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Maharajganj News: गर्भाशय में टीबी का संक्रमण खतरनाक
Tue, 19 Nov 2024 01:46 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Tue, 19 Nov 2024 01:46 AM IST
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महराजगंज। शादी को कई साल हो चुके हैं, इसके बाद भी मां बनने का सपना पूरा नहीं हो रहा तो सतर्क हो जाइए, क्योंकि इस समय महिलाओं के गर्भाशय में तेजी से टीबी संक्रमण बढ़ने के मामले सामने आए हैं। इस संक्रमण से कम उम्र में ही महिलाओं में बांझपन का खतरा बढ़ जा रहा है। टीबी को बीमारी नाखून और बाल को छोड़कर शरीर के किसी भी अंग को प्रभावित कर सकती है। महिलाओं और पुरुषों में पेल्विक ट्यूबरक्लोसिस (जननांग) की टीबी का भी संक्रमण हो सकता है। इससे दोनों के प्रजनन स्वास्थ्य को प्रभावित करती है।
अधिकतर मामले 30-40 साल की उम्र वाली महिलाओं में पाए जा रहे हैं। जो महिलाओं में बांझपन का कारण बन रही है।क्षय रोग से मुक्त दिलाने के लिए विभाग की ओर से तेजी से प्रयास किया जा रहे हैं। जिले में इस वर्ष गर्भाशय में टीबी करीब 21 महिलाओं में मिला है। समय से बीमारी का पता चलाने पर उनकी दवा चल रही है। डॉक्टरों के अनुसार थोड़ी सी लापरवाही से बांझपन होने का खतरा बढ़ जाता है। 30 से 40 साल की महिलाएं इस बीमारी की चपेट में आ रही हैं। स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. ज्योत्सना ओझा बताती हैं कि महिलाओं में गर्भाशय की टीबी के मामले आ रहे हैं। जो महिलाओं के लिए खतरनाक है। यदि समय रहते इसका उपचार नहीं कराया गया तो आगे चलकर बांझपन का खतरा बढ़ जाता है। लेकिन समय से उपचार करने पर बीमारी से मुक्ति मिल जाती है।
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केस नंबर एक - शहर की 30 वर्षीय महिला बताती हैं कि शादी के चार साल बाद भी बच्चा नहीं हुआ, डॉक्टर को दिखाया। जांच में गर्भाशय में संक्रमण मिला। इलाज कराने के बाद मातृत्व सुख प्राप्त हुआ।
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केस नंबर दो- शहर की 28 वर्षीय महिला बताती हैं उनका पहला बच्चा समय पर हुआ, लेकिन दूसरे बच्चे में दिक्कत आने लगी। जब चिकित्सक को दिखाया तो गर्भाशय में टीबी का संक्रमण पाया गया। इलाज कराने के बाद दूसरा बच्चा हुआ।
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इस तरह से पता चलता है गर्भाशय की टीबी का
ट्यूबरकुलीन स्किन टेस्ट के साथ ही ब्लड टेस्ट कराया जाता है। यूट्रस की बायोप्सी भी कराई जाती है। इसके अलावा जेनेटिक टेस्ट भी होता है, इससे टीबी के इंफेक्शन का पता चलता है। ऐसे मरीजों को छह महीने तक टीबी की दवा नियमित तौर पर खिलाई जाती है।
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ये हैं टीबी के लक्षण
पसीना अधिक आना, थकान रहना, पेट के निचले हिस्से में तेज दर्द रहना, अनियमित मासिक धर्म, सफेद पानी आना, हेवी ब्लीडिंग, उबकाई या उल्टी, वजन का कम होना, हल्का बुखार, हार्ट की पल्स रेट का तेज हो जाना, अल्प समय में गर्भपात हो जाना आदि।
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यह बरतें सावधानी
नियमित रूप से शारीरिक जांच करवाएं, टीबी का इंजेक्शन लगवाएं, हरी सब्जियां और फल खाएं, नियमित रूप से एक्सरसाइज करें, प्रदूषण से बचकर रहें, जंक और फास्ट फूड से परहेज करें।
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अधिकतर मामले 30-40 साल की उम्र वाली महिलाओं में पाए जा रहे हैं। जो महिलाओं में बांझपन का कारण बन रही है।क्षय रोग से मुक्त दिलाने के लिए विभाग की ओर से तेजी से प्रयास किया जा रहे हैं। जिले में इस वर्ष गर्भाशय में टीबी करीब 21 महिलाओं में मिला है। समय से बीमारी का पता चलाने पर उनकी दवा चल रही है। डॉक्टरों के अनुसार थोड़ी सी लापरवाही से बांझपन होने का खतरा बढ़ जाता है। 30 से 40 साल की महिलाएं इस बीमारी की चपेट में आ रही हैं। स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. ज्योत्सना ओझा बताती हैं कि महिलाओं में गर्भाशय की टीबी के मामले आ रहे हैं। जो महिलाओं के लिए खतरनाक है। यदि समय रहते इसका उपचार नहीं कराया गया तो आगे चलकर बांझपन का खतरा बढ़ जाता है। लेकिन समय से उपचार करने पर बीमारी से मुक्ति मिल जाती है।
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केस नंबर एक - शहर की 30 वर्षीय महिला बताती हैं कि शादी के चार साल बाद भी बच्चा नहीं हुआ, डॉक्टर को दिखाया। जांच में गर्भाशय में संक्रमण मिला। इलाज कराने के बाद मातृत्व सुख प्राप्त हुआ।
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केस नंबर दो- शहर की 28 वर्षीय महिला बताती हैं उनका पहला बच्चा समय पर हुआ, लेकिन दूसरे बच्चे में दिक्कत आने लगी। जब चिकित्सक को दिखाया तो गर्भाशय में टीबी का संक्रमण पाया गया। इलाज कराने के बाद दूसरा बच्चा हुआ।
इस तरह से पता चलता है गर्भाशय की टीबी का
ट्यूबरकुलीन स्किन टेस्ट के साथ ही ब्लड टेस्ट कराया जाता है। यूट्रस की बायोप्सी भी कराई जाती है। इसके अलावा जेनेटिक टेस्ट भी होता है, इससे टीबी के इंफेक्शन का पता चलता है। ऐसे मरीजों को छह महीने तक टीबी की दवा नियमित तौर पर खिलाई जाती है।
ये हैं टीबी के लक्षण
पसीना अधिक आना, थकान रहना, पेट के निचले हिस्से में तेज दर्द रहना, अनियमित मासिक धर्म, सफेद पानी आना, हेवी ब्लीडिंग, उबकाई या उल्टी, वजन का कम होना, हल्का बुखार, हार्ट की पल्स रेट का तेज हो जाना, अल्प समय में गर्भपात हो जाना आदि।
यह बरतें सावधानी
नियमित रूप से शारीरिक जांच करवाएं, टीबी का इंजेक्शन लगवाएं, हरी सब्जियां और फल खाएं, नियमित रूप से एक्सरसाइज करें, प्रदूषण से बचकर रहें, जंक और फास्ट फूड से परहेज करें।