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Maharajganj News: घुघली के गन्ना किसानों को नहीं भूलता 31 अक्तूबर का दिन
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928 कर्मचारी बेरोजगार हो गए थे, गन्ना किसान भी भटकने को विवश हुए
संवाद न्यूज एजेंसी
घुघली। क्षेत्र के गन्ना किसानों को 31 अक्तूबर 1999 का दिन कभी नहीं भूलेगा, इस दिन घुघली चीनी मिल बंद हुआ था। जहां एक तरफ 928 कर्मचारी बेरोजगार हो गए, वहीं किसान भी गन्ने की फसल को लेकर इधर-उधर चक्कर लगाने लगे। इसका परिणाम यह हुआ कि गन्ना किसान अब गन्ना से मोहभंग कर अन्य फसलों की खेती पर ध्यान केंद्रित करने लगे क्षेत्र में गन्ना किसानों की संख्या में लगातार गिरावट दर्ज की गई। आज के समय में नाम मात्र के किसान ही गन्ना की बुवाई कर रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, घुघली कस्बे की चीनी मिल 31 अक्तूबर 1999 को जब बंद हुई थी। घुघली तब गोरखपुर संसदीय क्षेत्र का हिस्सा था। इस क्षेत्र की तरक्की के लिए पंजाब प्रांत के लाला केशर राम नारंग ने 1920 में पंजाब सुगर मिल का स्थापना किया था। जितेंद्र सिंह ने बताया कि अचानक मिल बंदी से किसानों की चिंता बढ़ी है। मिल बंद होने से विकास तो रुक ही गया है। इससे क्षेत्रवासियों को बड़ा नुकसान भी हुआ। मिल मजदूर रतन प्रसाद मिल बंदी का कोई भी राजनीतिक दल चुनावी मुद्दा नहीं बनाया। इस क्षेत्र के किसानों का दुख दर्द सुनने व समझने वाला कोई नहीं है। क्योंकि हम कर्मचारी के साथ-साथ किसान भी हैं।
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चीनी मिल की फैक्ट फाइल
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स्थापना वर्ष-- -- -1920
भूमि-- -- -- - 52 एकड़
संबंधित संस्था-- -- डीएबी नारंग इंटर कालेज,नारंग संस्कृत महा विद्यालय
बंद हुआ मिल-- -- -- 31 अक्तूबर 1999
चीनी मिल बिका-- -- - 2012
कीमत-- -- 3075 नाख
खरीदार-- -- जिरकाम शुगर सलूसन।
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मिल चलाने के लिए हमलोगों ने काफी संघर्ष किया, लेकिन मिल नहीं चली। बसपा सरकार में चीनी मिल को कौड़ियों के भाव बेच दिया गया। यह मामला कोर्ट में लंबित है। कोर्ट का फैसला आते ही चीनी मिल चलाने के लिए प्रयास कराया जाएगा। 31 अक्तूबर जब आता है तो पुराने दिन याद आने लगते हैं। मन भावुक हो जाता है।
-- सीताराम पांडेय, मजदूर नेता, चीनी मिल घुघली
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संवाद न्यूज एजेंसी
घुघली। क्षेत्र के गन्ना किसानों को 31 अक्तूबर 1999 का दिन कभी नहीं भूलेगा, इस दिन घुघली चीनी मिल बंद हुआ था। जहां एक तरफ 928 कर्मचारी बेरोजगार हो गए, वहीं किसान भी गन्ने की फसल को लेकर इधर-उधर चक्कर लगाने लगे। इसका परिणाम यह हुआ कि गन्ना किसान अब गन्ना से मोहभंग कर अन्य फसलों की खेती पर ध्यान केंद्रित करने लगे क्षेत्र में गन्ना किसानों की संख्या में लगातार गिरावट दर्ज की गई। आज के समय में नाम मात्र के किसान ही गन्ना की बुवाई कर रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, घुघली कस्बे की चीनी मिल 31 अक्तूबर 1999 को जब बंद हुई थी। घुघली तब गोरखपुर संसदीय क्षेत्र का हिस्सा था। इस क्षेत्र की तरक्की के लिए पंजाब प्रांत के लाला केशर राम नारंग ने 1920 में पंजाब सुगर मिल का स्थापना किया था। जितेंद्र सिंह ने बताया कि अचानक मिल बंदी से किसानों की चिंता बढ़ी है। मिल बंद होने से विकास तो रुक ही गया है। इससे क्षेत्रवासियों को बड़ा नुकसान भी हुआ। मिल मजदूर रतन प्रसाद मिल बंदी का कोई भी राजनीतिक दल चुनावी मुद्दा नहीं बनाया। इस क्षेत्र के किसानों का दुख दर्द सुनने व समझने वाला कोई नहीं है। क्योंकि हम कर्मचारी के साथ-साथ किसान भी हैं।
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स्थापना वर्ष
भूमि
संबंधित संस्था
बंद हुआ मिल
चीनी मिल बिका
कीमत
खरीदार
मिल चलाने के लिए हमलोगों ने काफी संघर्ष किया, लेकिन मिल नहीं चली। बसपा सरकार में चीनी मिल को कौड़ियों के भाव बेच दिया गया। यह मामला कोर्ट में लंबित है। कोर्ट का फैसला आते ही चीनी मिल चलाने के लिए प्रयास कराया जाएगा। 31 अक्तूबर जब आता है तो पुराने दिन याद आने लगते हैं। मन भावुक हो जाता है।