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कुपोषित बच्चों को सुपोषित बनाने की मुहिम तेज
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पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कुपोषित बच्चों की जांच करती स्टाफ नर्स।
- फोटो : MAHARAJGANJ
कुपोषित बच्चों को सुपोषित बनाने की मुहिम तेज
पोषण पुनर्वास केंद्र में बच्चों के साथ मां की सेहत का भी रखा जा रहा ख्याल
केंद्र में भर्ती कराने में आंगनबाड़ी एवं आशा को मिलती है प्रोत्साहन राशि
महराजगंज। कुपोषित बच्चों को सुपोषित बनाने के लिए जिला अस्पताल में बना पोषण पुनर्वस केंद्र इन दिनों भरा है। पहले इस वार्ड में तीन से चार बेड़ लगातार खाली चल रहे थे। जिम्मेदारों ने सुधि ली तो कुपोषित बच्चों को सुपोषित बनाने की पहल तेज हो गई।
पोषण पुनर्वास केंद्र में बेड़ खाली रहने पर ‘अमर उजाला’ ने 22 सितंबर के अंक में खबर प्रकाशित किया था। इसके बाद जिम्मेदारों की नींद टूटी तो कुपोषित बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र में लाने में मुहिम तेज हो गई।
पोषण पुनर्वास केंद्र से मिली जानकारी के अनुसार केंद्र में दस बेड़ पर दस कुपोषित बच्चों का इलाज चल रहा है। सालू, सूग्गी, वंदना, श्रेया, सूरज, अफजल, अनिश, दिवाकर, कृष्णा और गौतम का इस वार्ड में इलाज चल रहा है। बच्चों के साथ उनकी मां को भी समुचित सुविधा दी जा रही है। केंद्र में बच्चों को निशुल्क भर्ती किया जाता है। बच्चों को चिकित्सक की सलाह के आधार पर पौष्टिक आहार दिया जा रहा है। बच्चे की मां को भी आहार उपलब्ध कराया जा रहा है। 102 एंबुलेंस के माध्यम से बच्चे को घर से केंद्र तक लाने व ले जाने की सुविधा दी जाती है। इसके अलावा भर्ती होने के दौरान बच्चे की मां को 50 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से दैनिक भत्ता दिया जाता है। आंगनबाड़ी या आशा कार्यकर्ता कुपोषित बच्चों को भर्ती कराती हैं तो उन्हें 50 रुपये प्रोत्साहन राशि दिया जाता है।
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जिला अस्पताल के पोषण पुनर्वास केंद्र में दस कुपोषित बच्चों को सुपोषित करने का प्रयास जारी है। प्रत्येक दिन डॉक्टर की सलाह पर पौष्टिक भोजन दिया जा रहा है। जरूरी पोषक तत्वों की पूर्ति के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है।
डॉ. एके राय, सीएमएस
पनियरा में सर्वाधिक कुपोषित बच्चे
कुपोषित मैम श्रेणी में 4096 बच्चे हैं। गंभीर रूप से कुपोषित सैम श्रेणी में 353 बच्चे शामिल हैं। इसमें निचलौल 26, सिसवां तीन, मिठौरा 27, पनियरा 108, सदर 16, घुघली 14, शहर क्षेत्र चार, फरेंदा 13, बृजमनगंज छह, धानी पांच, परतावल 43, नौतनवां आठ और लक्ष्मीपुर में 80 बच्चे हैं। सर्वाधिक कुपोषित बच्चे पनियरा ब्लॉक में हैं।
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पोषण पुनर्वास केंद्र में बच्चों के साथ मां की सेहत का भी रखा जा रहा ख्याल
केंद्र में भर्ती कराने में आंगनबाड़ी एवं आशा को मिलती है प्रोत्साहन राशि
महराजगंज। कुपोषित बच्चों को सुपोषित बनाने के लिए जिला अस्पताल में बना पोषण पुनर्वस केंद्र इन दिनों भरा है। पहले इस वार्ड में तीन से चार बेड़ लगातार खाली चल रहे थे। जिम्मेदारों ने सुधि ली तो कुपोषित बच्चों को सुपोषित बनाने की पहल तेज हो गई।
पोषण पुनर्वास केंद्र में बेड़ खाली रहने पर ‘अमर उजाला’ ने 22 सितंबर के अंक में खबर प्रकाशित किया था। इसके बाद जिम्मेदारों की नींद टूटी तो कुपोषित बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र में लाने में मुहिम तेज हो गई।
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पोषण पुनर्वास केंद्र से मिली जानकारी के अनुसार केंद्र में दस बेड़ पर दस कुपोषित बच्चों का इलाज चल रहा है। सालू, सूग्गी, वंदना, श्रेया, सूरज, अफजल, अनिश, दिवाकर, कृष्णा और गौतम का इस वार्ड में इलाज चल रहा है। बच्चों के साथ उनकी मां को भी समुचित सुविधा दी जा रही है। केंद्र में बच्चों को निशुल्क भर्ती किया जाता है। बच्चों को चिकित्सक की सलाह के आधार पर पौष्टिक आहार दिया जा रहा है। बच्चे की मां को भी आहार उपलब्ध कराया जा रहा है। 102 एंबुलेंस के माध्यम से बच्चे को घर से केंद्र तक लाने व ले जाने की सुविधा दी जाती है। इसके अलावा भर्ती होने के दौरान बच्चे की मां को 50 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से दैनिक भत्ता दिया जाता है। आंगनबाड़ी या आशा कार्यकर्ता कुपोषित बच्चों को भर्ती कराती हैं तो उन्हें 50 रुपये प्रोत्साहन राशि दिया जाता है।
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जिला अस्पताल के पोषण पुनर्वास केंद्र में दस कुपोषित बच्चों को सुपोषित करने का प्रयास जारी है। प्रत्येक दिन डॉक्टर की सलाह पर पौष्टिक भोजन दिया जा रहा है। जरूरी पोषक तत्वों की पूर्ति के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है।
डॉ. एके राय, सीएमएस
पनियरा में सर्वाधिक कुपोषित बच्चे
कुपोषित मैम श्रेणी में 4096 बच्चे हैं। गंभीर रूप से कुपोषित सैम श्रेणी में 353 बच्चे शामिल हैं। इसमें निचलौल 26, सिसवां तीन, मिठौरा 27, पनियरा 108, सदर 16, घुघली 14, शहर क्षेत्र चार, फरेंदा 13, बृजमनगंज छह, धानी पांच, परतावल 43, नौतनवां आठ और लक्ष्मीपुर में 80 बच्चे हैं। सर्वाधिक कुपोषित बच्चे पनियरा ब्लॉक में हैं।