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Maharajganj News: चीनी नेपाल भेजकर दोगुना मुनाफा ले रहे तस्कर
Tue, 25 Mar 2025 12:56 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Tue, 25 Mar 2025 12:56 AM IST
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महराजगंज। तस्कर सीमावर्ती इलाकों से चीनी नेपाल पहुंचा रहे हैं। 40 से 42 रुपये की चीनी नेपाल जाते ही 70 से 80 रुपये की हो जाती है। बीते दिनों सीमावर्ती इलाकों में बरामद हुई थी। ईद को देखते हुए बड़े पैमाने पर चीनी की तस्करी हो रही है।
सूत्रों की माने तो एक बोरे में 1400 रुपये की बचत होती है। सीमावर्ती क्षेत्र से रोजाना 50 तस्कर साइकिल से 50 किलो का बोरा लेकर पगडंडियों के रास्ते नेपाल पहुंचा दे रहे हैं। सोनौली के दो नंबर गली के निकट से कैरियरों चीनी का बोरा बॉर्डर पार कर रहे हैं।
चोरी-छिपे भारतीय क्षेत्र में पिकअप या अन्य वाहन से चीनी का खेप पहुुंचता है। इसके एवज में तस्कराें की ओर से कैरियरों को 100 से 300 रुपये तक दिया जाता है। नाम नहीं छापने की शर्त पर दो तस्करों ने बताया कि भारतीय क्षेत्र में 42 रुपये प्रति किलो चीनी मिलती है, जबकि नेपाल में 70-80 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिक जाती है।
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सूत्रों की माने तो नेपाल से सटे ठूठीबारी, माधवनगर, लालपुर, बैठवलिया, रेंगहिया, बहुवार, झुलनीपुर, इटहिया, लक्ष्मीपुर, शितलापुर, बरगदवा, भगवानपुर, परसामलिक, भगवानपुर, सोनौली, कैलासनगर, खनुवा जैसे दर्जनों ऐसे गांव हैं, जहां पर तस्करी का सामान डंपकर मौका मिलते ही नेपाल पहुंचा दिया जाता है।
चीनी निर्यात पर है रोक : नेपाल में चीनी महंगी होने के चलते भारत से तस्करी की जा रही है। भारत सरकार द्वारा चीनी नेपाल निर्यात पर रोक लगाई गई है। इसके बावजूद साइकिल दो पहिया वाहनों से चीनी की बोरियों की तस्करी की जा रही है। भारत-नेपाल की खुली सीमा से कभी कपड़ा, खाद, गेंहू, कास्मेटिक तो कभी स्क्रैप की तस्करी की खबर सामने आती है।
एक ही बिल पर कई बार सीमावर्ती गांव में डंप किया जा रहा है चीनी : नेपाल और भारत में नियम बदलते ही तस्करी शुरू हो जाती है।
तस्कर बहुत ही गोपनीय तरीके से काम करते हैं। चीनी नौतनवा, सोनौली, ठूठीबारी और सिसवा में मंगवाई जाती है। फिर असली बिल पर पिकअप से सिंगल मार्ग से सीमावर्ती गांव पहुंचा दी जाती है। ठिकाने पर पहुंचने के बाद बिल को फाड़ दिया जाता है। थोक कारोबारी इसके लिए अनिवार्य ई-वे-बिल नहीं बनाते। इसके बाद फिर उसी बिल पर दिन भर सीमावर्ती गांव में चीनी को गोदाम में डंप कर साइकिल से कैरियर नेपाल पहुंचा रहे हैं।
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सूत्रों की माने तो एक बोरे में 1400 रुपये की बचत होती है। सीमावर्ती क्षेत्र से रोजाना 50 तस्कर साइकिल से 50 किलो का बोरा लेकर पगडंडियों के रास्ते नेपाल पहुंचा दे रहे हैं। सोनौली के दो नंबर गली के निकट से कैरियरों चीनी का बोरा बॉर्डर पार कर रहे हैं।
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चोरी-छिपे भारतीय क्षेत्र में पिकअप या अन्य वाहन से चीनी का खेप पहुुंचता है। इसके एवज में तस्कराें की ओर से कैरियरों को 100 से 300 रुपये तक दिया जाता है। नाम नहीं छापने की शर्त पर दो तस्करों ने बताया कि भारतीय क्षेत्र में 42 रुपये प्रति किलो चीनी मिलती है, जबकि नेपाल में 70-80 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिक जाती है।
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सूत्रों की माने तो नेपाल से सटे ठूठीबारी, माधवनगर, लालपुर, बैठवलिया, रेंगहिया, बहुवार, झुलनीपुर, इटहिया, लक्ष्मीपुर, शितलापुर, बरगदवा, भगवानपुर, परसामलिक, भगवानपुर, सोनौली, कैलासनगर, खनुवा जैसे दर्जनों ऐसे गांव हैं, जहां पर तस्करी का सामान डंपकर मौका मिलते ही नेपाल पहुंचा दिया जाता है।
चीनी निर्यात पर है रोक : नेपाल में चीनी महंगी होने के चलते भारत से तस्करी की जा रही है। भारत सरकार द्वारा चीनी नेपाल निर्यात पर रोक लगाई गई है। इसके बावजूद साइकिल दो पहिया वाहनों से चीनी की बोरियों की तस्करी की जा रही है। भारत-नेपाल की खुली सीमा से कभी कपड़ा, खाद, गेंहू, कास्मेटिक तो कभी स्क्रैप की तस्करी की खबर सामने आती है।
एक ही बिल पर कई बार सीमावर्ती गांव में डंप किया जा रहा है चीनी : नेपाल और भारत में नियम बदलते ही तस्करी शुरू हो जाती है।
तस्कर बहुत ही गोपनीय तरीके से काम करते हैं। चीनी नौतनवा, सोनौली, ठूठीबारी और सिसवा में मंगवाई जाती है। फिर असली बिल पर पिकअप से सिंगल मार्ग से सीमावर्ती गांव पहुंचा दी जाती है। ठिकाने पर पहुंचने के बाद बिल को फाड़ दिया जाता है। थोक कारोबारी इसके लिए अनिवार्य ई-वे-बिल नहीं बनाते। इसके बाद फिर उसी बिल पर दिन भर सीमावर्ती गांव में चीनी को गोदाम में डंप कर साइकिल से कैरियर नेपाल पहुंचा रहे हैं।