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Maharajganj News: सोहगीबरवा, शिकारपुर और भोथहा में बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन शुरू
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निचलौल। नारायणी गंडक की बाढ़ से दियारा क्षेत्र के सोहगीबरवा, शिकारपुर और भोथहा गांवों में हुए नुकसान का आकलन करने के लिए सोमवार को जिला और तहसील प्रशासन की विशेष टीम मौके पर पहुंची। टीम नुकसान से संबंधित विभिन्न तथ्यों को अपनी रिपोर्ट में शामिल करेगी।
पोस्ट डिजास्टर नीड असेसमेंट (पीडीएनए) के तहत विभिन्न विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों ने क्षतिग्रस्त परिसंपत्तियों, बुनियादी सुविधाओं और प्रभावित परिवारों की स्थिति का जायजा लेना शुरू किया। संबंधित विभागों को अगले 72 घंटे के भीतर क्षति का विस्तृत आकलन कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। इस रिपोर्ट के आधार पर प्रभावित क्षेत्र में राहत, मरम्मत, पुनर्बहाली और पुनर्निर्माण की जरूरतों का निर्धारण किया जाएगा।
दियारा क्षेत्र में बाढ़ का असर इतना व्यापक था कि लोगों को घरों की छतों और बाढ़ आश्रय स्थलों में शरण लेकर समय गुजारना पड़ा। कई परिवारों के घरों में रखा अनाज और घरेलू सामान नष्ट हो गया, जबकि पशुधन को भी भारी नुकसान पहुंचा। बाढ़ से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। अब प्रशासन का जोर नुकसान की वास्तविक स्थिति का आकलन कर प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक सुविधाओं की बहाली की जरूरतों को चिह्नित करने पर है।
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भवनों से लेकर जरूरी सेवाओं तक का होगा आकलन
जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, 19 अक्तूबर को तीनों गांवों में स्थलीय निरीक्षण और विभागीय समन्वय की प्रक्रिया शुरू की गई। स्वास्थ्य, सिंचाई, विद्युत, लोक निर्माण विभाग, राजस्व और पंचायती राज विभाग समेत संबंधित विभागों के अधिकारियों-कर्मचारियों व ग्राम प्रधानों के साथ बैठक कर क्षति की स्थिति पर चर्चा की गई। विभागों को अपने-अपने क्षेत्र में हुए नुकसान का स्थलीय सत्यापन कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने को कहा गया है। आकलन में भवनों और अन्य परिसंपत्तियों को हुई संरचनात्मक क्षति के साथ बिजली, स्वास्थ्य व दूसरी आवश्यक सेवाओं से जुड़ी गैर-संरचनात्मक क्षति का भी ब्योरा जुटाया जाएगा। इसके साथ ही मरम्मत, पुनर्निर्माण और जरूरी सेवाओं की बहाली में आने वाली जरूरतों को भी रिपोर्ट में शामिल किया जाएगा।
तहसील से जिला स्तर तक होगी रिपोर्ट की समीक्षा
सभी संबंधित विभाग अपनी रिपोर्ट उपजिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित तहसील स्तरीय समिति को सौंपेंगे। समिति रिपोर्टों का सत्यापन, समीक्षा और समेकन करने के बाद उन्हें जिला स्तरीय समिति को भेजेगी। निर्धारित प्रक्रिया के तहत परीक्षण और अनुमोदन के बाद रिपोर्ट संबंधित राहत कार्यालय को प्रेषित की जाएगी। इसका उद्देश्य बाढ़ से हुई वास्तविक क्षति और पुनर्बहाली की जरूरतों का तथ्यपरक आकलन कर नियमानुसार राहत, क्षतिपूर्ति और पुनर्निर्माण की कार्रवाई के लिए आधार तैयार करना है।
प्रभावित परिवारों को राहत देने की भी निगरानी
एसडीएम अवनीश त्रिपाठी ने बताया कि शासन के निर्देश पर जिला और तहसील स्तर की टीमें सोहगीबरवा क्षेत्र में पहुंची हैं। संबंधित विभागों के अधिकारी और कर्मचारी कुछ दिनों तक क्षेत्र में रहकर नुकसान का आकलन करेंगे। निर्धारित समय में रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजी जाएगी। इसके बाद शासन से मिलने वाले निर्देशों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस दौरान मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ सुरेंद्र चौधरी, आपदा विशेषज्ञ चंदन द्विवेदी, ग्राम सचिव आशुतोष दुबे, सीएचसी अधीक्षक डॉ उमेश चन्द विद्युत विभाग, तीनों ग्राम पंचायतों के प्रधान और अन्य संबंधित लोग मौजूद रहे।
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पोस्ट डिजास्टर नीड असेसमेंट (पीडीएनए) के तहत विभिन्न विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों ने क्षतिग्रस्त परिसंपत्तियों, बुनियादी सुविधाओं और प्रभावित परिवारों की स्थिति का जायजा लेना शुरू किया। संबंधित विभागों को अगले 72 घंटे के भीतर क्षति का विस्तृत आकलन कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। इस रिपोर्ट के आधार पर प्रभावित क्षेत्र में राहत, मरम्मत, पुनर्बहाली और पुनर्निर्माण की जरूरतों का निर्धारण किया जाएगा।
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दियारा क्षेत्र में बाढ़ का असर इतना व्यापक था कि लोगों को घरों की छतों और बाढ़ आश्रय स्थलों में शरण लेकर समय गुजारना पड़ा। कई परिवारों के घरों में रखा अनाज और घरेलू सामान नष्ट हो गया, जबकि पशुधन को भी भारी नुकसान पहुंचा। बाढ़ से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। अब प्रशासन का जोर नुकसान की वास्तविक स्थिति का आकलन कर प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक सुविधाओं की बहाली की जरूरतों को चिह्नित करने पर है।
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भवनों से लेकर जरूरी सेवाओं तक का होगा आकलन
जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, 19 अक्तूबर को तीनों गांवों में स्थलीय निरीक्षण और विभागीय समन्वय की प्रक्रिया शुरू की गई। स्वास्थ्य, सिंचाई, विद्युत, लोक निर्माण विभाग, राजस्व और पंचायती राज विभाग समेत संबंधित विभागों के अधिकारियों-कर्मचारियों व ग्राम प्रधानों के साथ बैठक कर क्षति की स्थिति पर चर्चा की गई। विभागों को अपने-अपने क्षेत्र में हुए नुकसान का स्थलीय सत्यापन कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने को कहा गया है। आकलन में भवनों और अन्य परिसंपत्तियों को हुई संरचनात्मक क्षति के साथ बिजली, स्वास्थ्य व दूसरी आवश्यक सेवाओं से जुड़ी गैर-संरचनात्मक क्षति का भी ब्योरा जुटाया जाएगा। इसके साथ ही मरम्मत, पुनर्निर्माण और जरूरी सेवाओं की बहाली में आने वाली जरूरतों को भी रिपोर्ट में शामिल किया जाएगा।
तहसील से जिला स्तर तक होगी रिपोर्ट की समीक्षा
सभी संबंधित विभाग अपनी रिपोर्ट उपजिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित तहसील स्तरीय समिति को सौंपेंगे। समिति रिपोर्टों का सत्यापन, समीक्षा और समेकन करने के बाद उन्हें जिला स्तरीय समिति को भेजेगी। निर्धारित प्रक्रिया के तहत परीक्षण और अनुमोदन के बाद रिपोर्ट संबंधित राहत कार्यालय को प्रेषित की जाएगी। इसका उद्देश्य बाढ़ से हुई वास्तविक क्षति और पुनर्बहाली की जरूरतों का तथ्यपरक आकलन कर नियमानुसार राहत, क्षतिपूर्ति और पुनर्निर्माण की कार्रवाई के लिए आधार तैयार करना है।
प्रभावित परिवारों को राहत देने की भी निगरानी
एसडीएम अवनीश त्रिपाठी ने बताया कि शासन के निर्देश पर जिला और तहसील स्तर की टीमें सोहगीबरवा क्षेत्र में पहुंची हैं। संबंधित विभागों के अधिकारी और कर्मचारी कुछ दिनों तक क्षेत्र में रहकर नुकसान का आकलन करेंगे। निर्धारित समय में रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजी जाएगी। इसके बाद शासन से मिलने वाले निर्देशों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस दौरान मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ सुरेंद्र चौधरी, आपदा विशेषज्ञ चंदन द्विवेदी, ग्राम सचिव आशुतोष दुबे, सीएचसी अधीक्षक डॉ उमेश चन्द विद्युत विभाग, तीनों ग्राम पंचायतों के प्रधान और अन्य संबंधित लोग मौजूद रहे।