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Maharajganj News: नेपाल से कुशीनगर में खैर की लकड़ी बेचकर मालामाल हो रहे हैं तस्कर
Tue, 09 Sep 2025 01:53 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Tue, 09 Sep 2025 01:53 AM IST
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भेड़ियारी गांव में पास डंप किया गया खैरा की लकड़ी, फोटो स्त्रोत, फाइल फोटो
निचलौल। सोहगीबरवा वन्य जीव प्रभाग के अंतर्गत निचलौल और शिवपुर वन रेंज के जंगलों से होकर गुजरी नारायणी नदी के रास्ते तस्कर खैर की लकड़ी नेपाल के जंगलों से कुशीनगर पहुंचाकर मालामाल हो रहे हैं। तस्करों को इस औषधीय लकड़ी के बदले अच्छी कीमत मिलती है।
बीते चार सितंबर को इसकी बरामदगी हुई तो इस धंधे का पोल खुला। वहीं वन विभाग लकड़ी तस्करों पर शिकंजा कसते हुए उनके नेटवर्क को खंगालना शुरू कर दिया है। नेपाल के जंगलों से तस्कर खैर की लकड़ी की अवैध तरीके से कटान कर नारायणी नदी के रास्ते सरहद पार कर नदी से सटे भेड़ियारी गांव के पास डंप किए थे। इस दौरान वन कर्मियों को इसकी भनक लग गई थी।
इसके बाद वन कर्मियों ने छापा मारकर डंप खैर की लकड़ी बरामद कर लिया था। माना जाता है कि सोहगीबरवा वन्य जीव प्रभाग के निचलौल वन रेंज के कुछ हिस्सों के साथ ही नेपाल के जंगलों में भारी मात्रा में खैर के पेड़ हैं। अब खैर तस्करी का कुशीनगर से कनेक्शन जानने के लिए वन विभाग की टीमें सुबूत जुटा रही हैं।
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अभी तक की जांच में सामने आया है कि नेपाल के जंगलों में पर्याप्त मात्रा में मिलने वाली खैर की लकड़ी को तस्कर अवैध तरीके से कटान कर नारायणी नदी में फेंक देते हैं। फिर तस्कर लकड़ी को नाव की मदद से नदी के रास्ते बेरोकटोक कुशीनगर जिले में विभिन्न सुरक्षित जगहों पर पहुंचा देते हैं। जहां पर तस्कर लकड़ी के बदले मोटी रकम लेकर बेच देते हैं। सूत्रों के मुताबिक खैर की लकड़ी के इस धंधे में नेपाल से लेकर कुशीनगर जिले तक के धंधेबाजों का तार जुड़ा हुआ है।
हर शख्स का अलग-अलग क्षेत्र तक लकड़ी को सुरक्षित पहुंचाना रहता है, जिसके बदले उन्हें अच्छी रकम मिलती है। धंधेबाज रात के वक्त नदी के रास्ते नाव की मदद से इस करतूत को अंजाम देते है।
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बीते चार सितंबर को इसकी बरामदगी हुई तो इस धंधे का पोल खुला। वहीं वन विभाग लकड़ी तस्करों पर शिकंजा कसते हुए उनके नेटवर्क को खंगालना शुरू कर दिया है। नेपाल के जंगलों से तस्कर खैर की लकड़ी की अवैध तरीके से कटान कर नारायणी नदी के रास्ते सरहद पार कर नदी से सटे भेड़ियारी गांव के पास डंप किए थे। इस दौरान वन कर्मियों को इसकी भनक लग गई थी।
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इसके बाद वन कर्मियों ने छापा मारकर डंप खैर की लकड़ी बरामद कर लिया था। माना जाता है कि सोहगीबरवा वन्य जीव प्रभाग के निचलौल वन रेंज के कुछ हिस्सों के साथ ही नेपाल के जंगलों में भारी मात्रा में खैर के पेड़ हैं। अब खैर तस्करी का कुशीनगर से कनेक्शन जानने के लिए वन विभाग की टीमें सुबूत जुटा रही हैं।
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अभी तक की जांच में सामने आया है कि नेपाल के जंगलों में पर्याप्त मात्रा में मिलने वाली खैर की लकड़ी को तस्कर अवैध तरीके से कटान कर नारायणी नदी में फेंक देते हैं। फिर तस्कर लकड़ी को नाव की मदद से नदी के रास्ते बेरोकटोक कुशीनगर जिले में विभिन्न सुरक्षित जगहों पर पहुंचा देते हैं। जहां पर तस्कर लकड़ी के बदले मोटी रकम लेकर बेच देते हैं। सूत्रों के मुताबिक खैर की लकड़ी के इस धंधे में नेपाल से लेकर कुशीनगर जिले तक के धंधेबाजों का तार जुड़ा हुआ है।
हर शख्स का अलग-अलग क्षेत्र तक लकड़ी को सुरक्षित पहुंचाना रहता है, जिसके बदले उन्हें अच्छी रकम मिलती है। धंधेबाज रात के वक्त नदी के रास्ते नाव की मदद से इस करतूत को अंजाम देते है।