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Maharajganj News: लैंगिक समानता को प्रोत्साहित करने के लिए विद्यार्थियों को किया जाएगा जागरूक
Thu, 16 May 2024 05:18 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Thu, 16 May 2024 05:18 AM IST
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महराजगंज। नई शिक्षा नीति के तहत जिले के सभी माध्यमिक विद्यालयों में लैंगिक समानता को प्रोत्साहित करने के लिए विद्यार्थियों को जागरूक किया जाएगा। विद्यालयों में प्रार्थना स्थल पर लैंगिक समानता को प्रोत्साहित करने वाली लघु कथाएं, प्रेरक प्रसंग, संक्षिप्त उद्बोधन व गीत आदि गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। प्रार्थना स्थल पर विभिन्न क्षेत्रों में अपना परचम लहरा चुकी देश की महिलाओं के व्यक्तित्व के बारे में भी विद्यार्थियों की जानकारी दी जाएगी। लैंगिक समानता का महत्व, प्रभाव व परिणाम के बारे में विशेषज्ञ शिक्षक व गणमान्य व्यक्तियों की ओर से विद्यार्थियों को जागरूक किया जाएगा। जिले में संचालित 278 माध्यमिक विद्यालयों में जागरुकता के लिए प्रत्येक सप्ताह में नियमित तरीके से कार्यक्रम होंगे। इसमें विद्यार्थियों भी अपनी सहभागिता करेंगे।
डीआईओएस अमरनाथ राय ने सभी माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को पत्र भेजकर प्रार्थना स्थल पर कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। इसमें कक्षा नौ से बारहवीं के विद्यार्थियों को जागरूक किया जाएगा।
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लैंगिक समानता एक मानव अधिकार भी
डीआईओएस ने बताया कि लैंगिक समानता महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ हिंसा को रोकती है। आर्थिक समृद्धि के लिए यह आवश्यक है। जिस समाज में महिलाओं और पुरुषों को समान माना जाता है, वहां महिलाएं अधिक सुरक्षित और स्वस्थ हैं। इसके साथ ही लैंगिक समानता एक मानव अधिकार भी है। विद्यार्थियों को जागरूक कर बेहतर भविष्य को तैयार किया जाएगा।
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क्या है लैंगिक असमानता
लैंगिक असमानता का तात्पर्य लैंगिक आधार पर महिलाओं के साथ भेदभाव से है। इसमें प्रमुख रूप से सामाजिक तौर पर महिलाओं की घरेलू निर्णयों में भूमिका सीमित रहना, आर्थिक क्षेत्र में कार्यरत महिला और पुरुष के पारिश्रमिक में अंतर, औद्योगिक क्षेत्र में महिलाओं को पुरुषों के सापेक्ष कम वेतन दिया जाना शामिल है। इसी असमानता को दूर करने निरंतर प्रवास शासन की ओर से हो रहे हैं।
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डीआईओएस अमरनाथ राय ने सभी माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को पत्र भेजकर प्रार्थना स्थल पर कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। इसमें कक्षा नौ से बारहवीं के विद्यार्थियों को जागरूक किया जाएगा।
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लैंगिक समानता एक मानव अधिकार भी
डीआईओएस ने बताया कि लैंगिक समानता महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ हिंसा को रोकती है। आर्थिक समृद्धि के लिए यह आवश्यक है। जिस समाज में महिलाओं और पुरुषों को समान माना जाता है, वहां महिलाएं अधिक सुरक्षित और स्वस्थ हैं। इसके साथ ही लैंगिक समानता एक मानव अधिकार भी है। विद्यार्थियों को जागरूक कर बेहतर भविष्य को तैयार किया जाएगा।
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क्या है लैंगिक असमानता
लैंगिक असमानता का तात्पर्य लैंगिक आधार पर महिलाओं के साथ भेदभाव से है। इसमें प्रमुख रूप से सामाजिक तौर पर महिलाओं की घरेलू निर्णयों में भूमिका सीमित रहना, आर्थिक क्षेत्र में कार्यरत महिला और पुरुष के पारिश्रमिक में अंतर, औद्योगिक क्षेत्र में महिलाओं को पुरुषों के सापेक्ष कम वेतन दिया जाना शामिल है। इसी असमानता को दूर करने निरंतर प्रवास शासन की ओर से हो रहे हैं।