधवार को हमारे प्रतिनिधि मंडल को दिन में वार्ता के लिए बुलाया है। 55
एकड़ जमीन का है विवाद

ग्राम पंचायत तेंदुअहिया में 55 एकड़ जमीन 37 किसानों को 1995 में पट्टे पर तहसील प्रशासन ने दिया था। यह जमीन प्रेम किशोरी की थी। उनकी मृत्यु 1984 में होने के बाद लगभग 12 वर्ष जमीन परती पड़ी रही। तब तक उनके किसी वारिस ने दावा नहीं किया था। हल्का लेखपाल व कानूनगो की रिपोर्ट पर इसे तहसील प्रशासन ने अपने अधिकार में लेकर किसानों को पट्टे पर दिया था। लेकिन 2009 में एक व्यक्ति के पावर आफ अटॉर्नी प्रपत्र के आधार पर बिना नोटिस दिए किसानों ने जमीन वापस ले लिया था। इसी के विरोध में भाकियू के बैनर तले भूमिहीन 11 जून से गांव में ही धरने पर बैठे हैं।

वर्जन
तेंदुअहिया में किसानों का धरना समाप्त करने जैसी कोई बात नहीं थी। हम किसान यूनियन को वार्ता के लिए बुलाने पहुंच रहे थे, लेकिन धरना स्थल से पहले किसानों के प्रदर्शन के कारण लौटना पड़ा।
-पंकज शाही, तहसीलदार सदर।
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