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Maharajganj News: आयुर्वेद व होमियोपैथिक में बुखार की दवा और यूनानी में चूरन तक भी नहीं बचा
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आयुर्वेद में 55 में से महज छह प्रकार की और होमियोपैथिक में 78 में से महज 10 प्रकार की दवाएं उपलब्ध
यूनानी क्लीनिक में 37 प्रकार की दवा में सिर्फ तीन प्रकार की दवाएं ही बचीं
महराजगंज। जिला अस्पताल परिसर में आयुष विंग ही बीमार है। यहां एक ही छत के नीचे आयुर्वेद, होमियोपैथिक व यूनानी विधा से विभिन्न रोगों के इलाज की व्यवस्था है। एक साल से दवाओं की कमी के कारण मरीजों को काफी परेशानी हो रही है। हालत यह है कि आयुर्वेद में 55 में से महज छह और होमियोपैथिक में 78 में से महज 10 प्रकार की दवाएं ही उपलब्ध हैं।
जानकारी के अनुसार, जिला अस्पताल परिसर के आयुर्वेदिक व होमियोपैथिक क्लीनिक में बुखार की दवा नहीं है और यूनानी क्लीनिक में गैस से राहत दिलाने के लिए चूरन तक नहीं बचा है। ऐसे में यहां मरीजों को इलाज तो मुफ्त में मिल रहा है लेकिन दवाओं के लिए गोरखपुर तक की दौड़ लगानी पड़ रही है।
होमियोपैथिक में रोजाना 60 से 65 मरीज इलाज के लिए आते हैं। वहीं आयुर्वेद क्लीनिक में रोजाना 30 से 34 मरीज और यूनानी क्लीनिक में रोजाना 30 से 35 मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। होमियोपैथिक क्लीनिक में 78 प्रकार की दवा होनी चाहिए। लेकिन आज की तारीख में यहां पर दस प्रकार की दवा बची है। वहीं यूनानी क्लीनिक में जरूरी 37 प्रकार की दवाओं की तुलना में तीन प्रकार की तो आयुर्वेदिक क्लीनिक में जरूरी 55 प्रकार की दवा में से छह प्रकार की दवा ही क्लीनिक में रह गई है।
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साधारण बीमारियों की तक की नहीं दवा
होमियोपैथिक क्लीनिक में बुखार, पेट दर्द, सर्दी-जुकाम की दवा नहीं है और आयुर्वेदिक क्लीनिक में बुखार, पेट दर्द, एनिमिया, खुजली, लिकोरिया की दवा नहीं है। जबकि यूनानी क्लीनिक का हाल यह है कि यहां सिर्फ बवासीर, बुखार व जोड़ों के दर्द की दवा ही बची है। बाकी बीमारियों की दवा लोगों को बाहर से खरीदना पड़ता है। यहां पर इलाज कराने आए चेहरी निवासी सूरज ने बताया कि उन्हें बुखार, पेट दर्द व जुकाम व खांसी था। दो दिन पहले आयुर्वेदिक क्लीनिक में डॉक्टर को दिखाया तो उन्होंने जो दवा लिखी, वह महराजगंज के निजी दवा की दुकान में भी नहीं मिली और उन्हें 225 रुपये की दवा गोरखपुर से मंगानी पड़ी।
आयुष से एलोपैथ में रेफर हो रहे मरीज
जिला अस्पताल के आयुष विंग में दवा न होने से डाक्टरों द्वारा मरीजों को एलोपैथ अनुभाग में रेफर किया जा रहा है। होमियोपैथ चिकित्सा पद्धति के डॉ. हरिकेश कुमार ने बताया कि जो दवाएं हैं वह मरीजों को दी जा रही हैं। इसके बाद अगर मरीज पहुंच रहे हैं तो उन्हें एलोपैथ में रेफर कर दिया जाता है। यही बात आयुर्वेद के डॉ. अनिल व यूनानी के डॉ. जावेद अली अंसारी ने भी कही।
स्पीकअप
बवासीर और चर्म रोग की दिक्कत थी। डॉक्टर को दिखाया तो उन्हें जो दवा लिखी गई, वह क्लीनिक में नहीं मिली। ऐसे में सदर अस्पताल के इमरजेंसी में जाकर ऐलोपैथ पद्धति से इलाज कराना पड़ा।
-संतोष जायसवाल निवासी भागाटार
हाथ में खुजली हो रही थी। दवा के लिए आया तो चिकित्सक ने एलोपैथ के डॉक्टर को दिखने की सलाह दी है। बताया गया कि यूनानी क्लीनिक में इस मर्ज की दवा नहीं है। फिर बाहर जाकर डॉक्टर को दिखाया और दवा लिया।
- रिजवान अहमद निवासी झंझनपुर
वर्जन
दवाओं की अनुपलब्धता को लेकर आयुष विंग से रिपोर्ट मांगी जाएगी। जो दवाएं नहीं हैं उन्हें जल्द से जल्द मंगाकर मरीजों के लिए उपलब्ध कराया जाएगा।
- राजेश द्विवेदी, प्रभारी सीएमओ महराजगंज
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यूनानी क्लीनिक में 37 प्रकार की दवा में सिर्फ तीन प्रकार की दवाएं ही बचीं
महराजगंज। जिला अस्पताल परिसर में आयुष विंग ही बीमार है। यहां एक ही छत के नीचे आयुर्वेद, होमियोपैथिक व यूनानी विधा से विभिन्न रोगों के इलाज की व्यवस्था है। एक साल से दवाओं की कमी के कारण मरीजों को काफी परेशानी हो रही है। हालत यह है कि आयुर्वेद में 55 में से महज छह और होमियोपैथिक में 78 में से महज 10 प्रकार की दवाएं ही उपलब्ध हैं।
जानकारी के अनुसार, जिला अस्पताल परिसर के आयुर्वेदिक व होमियोपैथिक क्लीनिक में बुखार की दवा नहीं है और यूनानी क्लीनिक में गैस से राहत दिलाने के लिए चूरन तक नहीं बचा है। ऐसे में यहां मरीजों को इलाज तो मुफ्त में मिल रहा है लेकिन दवाओं के लिए गोरखपुर तक की दौड़ लगानी पड़ रही है।
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होमियोपैथिक में रोजाना 60 से 65 मरीज इलाज के लिए आते हैं। वहीं आयुर्वेद क्लीनिक में रोजाना 30 से 34 मरीज और यूनानी क्लीनिक में रोजाना 30 से 35 मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। होमियोपैथिक क्लीनिक में 78 प्रकार की दवा होनी चाहिए। लेकिन आज की तारीख में यहां पर दस प्रकार की दवा बची है। वहीं यूनानी क्लीनिक में जरूरी 37 प्रकार की दवाओं की तुलना में तीन प्रकार की तो आयुर्वेदिक क्लीनिक में जरूरी 55 प्रकार की दवा में से छह प्रकार की दवा ही क्लीनिक में रह गई है।
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साधारण बीमारियों की तक की नहीं दवा
होमियोपैथिक क्लीनिक में बुखार, पेट दर्द, सर्दी-जुकाम की दवा नहीं है और आयुर्वेदिक क्लीनिक में बुखार, पेट दर्द, एनिमिया, खुजली, लिकोरिया की दवा नहीं है। जबकि यूनानी क्लीनिक का हाल यह है कि यहां सिर्फ बवासीर, बुखार व जोड़ों के दर्द की दवा ही बची है। बाकी बीमारियों की दवा लोगों को बाहर से खरीदना पड़ता है। यहां पर इलाज कराने आए चेहरी निवासी सूरज ने बताया कि उन्हें बुखार, पेट दर्द व जुकाम व खांसी था। दो दिन पहले आयुर्वेदिक क्लीनिक में डॉक्टर को दिखाया तो उन्होंने जो दवा लिखी, वह महराजगंज के निजी दवा की दुकान में भी नहीं मिली और उन्हें 225 रुपये की दवा गोरखपुर से मंगानी पड़ी।
आयुष से एलोपैथ में रेफर हो रहे मरीज
जिला अस्पताल के आयुष विंग में दवा न होने से डाक्टरों द्वारा मरीजों को एलोपैथ अनुभाग में रेफर किया जा रहा है। होमियोपैथ चिकित्सा पद्धति के डॉ. हरिकेश कुमार ने बताया कि जो दवाएं हैं वह मरीजों को दी जा रही हैं। इसके बाद अगर मरीज पहुंच रहे हैं तो उन्हें एलोपैथ में रेफर कर दिया जाता है। यही बात आयुर्वेद के डॉ. अनिल व यूनानी के डॉ. जावेद अली अंसारी ने भी कही।
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बवासीर और चर्म रोग की दिक्कत थी। डॉक्टर को दिखाया तो उन्हें जो दवा लिखी गई, वह क्लीनिक में नहीं मिली। ऐसे में सदर अस्पताल के इमरजेंसी में जाकर ऐलोपैथ पद्धति से इलाज कराना पड़ा।
-संतोष जायसवाल निवासी भागाटार
हाथ में खुजली हो रही थी। दवा के लिए आया तो चिकित्सक ने एलोपैथ के डॉक्टर को दिखने की सलाह दी है। बताया गया कि यूनानी क्लीनिक में इस मर्ज की दवा नहीं है। फिर बाहर जाकर डॉक्टर को दिखाया और दवा लिया।
- रिजवान अहमद निवासी झंझनपुर
वर्जन
दवाओं की अनुपलब्धता को लेकर आयुष विंग से रिपोर्ट मांगी जाएगी। जो दवाएं नहीं हैं उन्हें जल्द से जल्द मंगाकर मरीजों के लिए उपलब्ध कराया जाएगा।
- राजेश द्विवेदी, प्रभारी सीएमओ महराजगंज