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Maharajganj News: गन्ने के साथ बोए लहसुन, पांच माह में हो जाएंगे मालामाल

Thu, 14 Dec 2023 05:24 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज Updated Thu, 14 Dec 2023 05:24 PM IST
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Sow garlic with sugarcane, you will become rich in five months
निचलौल। शरदकाल में गन्ने के साथ लहसुन की खेती कर किसान मालामाल हो सकते हैं। इससे बसंतकाल में बोए गए गन्ने की तुलना में 20 से 25 फीसदी अधिक पैदावार होगी। वहीं दो लाइन के बीच खाली स्थान में लहसुन लगाकर प्रति एकड़ गन्ने में 35 से 40 क्विंटल लहसुन की पैदावार ले सकते हैं। लहसुन 50 रुपये प्रति किलो औसतन बेचने पर करीब दो लाख रुपये का मुनाफा होगा।
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ये जानकारी उत्तर प्रदेश गन्ना किसान संस्थान प्रशिक्षण केंद्र पिपराइच गोरखपुर के सहायक निदेशक ओमप्रकाश गुप्ता ने दी। उन्होंने किसानों को सलाह देते हुए कहा कि लहसुन की प्रमुख प्रजातियां जी-41 यमुना सफेद-1, यमुना सफेद-2, जी 323 आदि हैं। बाजार में बिकने वाले स्वस्थ लहसुन के जवा (कली) को लगा सकते हैं। वहीं गन्ने की फसल की अधिक उपज देने वाली प्रमुख प्रजातियां 13235, 9232, 118, 14201, 13452 आदि हैं। गन्ने का एक या दो आंख का टुकड़ा (गेड़ी) काटकर उसे कार्बेंडाजीम या हेक्सास्टाफ के घोल में 10 मिनट तक उपचारित अवश्य करें। इन दोनों फसलों का एक साथ बेहतर पैदावार के लिए खेतों की गहरी जुताई करें।
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अंतिम जुताई के समय 80 से 90 क्विंटल गोबर की सड़ी खाद दो किलोग्राम ट्राईकोडर्मा पूरे खेत में बिखेर कर मिट्टी में मिला दें। उसके बाद ट्रेंच विधि से नाली बनाएं। फिर गन्ना बोने के बाद दोनों लाइनों के बीच बचे खाली भूमि पर लहसुन के लिए अलग से उर्वरक 50 किलोग्राम तथा 25 किलोग्राम पोटाश प्रयोग कर मिट्टी में मिलाकर बराबर कर दें। उसके बाद लाइन से लहसुन की बुआई कर दें। एक लाइन से दूसरी लाइन की दूरी 15 सेंटीमीटर तथा कली से कली की दूरी 10 सेंटीमीटर और छह से सात सेंटीमीटर गहराई पर बुआई करें। बुआई के 35 से 40 दिन में निराई-गुड़ाई कर खरपतवार निकाल दें।
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नमी की दशा में 30 किलोग्राम यूरिया का प्रयोग करें। बुआई के 60 से 65 दिनों पर दोबारा 25 किलोग्राम यूरिया का प्रयोग करें। सिंचाई भूमि और मौसम के ऊपर निर्भर है। किसान अपनी सुविधा के अनुसार बाजार को देखते हुए शरदकालीन गन्ने के साथ लहसुन, आलू, गोभी, टमाटर, मूली, पालक, तोरिया, गाजर मेथी आदि अवश्य बोएं। इसके लिए विशेष प्रशिक्षण अभियान चलाया जा रहा है।
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